माता-पिता के चिल्लाने से बच्चों के दिमाग पर पड़ क्या असर पड़ता है? डॉक्टर से जानें

How Does Parents' Yelling Affect A Child: क्या आपका बच्चा भी हल्की उंची अवाज में सहम जाता है? अगर हां तो इसका मतलब है कि आपके घर पर या उसपर चिल्लाने का सीधा असर बच्चे के दिमाग पर पड़ रहा है। आइए जानते हैं कैसे?

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Written By: Vidya Sharma | Published : October 9, 2025 4:51 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Parents Ke Chillane Se Bacho Ke Dimag Par Kya Asar Padta Hai: कई माता-पिता थोड़ी-थोड़ी बात पर आपस में चिल्लाने लगते हैं या वह बच्चों पर गुस्सा करने लगते हैं, जो सभी को आम बात लगती है। दिनभर की थकान, काम का तनाव और बच्चों की शरारतें- सब मिलकर कभी-कभी माता-पिता को चिल्लाने पर मजबूर कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार चिल्लाने से बच्चों के दिमाग और भावनाओं पर क्या असर पड़ता है?

भले ही आपको फर्क न पता चले, लेकिन घर पर होने वाली या बच्चों के साथ होने वाली चिल्लम-चिल्ली छोटे व बड़े, दोनों उम्र के बच्चों के दिमाग पर असर डालती है। कैसे असर? यही सवाल हमने साइकोलॉजिस्ट और महिला-और मानव अधिकारों की समर्थक डॉ. मालिनी सबा से पूछा। उन्होंने जो भी जानकारी दी है, हमने वो इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने की कोशिश की है। आइए जानते हैं माता-पिता के चिल्लाने से बच्चों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है।

चिल्लाने से बच्चों के दिमाग में क्या होता है?

गुस्से में चिल्लाने पर बच्चे का मस्तिष्क डर और तनाव की स्थिति में चला जाता है। उनके शरीर में कॉर्टिसोल नामक तनाव हार्मोनबढ़ जाता है। लंबे समय तक यह हार्मोन अधिक रहने से बच्चे में चिंता, अवसाद और सीखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

बच्चों की उम्र के हिसाब से असर

छोटे बच्चे का मस्तिष्क अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए चिल्लाना उन्हें बहुत डराता है और वे सहज रूप से सीख नहीं पाते। वहीं किशोरावस्था में लगातार डांट और चिल्लाना उनके आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

चिल्लाने की जगह क्या करें

  1. संयम बनाएं- गुस्से में तुरंत चिल्लाने की बजाय पहले खुद शांत हो जाएँ।
  2. सकारात्मक भाषा अपनाएं- बच्चों को डांटने की बजाय समझाएं।
  3. उदाहरण- बच्चा होमवर्क नहीं करता? चिल्लाने की बजाय उसके साथ बैठकर कारण समझें और हल खोजें।
  4. प्रोत्साहन दें- छोटी-छोटी अच्छी आदतों और प्रयासों को सराहें। इससे बच्चा और आत्मविश्वासी बनता है।

माता-पिता के लिए टिप्स

  • अपने तनाव को पहचानें- अगर आप खुद तनाव में हैं, तो गुस्से को कंट्रोल करनामुश्किल होता है।
  • शांत होने के तरीके अपनाएं- गहरी सांस लें, ध्यान करें, थोड़ी शारीरिक गतिविधि करें या थोड़ा समय अकेले बिताएं।
  • संवाद बनाएं, आदेश नहीं- बच्चों से बात करें, उन्हें समझाएं कि गलती सुधारने का मौका है।

चिल्लाने के नुकसान

  • बच्चों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।
  • उनकी सोचने और सीखने की क्षमता पर असर पड़ता है।
  • लंबे समय में भावनात्मक समस्याएं और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।
  • सामाजिक जीवन और रिश्तों में भी असर दिखाई दे सकता है।

सबसे जरूरी बात

डॉ. मालिनी सबा कहती हैं, ‘बच्चों के लिए प्यार और सुरक्षा की भावना सबसे अहम है। जब हम गुस्से में चिल्लाते हैं, तो वे केवल डर महसूस करते हैं और सीखने या सोचने की जगह बचने पर ध्यान देते हैं।’ इसलिए, हर बार गुस्सा आने पर एक गहरी सांस लें और बच्चों के साथ संवेदनशील, प्यार भरा और सकारात्मक संवाद करें। चिल्लाना तात्कालिक राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में यह बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित करता है। संयम, समझदारी और प्यार से बच्चों को समझाना उन्हें स्वस्थ, खुशहाल और आत्मविश्वासी बनाता है।

Highlights

  • आपका बच्चों के साथ कैसे बीहेयर करते हैं, इसका बच्चे के दिमाग पर सीधा असर पड़ता है।
  • चिल्लाने से बच्चे के मन में डर बैठ सकता है।
  • चिल्लाने के बजाय बच्चे से प्यार से बात करें और समझाएं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।