अत्यधिक तनाव में आत्मघाती विचारों का जोखिम कितना गंभीर होता है?

Kisi Ke Mann Mai Suicidal Thoughts Kyu Aate Hain: आपने ऐसे कई लोग देखे होंगे और खबरों में भी सुना व देखा होगा कि फलां व्यक्ति ने आत्महत्या करने का प्रयास किया। लेकिन लोगों के मन में ऐसे ख्याल आते क्यों हैं?

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Written By: Vidya Sharma | Published : April 14, 2026 5:01 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Suicidal Thoughts Kyu Aate Hain: कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर आ जाती है जहां इंसान को लगता है कि अब कुछ भी ठीक नहीं होगा। लगातार तनाव, टूटते रिश्ते, अकेलापन या कोई बड़ा नुकसान- इन सबके बीच मन बहुत भारी हो सकता है। ऐसी ही हालत में कुछ लोगों के दिमाग में आत्मघाती विचार आने लगते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो ये वो पल होते हैं जब इंसान अंदर से इतना थक जाता है कि उसे लगता है “अब और नहीं सहा जा रहा।”

व्यक्ति के मन में आने वाले ऐसे विचारों के लिए साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि अत्यधिक तनावपूर्ण और कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के मन में आत्मघाती विचार आना एक गंभीर मानसिक संकेत हो सकता है। यह स्थिति हमें यह समझने की जरूरत देती है कि मानसिक दर्द भी उतना ही वास्तविक होता है जितना शारीरिक दर्द।

क्या ऐसे विचार सच में आते हैं?

साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर सबा अपने एक्सपीरिएंस के साथ बताती हैं कि ‘हां, आते हैं। और ये मानसिक कमजोरी की निशानी नहीं होते। अक्सर ये तब आते हैं जब- 

  • दिमाग बहुत ज्यादा दबाव में होता है
  • उम्मीद टूटती हुई लगती है
  • इंसान को लगता है कि कोई रास्ता नहीं बचा

उस वक्त दिमाग बस दर्द से बाहर निकलने का कोई रास्ता ढूंढ रहा होता है- भले ही वो रास्ता गलत ही क्यों न लगे।

किन हालात में आत्महत्या करने का खतरा बढ़ जाता है?

कुछ स्थितियां इंसान को अंदर से बहुत कमजोर कर देती हैं, जैसे- 

  • लंबे समय से चल रहा डिप्रेशन या चिंता
  • किसी अपने से अलग हो जाना
  • अकेलापन जो खत्म ही न हो
  • पैसों या परिवार का भारी दबाव
  • किसी बड़े नुकसान का सदमा
  • लगातार चलने वाली बीमारी या दर्द
  • इन सबमें इंसान धीरे-धीरे खुद को फंसा हुआ महसूस करने लगता है।

क्या हर ऐसा विचार खतरनाक होता है?

डॉक्टर बताती हैं कि 'नहीं। कई बार ये विचार कुछ देर आते हैं और फिर चले जाते हैं। लेकिन अगर ये बार-बार आने लगें, और इंसान उनके बारे में सोचने लगे या खुद को अलग करने लगे, तो यह गंभीर संकेत होता है।'

असल बात क्या है?

  • सबसे जरूरी बात यह समझना है कि ये विचार सच नहीं होते, यह दर्द की आवाज होते हैं।
  • इंसान उस समय अपनी पूरी जिंदगी नहीं देख पा रहा होता, सिर्फ अपना दर्द देख रहा होता है।
  • और यही कारण है कि उस वक्त चीजें बहुत भारी लगती हैं, जो बाद में बदल भी सकती हैं।

ऐसे समय में क्या करना चाहिए?

अगर किसी को ऐसे विचार आ रहे हों, तो सबसे जरूरी है- 

  • उसे अकेला न छोड़ना
  • उसकी बात बिना टोके सुनना
  • उसे यह महसूस कराना कि वह बोझ नहीं है
  • किसी भरोसेमंद व्यक्ति या डॉक्टर/काउंसलर से बात कराना
  • थोड़ा-थोड़ा करके उसे सामान्य दिनचर्या में वापस लाना
  • कई बार सिर्फ साथ बैठना और चुपचाप सुनना भी बहुत मदद करता है।

आखिरी में डॉक्टर ने क्या समझाया?

डॉक्टर बताती हैं कि ये बहुत कठिन विषय है, लेकिन सच यही है- जो चीज उस वक्त असहनीय लगती है, वो समय के साथ बदल भी सकती है और अगर कोई इंसान अभी इस तरह के विचारों से गुजर रहा है, तो सबसे जरूरी बात यही है- वो अकेला नहीं है, भले ही उसे ऐसा लग रहा हो।

Highlights

  • लंबे समय से चल रहा डिप्रेशन या चिंता, किसी अपने से अलग हो जाना या पैसों या परिवार का भारी दबाव आत्महत्या का कारण हो सकता है।
  • सबसे जरूरी बात यह समझना है कि ये विचार सच नहीं होते, यह दर्द की आवाज होते हैं।
  • अगर किसी के मन में आत्महत्या के ख्याल आ रही हैं तो उसे अकेला न छोड़ें और ध्यान से शांति से उनकी बात सुनें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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