
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : February 23, 2026 2:39 PM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
Bacho Ki Career Ko Lekar Confusion Kaise Dur Kare: आज का समय कोम्पीटीशन का समय है। बच्चों से बहुत छोटी उम्र में ही पूछा जाने लगता है, ‘आगे चलकर क्या बनोगे?’ परिवार, समाज और मित्रों की अपेक्षाएं धीरे-धीरे उनके मन में दबाव बनाने लगती हैं। नतीजा यह होता है कि कई बच्चों के मन में करियर को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है। वे समझ नहीं पाते कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। एक ओर जहां उनकी अपनी चॉइस होती हैं, तो वहीं दूसरी ओर माता-पिता के सपने। यह एक गंभीर विषय है, इसलिए हम ने साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉ. मालिनी सबा से बात की और सही तरीका जानना चाहा।
हमने माता-पिता की तरफ से पूछा कि ‘ऐसा क्यों करें कि बच्चों के मन में करियर को लेकर आ रहे भ्रम और कंफ्यूज विचारों को कैसे दूर करें और उनमें क्लियरेंस लाएं?’ इसका जवाब देते हुए डॉक्टर सबा ने कहा कि ‘करियर को लेकर उलझन होना असामान्य नहीं है। यह उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें बच्चा अपनी पहचान और रुचियों को समझने की कोशिश करता है। सही मार्गदर्शन और सहयोग से इस भ्रम को स्पष्टता में बदला जा सकता है।’ कैसे? आइए आपको उन तरीकों के बारे में बताते हैं, जो डॉक्टर ने शेयर किए हैं।
डॉक्टर माता-पिता को समझाने के उद्देश्य से कहती हैं कि ‘अक्सर करियर का चुनाव केवल अंकों या आर्थिक लाभ के आधार पर किया जाता है। लेकिन हर बच्चे की क्षमता और रुचि अलग होती है। माता-पिता को चाहिए कि वे ध्यान दें कि बच्चा किस विषय में अधिक रुचि लेता है, किस काम को करते समय उसे आनंद आता है और वह किस क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से अच्छा प्रदर्शन करता है। रुचि और योग्यता के अनुरूप चुना गया क्षेत्र लंबे समय तक संतोष देता है।’
कई बार माता-पिता अनजाने में अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। ‘पड़ोस का बच्चा विज्ञान ले रहा है’ या ‘इस क्षेत्र में ज्यादा कमाई है’ जैसी बातें बच्चे के मन में असुरक्षा और भ्रम पैदा कर सकती हैं। डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, तुलना से आत्मविश्वास कम होता है। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी विशिष्टता के साथ स्वीकार किया जा रहा है।
मन में कंफ्यूज भरे ख्याल आने का एक कारणजानकारी की कमी भी हो सकता है। जैसे आज के समय में करियर के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ रचनात्मक और तकनीकी क्षेत्रों में भी कई संभावनाएं हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जानकारी दें, ताकि वे समझदारी से निर्णय ले सकें।
यदि बच्चा लंबे समय तक असमंजस में है, तो करियर परामर्श उपयोगी हो सकता है। योग्यता और रुचि के आधार पर विशेषज्ञ उचित दिशा सुझा सकते हैं। डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि सही परामर्श से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने निर्णय के प्रति अधिक आश्वस्त होता है।
डॉक्टर बताती हैं कि कई बच्चे गलत निर्णय लेने के डर से आगे नहीं बढ़ पाते। उन्हें लगता है कि एक बार लिया गया निर्णय अंतिम होगा। जरूरी है कि उन्हें समझाया जाए कि जीवन में दिशा बदली जा सकती है। अनुभव से सीखना भी विकास का हिस्सा है।
बच्चों को यह अवसर दें कि वे अपने विचार और शंकाएं खुलकर व्यक्त कर सकें। बिना आलोचना के उनकी बात सुनना और उनकी भावनाओं को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जब बच्चा सुरक्षित महसूस करता है, तभी वह अपने मन की उलझन साझा करता है। करियर को लेकर भ्रम होना स्वाभाविक है। यह उस अवस्था का संकेत है जब बच्चा अपनी पहचान और भविष्य को लेकर गंभीरता से सोच रहा है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।