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लड़कों को भी करना पड़ सकता है Bad Touch का सामना, जरूर दें ये 5 सीख

Ladko Ko Bad Touch Kaise Sikhaye: लड़कियों के साथ-साथ लड़कों को भी गुड और बैड टच सिखाया जाना चाहिए, क्योंकि उनके साथ भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं।

लड़कों को भी करना पड़ सकता है Bad Touch का सामना, जरूर दें ये 5 सीख
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Rita Bakshi

Written by Vidya Sharma |Published : March 12, 2026 9:49 AM IST

Ladko Or Ladkiyo Ko Bad Touch Ke Bare Mai Kya Sikhaye: हम अपने घर की बेटियों को तो बचपन से गुड और बैड टच के बारे में सिखा देते हैं, लेकिन लड़कों को भूल ही जाते हैं, लेकिन यह एक गंभीर सामाजिक व स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अक्सर समाज में यह माना जाता है कि केवल लड़कियां ही इस तरह के शोषण का शिकार होती हैं, लेकिन मेडिकल और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि कई लड़के भी बचपन या किशोरावस्था में इस अनुभव से गुजरते हैं। हमने इस गंभीर विषय को लेकर सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रीता बक्शी से बात की।

उन्होंने बताया कि 'समस्या यह है कि लड़के अक्सर डर, शर्म या सामाजिक दबाव के कारण इसके बारे में बात नहीं करते। लंबे समय तक इस अनुभव को छुपाकर रखने से मानसिक तनाव, आत्मविश्वास में कमी, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।' इसलिए परिवार और समाज का यह समझना जरूरी है कि बच्चों को, चाहे वे लड़के हों या लड़कियां, सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श के बारे में सही जानकारी दी जाए।

Good Touch और Bad Touch की सही जानकारी दें

बच्चों को कम उम्र से ही यह समझाना जरूरी है कि कौन सा स्पर्श सामान्य और सुरक्षित है और कौन सा असहज या गलत महसूस कराता है। अगर कोई स्पर्श उन्हें डर, दर्द या असहजता महसूस कराए तो वह बैड टच हो सकता है।

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ना कहना सिखाएं

बच्चों को यह सिखाना बहुत जरूरी है कि अगर कोई व्यक्ति उन्हें असहज तरीके से छूता है तो वे स्पष्ट रूप से ‘ना’ कह सकते हैं और तुरंत वहां से दूर जा सकते हैं। यह आत्मविश्वास उनके मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बच्चों में न कहने की आदतउनके फ्यूचर के लिए बहुत ही ज्यादा फायेदमंद हो सकती है।

भरोसेमंद व्यक्ति को बताने की आदत डालें

माता-पिता के लिए बच्चों का विश्वास जितना भी बहुत बड़ी बात होती है। अगर बच्चे को कभी भी ऐसा अनुभव हो, तो उसे तुरंत माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को बताने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाएगा।

शरीर के निजी अंगों की समझ दें

बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि उनके शरीर के कुछ निजी हिस्से होते हैं जिन्हें केवल चिकित्सा जरूरत या माता-पिता की मौजूदगी में ही छुआ जा सकता है। इससे बच्चों में अपने शरीर की सीमाओं को लेकर जागरूकता बढ़ती है।

डिजिटल और सामाजिक सुरक्षा भी सिखाएं

आज के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बच्चों को शोषण का खतरा हो सकता है। इसलिए बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे अनजान लोगों से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और किसी भी असहज बातचीत के बारे में तुरंत माता-पिता को बताएं।

मेडिकल और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बचपन में होने वाला इस प्रकार का अनुभव बच्चे के मानसिक विकास और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर बच्चों को सुरक्षित वातावरण, सही जानकारी और खुलकर बात करने का अवसर दिया जाए, तो वे ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं और समय रहते मदद भी ले सकते हैं।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।