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1 स्कैम ने कर दिया लाखों का नुकसान? साइबर धोखाधड़ी में फंसे लोग इस ट्रामा से कैसे निकालें?

Scam Ke Trauma Se Kaise Nikle: आजकल साइबर अपराध बहुत बढ़ गए हैं क्योंकि इससे लोगों को लाखों का नुकसान हो रहा है। इस दौरान होने वाले ट्रामा से निकलना मुश्किल हो जाता है। आइए सायकॉलिजस्ट से जानें इससे कैसे निकलें।

1 स्कैम ने कर दिया लाखों का नुकसान? साइबर धोखाधड़ी में फंसे लोग इस ट्रामा से कैसे निकालें?
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Malini Saba

Written by Vidya Sharma |Published : March 27, 2026 4:36 PM IST

Fraud Ho Gya Hai To Uske Trauma Se Kaise Nikle: आजकल फ्रॉड बहुत ही ज्यादा बढ़ गए हैं। पहले जहां नॉर्मल कॉल के जरिए ठगा जाता था, आज तकनीक के साथ इसके तरीकों में भी बढ़ोतरी हुई है। जैसे फॉटो की डॉक्यूमेंट फाइल, वॉट्सएप लिंक, सामान्य फोटो, एसएमएस लिंक, वीडियो आदि ये सभी तरीके अब फ्रॉड करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनका ज्यादा शिकार हमारे माता-पिता की उम्र के लोग बन रहे हैं क्योंकि उन्हें फोन चलाने की इतनी जानकारी नहीं है व वह किसी भी लालच व लिंक पर क्लिक कर देते हैं जिससे जाने-अनजाने वह फंस जाते हैं।

हमने स्कैम और फ्रॉड के बाद डिप्रेस लोगों को उस ट्रामा से निकलने का उपाय बताने के लिए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर सबा मालिनी से बात की। वह बताती हैं कि साइबर धोखाधड़ी का असर केवल आर्थिक नहीं होता, यह मन पर गहरा आघात छोड़ता है। आइए थोड़ा गहराई से जानते हैं कि लाखों से नुकसान के बाद किसी के दिमाग पर क्या असर पड़ता है और वह इसे कैसे ठीक कर सकता है।

साइबर फ्रॉड का असर सिर्फ पैसों तक नहीं

जब कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसके भीतर कई तरह की मानसिक प्रतिक्रियाएं पैदा होती हैं। जैसे- 

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  1. शॉक और इनकार (Shock & Denial)- शुरुआत में विश्वास ही नहीं होता कि ऐसा उनके साथ हुआ है। 
  2. गिल्ट और शर्म (Guilt & Shame)- ‘मैं इतना बेवकूफ कैसे हो गया/गई?’ - यह विचार बार-बार आता है। 
  3. एंग्जायटी और डर (Anxiety & Hypervigilance)- हर कॉल, हर मैसेज पर शक होने लगता है। 
  4. ट्रस्ट इश्यू (Trust Issues)- लोगों और सिस्टम दोनों पर भरोसा कम हो जाता है। 
  5. पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस (PTSD-like Symptoms)- घटना बार-बार दिमाग में चलती रहती है, नींद खराब हो जाती है।

क्यों लगता है इतना गहरा झटका?

साइबर फ्रॉड सिर्फ पैसे नहीं लेता- यह सुरक्षा की भावना छीन लेता है। हम जिस डिजिटल दुनिया पर रोज भरोसा करते हैं, वही अचानक अनसेफ लगने लगती है। यह अनुभव व्यक्ति के सेल्फ वर्थ (self-worth) और डिसीजन मेकिंग कॉन्फिडेंस को भी हिला देता है।

सबसे पहले क्या करें?

अगर आप या आपके आसपास कोई साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ है, तो तुरंत- 

  1. बैंक और संबंधित ऐप्स को ब्लॉक करें 
  2. साइबर क्राइम पोर्टल (1930 हेल्पलाइन) पर शिकायत दर्ज करें 
  3. सबूत (screenshots, transactions) सुरक्षित रखें 
  4. लेकिन इसके साथ ही एक और जरूरी चीज है- मानसिक रिकवरी।

ट्रॉमा से बाहर कैसे निकलें?

खुद को दोष देना बंद करें

  • यह समझना जरूरी है कि साइबर स्कैम बहुत sophisticated हो चुके हैं।
  • ये आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि सिस्टम की वूलनेरेबिलिटी है।

भावनाओं को दबाएं नहीं

  • रोना, गुस्सा आना, डर लगना - ये सभी नेचुरल ट्रामा रिस्पांस हैं।
  • उन्हें एक्सप्रेस करना हीलिंग की शुरुआत है।

किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें

  • चुप रहना ट्रामा को और गहरा करता है।
  • परिवार, दोस्त या काउंसलर से खुलकर बात करें।

प्रोफेशनल हेल्प लें

  • अगर लगातार एंग्जायटी, नींद की समस्या या पैनिक अटैक हो रहे हैं, तो साइकोलॉजिस्ट या थैरेपिस्ट से मिलना जरूरी है।

डिजिटल आत्मविश्वास वापस बनाएं

  • छोटे ऑनलाइन transactions करें 
  • सिक्योरिटी सेटिंग सीखें 
  • अवेयरनेस बढ़ाएं 
  • यह सेंस ऑफ कंट्रोल वापस लाने में मदद करता है।

समाज की भूमिका

हमारा समाज अक्सर विक्टिम को ही ब्लेम करता है- ‘इतना भी नहीं पता था?’ यह सोच बदलनी होगी। साइबर फ्रॉड का शिकार होना अज्ञानता नहीं, एक टार्गेटेड अटैक परिणाम है। हमें विक्टिम को सपोर्ट और एम्पैथी देनी चाहिए, न कि जजमेंट।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

साइबर धोखाधड़ी सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है, यह व्यक्ति की सुरक्षा, विश्वास और आत्मसम्मान पर सीधा हमला है। इससे उबरने के लिए फाइनेंशियल रिकवरी के साथ इमोशनल हीलिंग भी उतनी ही जरूरी है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।