
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : February 27, 2026 8:20 AM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
Ghar Mai Jyada Time Tak Rehne Se Kya Hota Hai: आज के लाइफस्टाइल में कई लोग घंटों घर के अंदर ही रहते हैं, चाहे वह वर्क फ्रॉम होम हो, ऑनलाइन पढ़ाई हो या फिर स्क्रीन पर बिताया गया समय। सवाल यह है कि क्या लगातार घर के अंदर रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही है या इससे नु कसान हो सकता है? यह ऐसा सवाल है जो कई लोगों के मन में तो आता है, लेकिन हम इसे सामान्य समझ कर अनदेखा कर देते हैं।
इसे लेकर साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि ‘घर के अंदर रहना अपने आप में न तो पूरी तरह अच्छा है और न ही पूरी तरह बुरा। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस मानसिक स्थिति में है और वह अपना समय कैसे बिताता है।’ आइए हम इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं ताकि मन में कोई दुविधा न रहे।
डॉक्टर का कहना है कि ‘कभी-कभी खुद के साथ समय बिताना मानसिक शांति देता है। घर का सुरक्षित वातावरण व्यक्ति को आराम, पढ़ाई, रचनात्मक कार्य और आत्मविश्लेषण का अवसर देता है।’
अगर बाहर का वातावरण बहुत तनावपूर्ण है, तो घर के अंदर रहना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। लंबे समय तक लोगों से दूर रहना अकेलेपन और उदासी की भावना को बढ़ा सकता है। डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, सामाजिक संपर्क की कमी धीरे-धीरे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को प्रभावित कर सकती है।
घर में लगातार बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे आलस्य और थकान बढ़ सकती है। यह मानसिक ऊर्जा को भी प्रभावित करता है।
घर के अंदर रहने का मतलब अक्सर मोबाइल, टीवी या लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताना होता है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम चिंता, नींद की समस्या और ध्यान की कमी का कारण बन सकता है।
जब व्यक्ति लंबे समय तक अकेला रहता है, तो उसके विचारों पर नियंत्रण कम हो सकता है। वह बार-बार एक ही चिंता या समस्या के बारे में सोच सकता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए “संतुलन” सबसे महत्वपूर्ण है। केवल बाहर रहना या केवल अंदर रहना- दोनों ही स्थितियां चरम होने पर नुकसानदायक हो सकती हैं। घर के अंदर रहना तब तक ठीक है, जब तक वह आराम और सकारात्मकता का स्रोत हो। लेकिन यदि यह आदत सामाजिक दूरी, शारीरिक निष्क्रियता और नकारात्मक सोच का कारण बनने लगे, तो सावधान होने की जरूरत है।
डॉ. मालिनी सबा मानती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए संतुलित दिनचर्या, सामाजिक संपर्क और शारीरिक गतिविधि आवश्यक हैं। याद रखें, स्वस्थ मन के लिए केवल सुरक्षित जगह ही नहीं, बल्कि सक्रिय और संतुलित जीवन शैली भी जरूरी है।