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वर्ल्ड ल्यूपस डे 2019 : ये हैं वो टेस्ट जो बताते हैं आपको ल्यूपस रोग है या नहीं

यूरिन के जरिए इसका पता चलता है कि कहीं उसमें प्रोटीन या लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा अधिक तो नहीं हो गई है। यह तब होता है, जब ल्यूपस बीमारी किडनी को प्रभावित कर चुकी हो।

Written By Anshumala
Published : May 10, 2019 10:24 AM IST

एक टेस्‍ट से ल्‍यूपस का निदान नहीं किया जा सकता। © Shutterstock.

ल्‍यूपस ऑटोइम्‍यून रोग है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक सक्रिय होकर स्‍वस्‍थ उत्तकों पर हमला कर देती है। इसके लक्षणों को पहचानकर समय रहते ही निदान और इलाज करवाना जरूरी हो जाता है। किसी भी रोग को ठीक करने के लिए उसका निदान बहुत जरूरी है, ताकि आप जल्दी से जल्दी उस रोग से छुटकारा पा सकें। ल्यूपस का निदान भी थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते हैं। समय के साथ इसके लक्षणों में बदलाव आता रहता है। सिर्फ एक टेस्‍ट से ल्‍यूपस का निदान नहीं किया जा सकता। जानें ल्यूपस का पता करने के लिए डॉक्टर्स कौन-कौन से टेस्ट करवाते हैं-

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ब्‍लड काउंट

इसमें लाल रक्‍त और श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं और प्‍लेटलेट्स की जांच की जाती है। इसके साथ ही रक्‍त में हीमोग्‍लोबिन के स्‍तर को भी जांचा जाता है। इसमें एनीमिया के होने की शिकायत सामने आ सकती है। यह ल्‍यूपस में होना सामान्‍य बात है। ल्‍यूपस होने पर श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं और प्‍लेट्लेट्स की संख्‍या में भी काफी कमी देखी जा सकती है।

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एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट

इसमें भी खून की जांच की जाती है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि लाल रक्‍त कोशिकाएं एक घंटे के अंदर किस गति से नीचे जा रही हैं। सामान्‍य दर से अधिक गति से लाल रक्‍त कोशिकाओं का नीचे जाना ल्‍यूपस रोग के होने की तरफ इशारा करता है।

किडनी और लीवर टेस्ट

रक्‍त के जरिए इस बात का पता लगाया जाता है कि किडनी और लीवर अच्‍छी तरह से काम कर रहे हैं या नहीं। ल्‍यूपस का असर इन अंगों पर पड़ सकता है।

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यूरिन टेस्ट

यूरिन के जरिए इसका पता चलता है कि कहीं उसमें प्रोटीन या लाल रक्‍त कोशिकाओं की मात्रा अधिक तो नहीं हो गई है। यह तब होता है, जब ल्‍यूपस बीमारी किडनी को प्रभावित कर चुकी हो।

एंटीन्‍यूक्‍लीयर एंटीबॉडी टेस्‍ट

यह एक ऐसा टेस्‍ट है जो इस बात की जांच करता है कि कहीं शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक उत्तेजित तो नहीं है। यह एंटीबॉडीज का पता लगाए जाने के लिए की जाने वाली जांच है। ल्‍यूपस से ग्रस्त लोगों की एएनए जांच सकारात्‍मक आती है, तो कई बार अधिकतर लोगों में जिनकी एएनए जांच सकारात्‍मक आती है, उनमें ल्‍यूपस नहीं पाया जाता है। अगर एएनए जांच सकारात्‍मक आई है, तो डॉक्‍टर कुछ अन्‍य विशिष्‍ट एंटीबॉडी टेस्‍ट कराने की सलाह दे सकता है।

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इमेजिंग टेस्‍ट

डॉक्टर को लगता है कि ल्‍यूपस दिल या फेफड़ों को प्रभावित कर रहा है, तो वह इन बातों की सलाह दे सकता है-

चेस्ट एक्‍स-रे

चेस्ट एक्‍स-रे करवाने से इस बात का पता चलता है कि कहीं आपके फेफड़ों में किसी प्रकार का तरल पदार्थ या सूजन तो नहीं है।

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बॉयोप्‍सी

ल्‍यूपस किडनी को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाता है और इसी आधार पर इसका इलाज किया जाता है। कुछ मामलों में, किडनी के एक छोटे से टिशू की जांच करना जरूरी हो जाता है। इसके बिना यह पता नहीं लगाया जा सकता कि आखिर आपको किस प्रकार के इलाज की जरूरत है। इसमें शरीर में एक छोटी सी सुई प्रवेश करके यह सैंपल लिया जाता है।

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