क्या जहरीली हवा में सांस लेते समय होने वाला स्ट्रेस हमारे डिप्रेशन और स्ट्रेस को बढ़ाता है?

Pollution And Depression: क्या आपने इस बात पर गौर किया है कि पॉल्यूशन के बढ़ने के साथ-साथ हमारी सांसें भी गहरी होती जाती हैं और फिर स्ट्रेस बढ़ता जाता है? आइए साइकोलॉजिस्ट से जानते हैं ऐसा क्यों होता है।

क्या जहरीली हवा में सांस लेते समय होने वाला स्ट्रेस हमारे डिप्रेशन और स्ट्रेस को बढ़ाता है?
VerifiedVERIFIED By: Dr. Malini Saba

Written by Vidya Sharma |Updated : January 2, 2026 11:35 AM IST

Pollution Or Depression Ka Connection: हम अक्सर तनाव को कम, परिवार या पैसों की चिंताओं से जोड़ते हैं। लेकिन एक ऐसा कारण भी है जो रोज हमारे साथ रहता है और हमें पता भी नहीं चलता। हम बात कर रहे हैं प्रदूषित हवा की। यह सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी धीरे-धीरे प्रभावित करती है। इतना सब के बावजूद हम इसे अनदेखा कर देते हैं।

प्रदूषित हवा हमारे शरीर में तनाव पैदा करती है, जिसका असर सीधे हमारे दिमाग और भावनाओं पर पड़ता है। इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानने के लिए हमने अनुभवी साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा से बात की। उन्होंने प्रदूषित हवा का मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले 5 बिंदुओं के बारे में बताया है। जिनके बारे में अगर आप जान लें तो खुद को सुरक्षित रख पाएंगे।

शरीर में तनाव बढ़ना

जब भी हम सांस लेते हैं तो हवा में मौजूद सभी पोल्यूटेंट सांस के जरिए फेफड़ों तक जाते हैं। भले ही हमें महसूस न हो, लेकिन यह फेफड़ों में सूजनपैदा कर देते हैं। इसके कारण हमारी बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगते हैं और मन बेचैन होने लगता है। यही कारण है कि घर से बाहर निकलने पर हमारा मूड ऑफ या चिड़चिड़ा हो जाता है।

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मूड खराब होना

खराब हवा दिमाग के उन रसायनों को प्रभावित करती है जो खुशी और संतुलन से जुड़े होते हैं। जब यह इंबैलेंस हो जाते हैं तो हम चिड़चिड़ापन, उदासी और थकान महसूस करने लगते हैं। इसलिए आपने देखा होता है घर से बाहर जाते ही हम अजीब सा फील करने लगते हैं और छाती में भारीपन महसूस होने लगता है।

चिंता और अवसाद का खतरा

वहीं अगर हम लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं तो इससे चिंता और अवसाद बढ़ सकते हैं। जो लोग पहले से ही मानसिक तनाव में हैं, उन पर इसका असर और गहरा होता है। इसलिए आप कोशिश करें कि इस तरह के फॉग वाले मौसम में घर से बाहर न निकलें और अगर जरूरी है तो धुंध साफ या कम होने के बाद निकलें।

मानसिक और शारीरिक थकावट

आजकल इतना ज्यादा पॉल्यूशन बढ़ गया है कि कुछ मीटर की दूरी पर देखा ही मुश्किल हो गया है। प्रदूषित वातावरण में रहने से ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। शरीर भारी लगता है और छोटी-छोटी बातें भी तनाव देने लगती हैं।

कैसे करें बचाव और देखभाल?

  • बाहर जाते समय मास्क पहनें
  • घर में साफ हवा का ध्यान रखें
  • हरियाली और खुले स्थानों में समय बिताएं
  • रोज हल्का व्यायाम और ध्यान करें
  • गहरी सांस लेने की आदत डालें

प्रदूषण केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है, यह मानसिक स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा है। साफ हवा न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि मन को भी शांत और संतुलित बनाए रखती है।

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Highlights

  • पॉल्यूशन आपकी एंजाइटी और डिप्रेशन को बढ़ा सकता है।
  • आप घर से बाहर तभी निकलें जब फॉग कम हो जाए।
  • साथ ही हो सके तो कुछ समय के लिए साफ मौसम वाली जगहों पर जाएं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।