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Mental Health Habits: सेहतमंद रहने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य भी है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्किबच्चे भी कई तरह की मेंटल हेल्थ से जुडी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। स्ट्रेस, डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं आजकल आम हो गए हैं। मेंटल हेल्थ का असर हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ अच्छी आदतों को अपने डेली रूटीन में शामिल करने से आप अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं। आज इस लेख में मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट और Solh Wellness एप के फाउंडर कपिल गुप्ता से जानेंगे कुछ ऐसे टिप्स के बारे में, जिनकी मदद से आपका माइंड रिलैक्स रहेगा और तनाव दूर होगा।
अपनी दिनचर्या में तनाव को ट्रैक करना उतना ही जरूरी बनाएं जितना सुबह ब्रश करना। इसके लिए आप ऑनलाइन टूल्स का सहारा ले सकते हैं या डायरी में लिख सकते हैं। रोज़ाना तनाव मापना आपको मानसिक स्वास्थ्य की दिशा का सही अंदाजा देता है। इससे आप भविष्य में से तनाव, ओसीडी, डिप्रेशन या बर्नआउट को अनियंत्रित होने से बचा सकते हैं।
कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लंबे समय तक लगातार किसी चीज़ पर ध्यान लगाने के बाद हमारी मानसिक क्षमता घटने लगती है। इसलिए रोजाना 2 से 5 मिनट के छोटे ब्रेक लें। इस दौरान स्ट्रेच करें, टहलें, या आँखें बंद करके आराम कर सकते हैं। ये तनाव को कम करते हैं, थकान से बचाते हैं, और नर्वस सिस्टम को संतुलित रखते हैं।
4-7-8 तकनीक, बॉक्स ब्रीदिंग या बस धीरे-धीरे गहरी सांस लेना, ये सब आपके तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को तुरंत घटा सकते हैं। ये फोकस्ड ब्रीदिंग की एक्सरसाइज दिन में कई बार तनाव कम करने की इमरजेंसी ब्रेक की तरह काम करती हैं।
माइंडफुलनेस का मतलब हमेशा 20 मिनट ध्यान करना नहीं होता। पानी की आवाज़, कपड़ों का स्पर्श, या धूप की गर्मी महसूस करना और ऐसे पलों में पूरी तरह मौजूद रहना तनाव के असर को कम करता है।
नियमित गतिविधि एंडॉर्फिन (खुशी देने वाले हार्मोन) को रिलीज करती है और मूड बेहतर करती है। अगर आप स्ट्रेस में हैं, तो ये आपको उससे उबरने में मदद करती है। दिन में थोड़े-थोड़े समय पर एक्टिव रहना लंबे समय में आपको बड़ा फायदा दे सकता है।
डायरी लिखना आपके तनाव, लत या बार-बार दोहराए जाने वाले व्यवहार के पीछे के पैटर्न को उजागर करता है। कई गाइडेड जर्नलिंग टूल्स ऐसे पैटर्न भी पहचानने में मदद करते हैं, जिन्हें आप खुद नोटिस नहीं कर पाते, और इस तरह वक्त रहते आप अपनी आदतों को भी पहचानकर वक्त रहते सुधार करने में मदद कर सकते हैं।
सोने से करीब 30 से 60 मिनट पहले दिमाग और शरीर को रिलैक्स मोड में लाएं। स्क्रीन से दूर रहें, हल्की-फुल्की रिफ्लेक्टिव एक्टिविटी करें, और शरीर को संकेत दें कि अब सोने का समय है। इससे नींद बेहतर होगी और अगले दिन का तनाव भी संतुलित रहेगा।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।