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How Night Shift Affects Mental Health: ‘नाइट शिफ्ट’ ये सुनने में तो बेहद कूल लगती है। क्योंकि जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब आप काम कर रहे होते हैं। लेकिन इसके पीछे की सच्चाई थोड़ी कड़वी है, क्योंकि इसका “ग्रेवयार्ड शिफ्ट” नाम यूं ही नहीं पड़ा। ये धीरे-धीरे, चुपचाप, आपकी शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सेहत को तनाव, खराब नींद और बुरी आदतों की परतों के नीचे दबा देती है। आपको बता दें, हमारा शरीर एक सर्केडियन रिद्म पर चलता है यानी प्रकृति की अपनी घड़ी जो दिन में आपको जागने और रात में सोने के लिए बनाई गई है। लेकिन जैसे ही आप इस सिस्टम को उल्टा कर देते हैं, तो आप सिर्फ अपने बॉस की डेडलाइन के खिलाफ ही नहीं, बल्कि लाखों साल के विकास के खिलाफ काम कर रहे होते हैं। आज इस लेख में मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट और Solh Wellness के फाउंडर कपिल गुप्ता से जानते हैं कि नाइट शिफ्ट का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
रात में काम करने से आपके शरीर का कॉर्टिसोल साइकल बिगड़ जाता है। यह वही हार्मोन है जो आपको तनाव से निपटने में मदद करता है। रात में जहां इसे कम होना चाहिए, वहां यह उल्टा और बढ़ जाता है। इसका नतीजा होता है क्रॉनिक स्ट्रेस यानी लगातार तनाव। कपिल गुप्ता बताते है कि, क्रॉनिक स्ट्रेस सिर्फ थकान नहीं है, बल्कि यह चिंता, डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का रास्ता खोल देता है।
कई रिसर्च बताती है कि,नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग दिन में काम करने वालों से औसतन 1–4 घंटे कम सोते हैं। और जो नींद मिलती है, वो भी टुकड़ों में बंटी हुई, हल्की और कम आराम देने वाली होती है। रात में नींद पूरी न होने के कारण कमजोर याददाश्त, चिड़चिड़ापन और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
बता दें, लगातार कॉफी पीना आपकी आंखें तो खुली रख सकता है, लेकिन आपके पाचन को खराब करता है, दिल की धड़कन तेज करता है और चिंता बढ़ाता है। वहीं अगर इसमें प्रोसेस्ड शुगर जोड़ दें, तो यह एक ऐसा जहरीला कॉम्बिनेशन बन जाता है जो लंबे समय में वजन बढ़ाना, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्ट प्रॉब्लम्स जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
रात में काम करने का मतलब है कि आपका शेड्यूल बाकी दुनिया से उल्टा हो जाता है। दोस्त पार्टी कर रहे होते हैं, और आप काम की तैयारी कर रहे होते हैं। परिवार सुबह उठता है, और आप सोने जा रहे होते हैं। जिस वजह से आपकी ज़िंदगी में धीरे-धीरे अकेलापन बढ़ता है, आपके रिश्ते कमजोर होते हैं, और सपोर्ट सिस्टम टूटने लगता है। इसके अलावा सूरज की रोशनी की कमी सेरोटोनिन हार्मोन पर असर डालती है जिससे मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और हल्का डिप्रेशन आम हो जाता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।