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न चाहते हुए भी पूरा दिन इंस्टाग्राम स्क्रोल करने में निकल जाता है? जानिए यह आदत क्यों बनती है और कैसे छुड़ाएं

क्या आप भी अपनी सोफे पर लेटे-बैठे, चलते-घूमते और खाते हुए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां और इस आदत को सुधारना चाहते हैं तो आइए डॉक्टर मालिनी से जानते हैं।

न चाहते हुए भी पूरा दिन इंस्टाग्राम स्क्रोल करने में निकल जाता है? जानिए यह आदत क्यों बनती है और कैसे छुड़ाएं
VerifiedVERIFIED By: Dr. Malini Saba

Written by Vidya Sharma |Updated : February 11, 2026 9:37 AM IST

Social Media Scroll Karne Ki Aadat: सोशल मीडिया के बढ़ते बुखार से आज हर कोई परेशान है। एक ओर जहां बच्चे पूरा दिन में फोन में लगे रहते हैं तो वहीं बड़े फोन में गेम खेलते हैं या यूट्यूब शॉर्ट्स देखते हैं। आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि ‘मैं इंस्टाग्राम कम चलाना चाहता/चाहती हूं, लेकिन पता ही नहीं चलता कब घंटों निकल जाते हैं।’ फोन हाथ में लेते ही रील्स, स्टोरीज और पोस्ट्स का ऐसा सिलसिला शुरू होता है कि दिमाग थक जाता है, लेकिन उंगलियां रुकती नहीं हैं।

कई लोग ऐसे में जो न चाहते हुए भी अपने दिमाग पर कंट्रोल नहीं कर सकते हैं और पूरा दिन या वह समय जिसे वह इन्वेस्ट कर सकते हैं, उसे गवा देते हैं। ऐसे में साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि ‘यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि दिमाग की एक सीखी हुई प्रतिक्रिया होती है। इसका मतलब यह नहीं कि आप कमजोर हैं, बल्कि आपका दिमाग लगातार मिलने वाले छोटे-छोटे सुख का आदी हो गया है।’ इसलिए आज हम आपको डॉक्टर की बताए कुछ ऐसे टिप्स बताने वाले हैं, जिनकी मदद से आप अपनी सभी सोशल मीडिया स्क्रोल करने की आदत को सुधार सकते हैं।

इंस्टाग्राम स्क्रोल करने की आदत क्यों बन जाती है?

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  1. दिमाग को तुरंत खुशी मिलती है- हर लाइक, हर रील और हर नया वीडियो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज करता है। यह वही केमिकल है जो खुशी और संतुष्टि का एहसास देता है। दिमाग इस तुरंत मिलने वाली खुशी को बार-बार चाहता है।
  2. बोरियत से बचने का आसान तरीका- अकेलापन, थकान, इंतजार या खाली समय- इन सब से बचने के लिए फोन सबसे आसान रास्ता बन जाता है। धीरे-धीरे दिमाग हर खाली पल में इंस्टाग्राम खोलने लगता है।
  1. तुलना करने की आदत-लोगों की परफेक्ट लाइफ, बॉडी, ट्रैवल और सफलता देखकर दिमाग खुद को उनसे जोड़ने लगता है। इससे एक अजीब सा खिंचाव बनता है, जिसे छोड़ पाना मुश्किल हो जाता है।
  1. बस एक और रील कहने की आदत-इंस्टाग्राम का डिजाइन ही ऐसा है कि स्क्रोल खत्म ही नहीं होता। दिमाग को रुकने का संकेत नहीं मिलता, इसलिए समय का अंदाजा ही नहीं रहता।

यह आदत कैसे नुकसान पहुंचाती है?

डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, लगातार स्क्रोलिंग से दिमाग को आराम नहीं मिलता, बल्कि वह और ज्यादा उत्तेजित हो जाता है।

इंस्टाग्राम स्क्रोलिंग की आदत छुड़ाने के आसान और व्यावहारिक तरीके

  1. सीधे ‘डिलीट’ न करें

डॉक्टर सबा कहती हैं कि अचानक ऐप हटाने से दिमाग और ज्यादा बेचैन हो सकता है। इसकी बजाय पहले यह समझें कि आप इसे क्यों खोलते हैं- बोरियत, तनाव या अकेलापन? इससे होगा यह कि आप अपनी असल जरूरतों को समझ पाएंगे और चीजों को सही तरीके से हैंडल कर पाएंगे।

  1. समय तय करें, मना नहीं

डॉक्टर कहती हैं कि आप पहले खुद से कहे कि ‘मैं दिन में सिर्फ 30 मिनट इंस्टाग्राम चलाऊंगा/चलाऊंगी।’ इसके लिए फोन में टाइम लिमिट सेट करें। ऐसे करने से आपके दिमाग को भी एक सिगनल मिलेगा कि हमारे पास बस लिमिटेड टाइम है और उसके बाद सोशल मिडिया इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

  1. सुबह उठते ही फोन न उठाएं

दिन की शुरुआत अगर इंस्टाग्राम से होगी, तो दिमाग पूरे दिन उसी मोड में रहेगा। सुबह उठकर पानी पीना, हल्की स्ट्रेचिंग या बस खिड़की से बाहर देखना बेहतर है।

  1. स्क्रोल करने से पहले सवाल पूछें

डॉकटर कहती हैं कि जब भी आपको फोन इस्तेमाल करने का मन करे तो उस समय खुद से पूछें कि 'मैं अभी इंस्टाग्राम क्यों खोल रहा/रही हूं?' कई बार होता यह है कि हमारे सवालों में ही हमारा जवाब होता है। 

  1. नोटिफिकेशन बंद करें

फोन मेें बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन हमारा दिमाग अपनी ओर खींचते हैं। जो लोग या ग्रुप जरूरी हैं, उन्हें छोड़कर बाकी लोगों की नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे होगा यह कि आप सिर्फ काम की चीजों पर फोकस कर पाएंगे।

इंस्टाग्राम की जगह क्या करें?

  1. 5 मिनट टहलें
  2. किसी दोस्त को कॉल करें
  3. डायरी में 2 लाइन लिख लें
  4. आंखें बंद करके गहरी सांस लें
  5. कोई छोटा घरेलू काम कर लें

डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि जब दिमाग को विकल्प मिलते हैं, तो वह धीरे-धीरे नई आदत सीख लेता है।

अपने ऊपर सारा दोष न डालें

यह समझना बहुत जरूरी है कि इंस्टाग्राम की लत आपकी कमजोरी नहीं है। यह टेक्नोलॉजी और दिमाग के बीच बनी एक आदत है, जिसे बदला जा सकता है।

  • खुद से धीरे-धीरे दोस्ती करें, सख्ती नहीं।
  • हर दिन थोड़ा कम स्क्रोल करना भी एक बड़ी जीत है।

आखिर में डॉक्टर ने दी सलाह

इंस्टाग्राम बुरा नहीं है, लेकिन जब वह आपका समय, ध्यान और शांति छीनने लगे, तब रुकना जरूरी हो जाता है। डॉ. मालिनी सबा मानती हैं कि जब हम अपने दिमाग की जरूरतों को समझते हैं, तो आदतें अपने आप बदलने लगती हैं। याद रखें- फोन आपके हाथ में है, आप फोन के नहीं।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।