शक होने से लेकर खुद को इमेजनरी दुनिया में पाने तक, जानें साइकोसिस के बारे में सब कुछ

Psychosis Kya Hota Hai: क्या आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा हुआ है कि आप खुद को अपनी एक अलग दुनिया में महसूस करते हैं या फिर दिमाग में वहम बना रहता है? इसे साइकोसिस कहते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : April 21, 2026 4:10 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Psychosis Kya Hota Hai Or Iske Kya Symptoms Hote Hain: अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है कि एक व्यक्ति ऐसी चीजें देख रहा है जो वहां हैं ही नहीं, या उसे लगता है कि कोई उसके खिलाफ साजिश रच रहा है। यह कोई पागलपन की शुरुआत नहीं है, बल्कि असल जिंदगी में इसे साइकोसिस कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क टूट जाता है।

साइकोसिस, एक ऐसी मानसिक अवस्था, जहां व्यक्ति वास्तविकता और अपने मन की बनाई दुनिया के बीच अंतर खोने लगता है। आइए हम साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा से समझते हैं कि शक की एक मामूली लहर कैसे एक काल्पनिक दुनिया में बदल जाती है।

शक और पैरानोया से होती है साइकोसिस की शुरुआत

साइकोसिस की शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे बदलावों से होती है। व्यक्ति को अचानक लगने लगता है कि लोग उसके बारे में बातें कर रहे हैं। कोई उसका पीछा कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। टीवी या अखबार के मैसेज खास तौर पर उसके लिए हैं। इसे पैरानोया (Paranoia) कहते हैं। यहां व्यक्ति का दिमाग घटनाओं के बीच ऐसे कनेक्शन जोड़ने लगता है जिनका असलियत में कोई आधार नहीं होता।

हैलुसिनेशन होना- यानी जब दिमाग खेल खेलने लगे

डॉक्टर बताती हैं कि जैसे-जैसे स्थिति गंभीर होती है, व्यक्ति की इंद्रियां उसे धोखा देने लगती हैं। इसे हैलुसिनेशन कहा जाता है। इसमें शामिल हैं-

  1. ऐसी आवाजें सुनाई देना जो दूसरे नहीं सुन सकते। ये आवाजें उसे आदेश दे सकती हैं या उसका मजाक उड़ा सकती हैं।
  2. ऐसी आकृतियां या लोग देखना जो वहां मौजूद नहीं हैं।
  3. शरीर पर कुछ रेंगने या किसी के छूने का अहसास होना।

डेल्यूशन में रहना

जब शक गहरा होकर एक पक्का विश्वास बन जाता है, तो उसे डेल्यूजन कहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को सच और झूठ का फर्क महसूस नहीं होता। उसे लग सकता है कि उसके पास जादुई शक्तियां हैं। वह मान सकता है कि वह कोई बहुत बड़ी हस्ती या भगवान का अवतार है। उसे यकीन हो जाता है कि उसकी याददाश्त या विचारों को कोई और कंट्रोल कर रहा है।

साइकोसिस होने के मुख्य कारण क्या हैं?

साइकोसिस किसी को भी हो सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं- 

  1. जेनेटिक्स- परिवार में मानसिक बीमारी का इतिहास होना।
  2. अत्यधिक तनाव- जीवन में कोई बड़ा सदमा या लंबे समय से चल रहा स्ट्रेस।
  3. नशीले पदार्थ- शराब, गांजा (Cannabis) या अन्य ड्रग्स का सेवन इसका बड़ा ट्रिगर हो सकता है।
  4. नींद की कमी- कई दिनों तक न सोने से दिमाग का संतुलन बिगड़ सकता है।
  5. दिमागी बीमारियां- स्किजोफ्रेनिया (Schizophrenia) या बाइपोलर डिसऑर्डर।

क्या इसका इलाज संभव है?

अच्छी खबर यह है कि साइकोसिस का इलाज मुमकिन है और व्यक्ति एक सामान्य जीवन जी सकता है।

  1. दवाइयां (Antipsychotics)- ये दिमाग में रसायनों (जैसे डोपामाइन) के संतुलन को ठीक करने में मदद करती हैं।
  2. थेरेपी (CBT)- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी के जरिए व्यक्ति को अपने विचारों को पहचानने और वास्तविकता को समझने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  3. फैमिली सपोर्ट- परिवार का साथ और सहानुभूति रिकवरी की गति को कई गुना बढ़ा देती है।

निष्कर्ष- साइकोसिस 'पागलपन' नहीं है, बल्कि दिमाग की एक ऐसी स्थिति है जिसे डॉक्टरी मदद और सही देखभाल से ठीक किया जा सकता है। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति असामान्य व्यवहार कर रहा है या उसे डरावने भ्रम हो रहे हैं, तो उसे डांटने या अंधविश्वास में फंसने के बजाय किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) के पास ले जाएं। याद रखें, मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

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