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आज यानी 25 अप्रैल को पूरी दुनिया में ''विश्व मलेरिया दिवस'' मनाया जाता है। मलेरिया मादा मच्छर एनोफिलीज के काटने से होता है। इस मच्छर में प्लैज्मोडियम नामक जीवाणु पाया जाता है। इसके काटने पर व्यक्ति मलेरिया से पीड़ित हो जाता है।
हर साल जाती है सैकड़ों लोगों की जान
मलेरिया से प्रत्येक वर्ष सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। हालांकि, कई उपायों को अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी के कारण इन तरीकों को नहीं अपनाते। घरों के आसपास पानी को रुकने ना देना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और मच्छरदानी लगाकर सोने से मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है।
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हर साल दुनिया में लगभग 30 से 50 करोड़ लोग मलेरिया से ग्रस्त हो जाते हैं। इनमें से औसतन 5 लाख भारतीय होते हैं और उनमें से लगभग 1000 की मौत हो जाती है। विश्व में हर 30 सेकंड में 1 बच्चा मलेरिया से मर जाता है। सबसे ज्यादा फैल्सीपैरम मलेरिया का जोखिम होता है, जो इंसानों के लिए सबसे खतरनाक किस्म का मलेरिया है।
विश्व मलेरिया दिवस 2019 की थीम
इस साल की थीम है- ‘जीरो मलेरिया स्टार्ट्स विद मी’ यानी मलेरिया को शून्य स्तर पर ले जाने की शुरुआत स्वयं से।
क्यों होता है ?
मलेरिया एक परजीवी से होने वाला संक्रमण है, जो एनोफिलीज प्रजाति की मादा मच्छर के काटने से फैलता है। इंसान के शरीर में ये परजीवी लीवर में जाकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और फिर लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं।
मलेरिया के पांच प्रकार
- प्लैज्मोडियम फैल्सीपैरम ।
- प्लैज्मोडियम विवैक्स।
- प्लैज्मोडियम मलेरिया ।
- प्लैज्मोडियम ओवेल ।
- प्लैज्मोडियम नोलेसी ।
प्लैज्मोडियम फैल्सीपैरम और प्लैज्मोडियम विवैक्स सबसे आम है, लेकिन प्लैज्मोडियम फैल्सीपैरमसबसे खतरनाक किस्म का मलेरिया संक्रमण है।
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कैसे फैलता है मलेरिया ?
मलेरिया संक्रमित मच्छर द्वारा लोगों को काटने से होता है। जब मच्छर इंसान की त्वचा से खून चूसता है, तो ये परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। फिर ये लीवर में चले जाते हैं और वहां पर बिना कोई लक्षण प्रकट किए अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। 8-9 दिनों के बाद जब परजीवी बड़े हो जाते हैं, तब लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर देते हैं। यहां ये फिर और तेजी से अपनी संख्या बढ़ाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं।
कौन सा मच्छर है खतरनाक
एनोफिलीज प्रजाति की मादा मच्छर मलेरिया के रोगाणुओं की वाहक होती है। मलेरिया का रोगाणु एक कोशिकीय परजीवी होता है, जिसे प्लैज्मोडियम कहा जाता है। जब मादा मच्छर किसी मलेरिया संक्रमित व्यक्ति से खून चूसती है तो मलेरिया के रोगाणु मच्छर में प्रवेश कर जाते हैं। फिर जब यही मादा मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से खून चूसती है तो उसकी लार में मौजूद मलेरिया के रोगाणु उस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चले जाते हैं।
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क्या हैं लक्षण
बुखार, सिरदर्द, उल्टी आदि लक्षण मच्छर के काटने के 10 से 15 दिनों के भीतर प्रकट होते हैं। अगर मलेरिया का तुरंत उपचार न कराया गया तो खतरनाक भी हो जाता है, क्योंकि इस रोग में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त आपूर्ति नहीं हो पाती।
क्या है इलाज
मलेरिया को शीघ्र पहचानकर उसका तुरंत रोग निदान जरूरी है। मलेरिया का जल्द इलाज शुरू कर देने से इसकी अवधि घट जाती है और रोग को जटिल होने तथा उससे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
न करें खुद से दवाओं का सेवन
मलेरिया में एस्प्रिन, डिस्प्रिन व ब्रुफेन दवाओं का सेवन न करें, क्योंकि इनसे भीतरी रक्तस्राव बढ़ने का खतरा रहता है। ये पेट दर्द बढ़ा देती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं द अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, बच्चों के बुखार व दर्द के लिए सबसे पहले पैरासिटामॉल से इलाज करना चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को अपनी एक ब्लड स्लाइड बनवाना चाहिए और डॉक्टर से इलाज कराएं। पैरासिटामॉल (क्रोसिन) के सेवन से बुखार को कम करने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन दो दिन से ज्यादा तेज बुखार रहे, तो डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए। खानपान पर ध्यान देने के साथ ही, खूब पानी पिएं।
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