आसान फिंगर टेस्ट पता लग सकता है लंग कैंसर का खतरा, जानें फिंगर क्लबिंग टेस्ट
वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का खतरा बढ़ गया है. भारत में दिल्ली जैसे शहर में रहने वाले लोगों में फेफड़े की बीमारियां (Respiratory Diseases) बहुत आम हो गयी हैं. वायु प्रदूषण लंग कैंसर (Lung Cancer causes) का सबसे प्रमुख कारण है. अगर आप भी प्रदूषण वाली जगह में रहते हैं, तो एक छोटे से टेस्ट से भी लंग कैंसर के खतरे को जान सकते हैं. कैंसर रिसर्च यूके (Cancer Research UK) के अनुसार लंग कैंसर के खतरे को ऊंगलियों से ही जाना जा सकता है.
वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का खतरा बढ़ गया है. भारत में दिल्ली जैसे शहर में रहने वाले लोगों में फेफड़े की बीमारियां (Respiratory Diseases) बहुत आम हो गयी हैं. वायु प्रदूषण लंग कैंसर (Lung Cancer causes) का सबसे प्रमुख कारण है. अगर आप भी प्रदूषण वाली जगह में रहते हैं, तो एक छोटे से टेस्ट से भी लंग कैंसर के खतरे को जान सकते हैं. कैंसर रिसर्च यूके (Cancer Research UK) के अनुसार लंग कैंसर के खतरे को ऊंगलियों से ही जाना जा सकता है.
लंग कैंसर का पता कैसे लगाएं
कैंसर रिसर्च यूके (Cancer Research UK) द्वारा सुझाया यह उपाय बहुत सरल है. इसे शैमरॉथ विंडो टेस्ट (Schamroth Window Test) के नाम से जानते हैं. कैंसर रिसर्च यूके का दावा है कि ऊंगलियों के द्वारा कैंसर के खतरे को पहले ही पहचाना जा सकता है. इस टेस्ट को फिंगर क्लबिंग टेस्ट (Finger Clubbing Test) भी कहते हैं.
कैसे करें टेस्ट
फिंगर क्लबिंग टेस्ट को करने के लिए आपको दोनों हांथों की तर्जनी ऊंगली को मिलाना होता है. जब आप अपनी ऊंगलियों के नाखून को मिलाते हैं तब दोनों की बीच में हीरे की आकृति के समान छेद दिखना चाहिए. अगर छेद नहीं दिखता है, तो यह लंग कैंसर का खतरा बता रहा है. इसके लिए आपको तुरंत फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer Test) की जरूरी जांच करानी चाहिए.
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
इस बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टेस्ट लगभग 35 प्रतिशत तक सही आकलन कर सकता है. अगर फिंगर क्लबिंग टेस्ट में गैप नहीं दिखता है तो कैंसर की जांच जरूरी होती है.
वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैंसर के ट्यूमर की वजह से हार्मोन एक ऐसा तरल पदार्थ बनाते हैं, जो ऊंगलियों के ऊपरी हिस्से में जमा होने लगता है.
कुछ वैज्ञानिक नाखूनों के आस-पास आने वाले बदलाओं को कैंसर की स्टेज से जोड़कर भी देखते हैं. पहली स्टेज में जहां ऊंगलियों की बीच गैप कम होता है वहीं एडवांस स्टेज में नाखून आगे की तरफ से अधिक मुड़ जाते हैं.
इस टेस्ट को करते समय ऊंगलियों को आपस में मिलाना होता है. हाथ की पहली ऊंगली या तर्जनी ऊंगली के साथ फिंगर क्लबिंग टेस्ट किया जाता है. अगर छेद नहीं दिखता है तो यह लंग कैंसर के खतरे की घंटी है.
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