क्या बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में बढ़ जाती है इनफर्टिलिटी? किस उम्र के बाद सावधान रहना जरूरी

Male Infertility By Age: क्या उम्र के साथ-साथ पुरुषों में इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ने लगता है? इस लेख में जानें किस उम्र से पहले कंसीव करना ज्यादा फायदेमंद रहता है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : February 3, 2026 4:13 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Neerja Goel

Men Infertility Causes: महिलाओं की तरह पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी की समस्या उतनी ही प्रभावित करती है, लेकिन देखा गया है कि पुरुष इस बारे में जब तक नहीं सोचते जब वे खुद इस समस्या से जूझ रहे होते हैं। यहां तक कि कुछ ऐसे कारक हैं, जिनके कारण पुरुषों में अब इनफर्टिलिटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इनमें शराब, धूम्रपान, खराब मानसिक स्वास्थ्य और काम के दौरान हानिकारक केमिकलों के संपर्क में आना आदि शामिल है। डॉ. (प्रोफेसर), ऑब्सटेट्रिशियन एंड गाइनेकोलॉजिस्ट, सीनियर कंसल्टेंट शारदाकेयर-हेल्थसिटी के अनुसार लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर उम्र का खास असर नहीं पड़ता और वे जीवन के काफी बाद तक बिना किसी जैविक समस्या के पिता बन सकते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिक शोध यह स्पष्ट कर रहे हैं कि पुरुषों की बढ़ती उम्र उनकी फर्टिलिटी, गर्भधारण की प्रक्रिया और यहां तक कि बच्चों के लंबे समय के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।

मेल इनफर्टिलिटी पर उम्र का असर

जहां महिलाओं में 30 से 35 की उम्र के बाद फर्टिलिटी कम होने लगती है, क्योंकि उनके शरीर में अंडों की संख्या सीमित होती है और इस उम्र तक आते-आते एक बड़ी संख्या में अंडे खर्च हो चुके होते हैं। वहीं पुरुषों में जीवन भर शुक्राणु बनते रहते हैं और शुक्राणुओं की संख्या कोई सीमित नहीं होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा फर्टाइल रहेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके शरीर में शुक्राणु तो बनते रहेंगे लेकिन उनकी क्वालिटी उम्र के अनुसार कम होती रहेगी। खासकर 40 साल के बाद, शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति (Motility) और उनका आकार आदि धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इससे प्राकृतिक तरीके से गर्भ ठहरने में समय लग सकता है और दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

उम्र का शुक्राणु डीएनए पर असर

पुरुष की उम्र बढ़ने के साथ-साथ न सिर्फ उसके शरीर में शुक्राणु कमजोर पड़ने लगते हैं, बल्कि शुक्राणुओं के डीएनए पर भी इसका कुछ असर पड़ने लगता है। उम्र बढ़ने पर शुक्राणुओं में डीएनए डैमेज और जेनेटिक बदलाव की संभावना बढ़ जाती है। यह बार-बार होने वाले सेल विभाजन, बढ़ते ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और शरीर की मरम्मत क्षमता कम होने के कारण होता है। ऐसे शुक्राणुओं से निषेचन की संभावना कम हो सकती है, भ्रूण का विकास प्रभावित हो सकता है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है, चाहे IVF जैसी तकनीकों का इस्तेमाल क्यों न किया जाए।

बच्चों पर पड़ता है असर

ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं सोच रहे हैं, लेकिन शोध में यह भी पाया गया है कि अगर कोई पुरुष अधिक उम्र के बाद पिता बनने की कोशिश करता है, तो उसके बच्चों में कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। रिसर्च में पाया गया कि इस स्थिति में बच्चों में में ऑटिज्म और स्किजोफ्रेनिया जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। इसके अलावा कुछ जन्मजात बीमारियों और बचपन में कैंसर का जोखिम भी बढ़ने की बात कही गई है, हालांकि कुल मिलाकर ऐसे मामलों की संख्या कम ही होती है। ज्यादा बच्चे पूरी तरह स्वस्थ ही होते हैं।

लाइफस्टाइल और हेल्थ की बड़ी भूमिका

उम्र के साथ-साथ पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करने में सिर्फ उम्र का ही हाथ नहीं है, बल्कि उनका स्वास्थ्य और जीवनशैली भी इसमें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर किसी पुरुष को डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, हार्मोन प्रॉब्लम्स, यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं या मोटापा आदि है, तो इससे उसकी शुक्राणुओं की गुणवत्ता कमजोर पड़ने लगती है।

इसके अलावा जो पुरुष ज्यादा शराब पीते हैं, स्मोकिंग करते हैं, लंबे समय से तनाव में हैं या फिर कोई ऐसी जगह काम करते हैं जहां पर शारीरिक गतिविधी कम है जैसे कंप्यूटर पर काम करना या दुकान पर बैठे रहना आदि। जीवनशैली के ये प्रभाव भी उसकी शुक्राणुओं की कमी को दूर कर सकते हैं।

धीरे-धीरे होती है फर्टिलिटी खत्म

एक डॉक्टर होने के नाते यह अच्छी बात है कि पुरुषों में फर्टिलिटी अचानक से खत्म नहीं होती बल्कि धीरे-धीरे कम होती है। 40 से 50 की उम्र में भी कई पुरुष पिता बन सकते हैं, खासकर अगर वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। जिसके लिए आप सही वजन बनाए रखें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान और शराब से बचें, पुरानी बीमारियों को कंट्रोल में रखें और समय पर फर्टिलिटी जांच कराते रहें, तो ऐसे में इनफर्टिलिटी से बचा जा सकता है।

पुरुषों की बढ़ती उम्र उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, मुख्य रूप से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और जेनेटिक स्वास्थ्य के कारण। सही जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर पुरुष बेहतर फैसले ले सकते हैं और स्वस्थ संतान की संभावना बढ़ा सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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