विश्व स्वास्थ्य दिवस 2019 : क्या आपने अपने मानसिक स्वास्थ्य का बीमा करवाया है ?

शोध बताते हैं कि भारत में 86 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 82 प्रतिशत शहरी आबादी का स्वास्थ्य बीमा नहीं है। मेंटल हेल्थकेयर एक्ट (एमएचसीए), 2017 के पारित होने के साथ, आईआरडीएआई ने बीमा प्रदाताओं को आदेश जारी किया है कि वे अपनी सेवाओं के दायरे में मानसिक बीमारी को भी शामिल करें।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : April 7, 2019 10:19 AM IST

भारत भले ही मानसिक बीमारियों के बढ़ते बोझ का सामना कर रहा है, फिर भी मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता और सामाजिक समझ में भारी कमी है, जिसमें मानसिक बीमारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता के बारे में विशेष रूप से जागरूकता की कमी भी शामिल है। इस क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख संस्था, पोद्दार फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'इंश्योर योर मेंटल हेल्थ' नामक एक प्रमुख कांफ्रेंस (सम्मेलन) में नीति निर्माताओं के साथ-साथ इस क्षेत्र के विशेषज्ञ और हितधारक आज एक साथ मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए।

क्या कहता है शोध

शोध यह बताता है कि भारत में 4 में से 1 व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से जूझता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलती जीवनशैली ने हाल के वर्षों में लोगों में अवसाद, तनाव विकारों और डिमेंशिया (मनोभ्रंश) सहित इससे संबंधित अन्‍य बीमारियों को बढ़ाया है। दुर्भाग्य से, इसके प्रति जागरूकता की कमी और हमारे समाज में मौजूद गलतफहमियों के कारण इस गंभीर समस्या पर थोड़ा ध्यान दिया जाना चाहिए।

डब्लूएचओ WHO ने मा‍नसिक बीमारी पर 2030 तक 6 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान लगाया है। हालांकि, ऐसे देश में जहां स्वास्थ्य बीमा की पहुंच बहुत कम है, मानसिक स्वास्थ्य बीमा का सवाल अभी भी बहुत दूर की बात लगती है।

भारत में नहीं है लोगों का स्वास्थ्य बीमी

शोध बताते हैं कि भारत में 86 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 82 प्रतिशत शहरी आबादी का स्वास्थ्य बीमा नहीं है। मेंटल हेल्थकेयर एक्ट (एमएचसीए), 2017 के पारित होने के साथ, आईआरडीएआई ने बीमा प्रदाताओं को आदेश जारी किया है कि वे अपनी सेवाओं के दायरे में मानसिक बीमारी को भी शामिल करें। हालांकि, इस प्रावधान पत्र और विचार को लागू करने के लिए जरूरी प्रयास अब तक शुरू नहीं किए गए हैं।

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पोद्दार फाउंडेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. प्रकृति पोद्दार ने अपने कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने और उनकी मानसिक भलाई सुनिश्चित करने के लिए कॉर्पोरेट्स और संगठनों की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने आगे कहा कि कई मानसिक स्वास्थ्य विकारों वाले 50% व्यक्ति मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित होते हैं। मानसिक रूप से बीमार 29% व्यक्ति या तो शराब या ड्रग्स के सेवन से प्रभावित हैं।

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सबसे पहले, हमें लोगों में इस बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है कि किसी को किस तरह की मानसिक बीमारियां हो सकती हैं। इसकी वजह से उसे एक बड़ी वित्तीय क्षति और भावनात्मक निराशा का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा, हमें बीमा प्रदाताओं को बिना किसी महत्वपूर्ण निष्कर्ष के मानसिक बीमारियों को कवर करने वाली व्यावहारिक और सस्ती स्वास्थ्य योजनाओं की पेशकश करने की आवश्यकता पर बल देना चाहिए। ऐसे देश में जहां स्वास्थ्य बीमा निवेश कम है, वहां प्रीमियम लागत कम रखना बहुत आवश्यक है।

'इंश्योर योर मेंटल हेल्थ' की प्रमुख बातें 

Experts Underline Need for Awareness and Affordable Health Insurance for Mental Illnesses at Major Conference Organized by Poddar Foundation

पोद्दार फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्‍मेलन में विशेषज्ञों ने मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सस्ती स्वास्थ्य बीमा की पेशकश की जरूरत पर बल दिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मानसिक बीमारी पर 2030 तक 6 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान लगाया है।

कई मानसिक स्वास्थ्य विकारों वाले 50% व्यक्ति मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित होते हैं। मानसिक रूप से बीमार 29% व्यक्ति या तो शराब या ड्रग्स के सेवन से प्रभावित हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों, सरकारी अधिकारियों, बीमा के क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस विषय पर चर्चा की।

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