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Bache Ko Board Exam Se Pehle Kya Kahe: परीक्षा का नाम सुनते ही कई बच्चों के मन में घबराहट शुरू हो जाती है। उन्हें लगता है कि अच्छे अंक ही उनकी पहचान तय करेंगे। ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। घर का माहौल और बोले गए शब्द बच्चों के मनोबल पर गहरा असर डालते हैं। कई बच्चे को अपने आस-पास स्ट्रेस और उम्मीदों के भार के अहसास से ही टेंशन में आ जाते हैं।
इस विषय पर साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि ‘परीक्षा के दौरान बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। यदि माता-पिता सही तरीके से संवाद करें, तो बच्चे का तनाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।’ आइए जानें वे 5 बातें जो परीक्षा से पहले हर गार्जियन को अपने बच्चों से जरूर कहनी चाहिए।
यह एक छोटा सा वाक्य है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है। जब बच्चा सुनता है कि उसके माता-पिता को उस पर विश्वास है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। उसे यह महसूस होता है कि परिणाम चाहे जैसा भी हो, परिवार का समर्थन उसके साथ रहेगा। यही भरोसा तनाव को कम करता है।
अक्सर बच्चे परिणाम को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि मेहनत ही असली सफलता है। डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, 'जब ध्यान प्रयास पर होता है, तो परिणाम का दबाव कम हो जाता है। बच्चे को यह एहसास कराएं कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।' बच्चे का मनोबल बढ़ाएं।
कई बच्चे गलती करने के डर से घबरा जाते हैं। उन्हें यह बताना जरूरी है कि गलतियां असफलता नहीं, बल्कि सीखने का अवसर हैं। जब बच्चा यह समझ लेता है कि गलती होना सामान्य है, तो उसका डर कम हो जाता है और वह अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देता है।
डॉक्टर कहती हैं कि परीक्षा के समय कई बच्चे नींद कम कर देते हैं या भोजन पर ध्यान नहीं देते। माता-पिता को उन्हें याद दिलाना चाहिए कि उनका स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और थोड़ी शारीरिक गतिविधि दिमाग को शांत और सक्रिय बनाए रखती है। बच्चों को सही पोषण दें और स्ट्रेस कम करने की कोशिश करें।
यह बात बच्चों के मन से अनावश्यक दबाव हटाने में मदद करती है। उन्हें समझाएं कि परीक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन यह जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है। डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि जब बच्चे को यह अहसास होता है कि एक परीक्षा से उसका पूरा भविष्य तय नहीं होता, तो उसका मानसिक दबाव कम हो जाता है।
परीक्षा के समय बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत समझ, भरोसे और सकारात्मक शब्दों की होती है। डॉ. मालिनी सबा मानती हैं कि यदि माता-पिता बच्चों के साथ शांत और सहयोगपूर्ण व्यवहार रखें, तो उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है और वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
याद रखिए, अंक महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन बच्चे का आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। सही शब्दों से ही बच्चे के मन का डर कम किया जा सकता हैऔर उसे सफलता की ओर प्रेरित किया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।