जान लें, शादी से पहले क्यों जरूरी है ''प्री-मैरिटल काउंसिलिंग'' करवाना

प्री-मैरिटल काउंसिलिंग में आपके व्यक्तित्व को अच्छी तरह से परख कर यह बताने की कोशिश की जाती है कि क्या आप शादी के लिए तैयार हैं?

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Written By: Anshumala | Published : August 14, 2018 4:06 PM IST

अक्सर लोग शादी करने से पहले सिर्फ कुंडली मिलाने पर ध्यान देते हैं। इतना काफी नहीं है। जिनकी शादी होने वाली है, उनका रिश्ता भविष्य में एक-दूसरे के साथ कैसा रहेगा, क्या दोनों एक-दूसरे के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर पाएंगे जैसी कुछ महत्वपूर्ण बातों पर भी गौर करना जरूरी होता है। दिसंबर का महीना शादियों का होता है। ऐसे में यदि आपके लिए भी रिश्ता ढूंढा जा रहा है या आपकी कहीं शादी की बात चल रही है, तो अभी आपके पास चार महीने का वक्त है। आप शादी तय होने के बाद या उससे कुछ दिनों पहले प्री-मैरिटल काउंसिलिंग का सहारा ले सकते हैं।

शादी एक नाजुक बंधन

शादी के बंधन में बंधना कोई छोटी-मोटी बात नहीं। यह बहुत ही नाजुक रिश्ता होता है, जिसे सहेज के न रखा जाए तो टूटने में भी देर नहीं लगती। शादी से पहले अक्सर मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। जब भी आपकी शादी हो, मन में आने वाले इन सवालों का जवाब पहले ही ढूंढ लेना जरूरी है, तभी आपका रिश्ता आगे भी बना रहेगा।

प्री-मैरिटल काउंसिलिंग से दूर करें डर

अक्सर नए रिश्ते में बंधने से पहले घबराहट होती है, इसलिए आप अपना सभी डर प्री-मैरिटल काउंसलिंग से दूर कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में काउंसलर शादी से संबंधित तमाम तरह की जानकारियां और सुझाव देते हैं, जिससे शादी में आने वाली कई तरह की मुश्किलों व परेशानियों को पल में दूर किया जा सकता है। इससे आपकी शादी-शुदा जिंदगी सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ सकती है। शादी के बाद पछताने से बेहतर होगा प्री-मैरिटल काउंसिलिंग कराना।

होती है व्यक्तित्व की परख

प्री-मैरिटल काउंसिलिंग में आपके व्यक्तित्व को अच्छी तरह से परख कर यह बताने की कोशिश की जाती है कि क्या आप शादी के लिए तैयार हैं? इतनी बड़ी जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हैं? किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, किस मुद्दे पर असहमति हो सकती है आदि। यह सब जानना इसलिए भी जरूरी है ताकि आपकी मैरिड लाइफ में आगे चलकर कोई बाधा न आए। अक्सर देखा गया है कि जो लोग 'वेरी मच इन लव" होते हैं, उनका भी प्यार पल में खत्म हो जाता है। एक-दूसरे के लिए अजनबी बनते जरा भी देर नहीं लगती। हर दिन बहस, झगड़ा लोगों की जीवन का हिस्सा बन जाता है। कई बार तो इस झेगड़े का अंत होता है तलाक पर जाकर।

काउंसिलिंग के तरीके

1 इसके सेशन के दौरान कपल को फेस-टू-फेस सामने लाया जाता है, उन्हें शादी से संबंधित ग्राउंड रियलिटी आैर जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाता है। इसमें आपकी पसंद-नापसंद, हॉबी, इनटरेस्ट पर कई तरह के सवाल किए जाते हैं। साथ ही धार्मिक झुकाव, शौक, रिश्तेदारों के प्रति व्यवहार, फाइनेंस मैनेजमेंट, जीवन से जुड़ी आपकी प्राथमिकताओं को जानने की भी कोशिश की जाती है। उन विषयों पर भी काउंसलर्स सवाल-जवाब के जरिए जानने की कोशिश करते हैं, जिसमें आप दोनों के बीच सम्भावित असामंजस्य और मतभेद हों। इसके लिए काउंसलर कपल्स को दोस्त की तरह सामने लाते हैं। उन्हें ऐसे मामलों पर खुल कर बोलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

2 काउंसिलिंग में दोनों ही पाटनर्स को मौका दिया जाता है ताकि वह एक-दूसरे के प्रति अपनी आशाओं के बारे में खुलकर बता सकें। सेशन में ईमानदारी का भी पाठ पढ़या जाता है। इस दौरान आपको एक-दूसरे के कई अरुचिकर सच्चाइयों का भी पता चलता है। इसका यह मतलब नहीं कि आपका साथी आपके प्रति फेथफुल नहीं है। एक-दूसरे को प्यार से स्वीकार करें चाहे कितनी भी असमानताएं क्यों न हों, यही सफल शादी-शुदा जिंदगी का की-मंत्र है।

3 शेयरिंग और केयरिंग भी एक अहम पहलू है काउंसिलिंग का। ध्यान रखें केयर करना सिखाने की बात नहीं होती पर केयरिंग बिहेवियर प्रैक्टिस के जरिए अपने अंदर डेवलप जरूर किया जा सकता है। शादी के प्रति कमिटमेंट बना रहे इसके लिए काउंसलर से मिलकर हेल्दी बिहेवियर डेवलप करना भी सीखें।

4 कभी-कभी ज्वाइंट फैमिली में भी कुछ लड़कियां खुद को एडजस्ट नहीं कर पातीं इसलिए इन-लॉज और बाकी के रिश्तेदारों के प्रति आपका व्यवहार कैसा हो यह भी सेशन में बताया जाता है। किस रिश्ते को कितनी महत्वता देनी चाहिए यह भी जानना जरूरी होता है।

5 एक-दूसरे के प्रति आपका व्यवहार भी शादी के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर है, व्यवहार किसी रिश्ते को सफल बनाने आैर टूटने की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। म्यूचुअल रिसपेक्ट, प्रोत्साहन, सराहना, प्रशंसा, कंसर्न आैर 'बीर्इंग देयर फॉर ईच अदर" जैसी भावनाओं का होना बेहद जरूरी है। तभी आपस में बॉडिंग आती है।

6 साथ ही काउंसिलिंग में पेरेंटिंग जिम्मेदारियों और बच्चों के प्रति व्यवहार पर भी चर्चा शामिल होती है। इसके अलावा काउंसिलिंग में पूरा फिजिकल चेकअप के साथ ब्लड टेस्ट भी लिया जाता है। इसके जरिए आप जान सकेंगी कि मेडिकल और सेक्सुअली किसी भी रूप में अपने पाटनर को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहीं। इसके लिए कपल्स को मेडिकल एडवाइस आैर बर्थ कंट्रोल क्यों जरूरी है इसके बारे में भी बताया जाता है। कई आंकड़ों में पाया गया है कि, जो कपल प्री-मैरिटल काउंसिलिंग कराए हैं उनकी मैरिज लाइफ खुशहाल व सफल रही है।

चित्रस्रोत : Shutterstock.

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