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"लिवर सिरोसिस'' क्यों है कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक

शुरुआती स्तर में व्यक्ति को अनावश्यक थकावट महसूस होती है, साथ ही उसका वजन भी बेवजह काम कम होने लगता।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : September 16, 2018 4:45 PM IST

इंसान के शरीर में हार्ट के बाद कोई सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है तो वह लिवर होता है। लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंग भी होता है। अगर आपका लिवर सही है तो आपका हेल्थ सही है। लिवर में होने वाली बीमारी हाल के दिनों में खतरनाक रूप लेने लगी है। लिवर सिरोसिस को डॉक्टर कैंसर के बाद सबसे ज्यादा खतरनाक बीमारी मानते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार लिवर सिरोसिस के 20 से 50 प्रतिशत मामले एल्कोहल के अधिक सेवन के कारण होते हैं। अगर इस बीमारी का समय से इलाज न करया जाय तो यह जानलेवा हो सकती है।

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क्यों होता है लिवर सिरोसिस 

सामान्य तौर पर यह गलत खान-पान की वजह से होने वाली बीमारी है। यह एक संक्रामक बिमारी है जो हेपेटाइटिस सी और बी की वजह से भी होती है। यह मरीजों के संपर्क में आने वाली चीजों से भी फैलती है। जैसी किसी संक्रमित व्यक्ति को लगी सीरिंज अगर किसी और मरीज को लग जाये तो उसे भी हो जाती है यह बीमारी। इसका इंफेक्शन इतना तेज होता है कि अगर कोई स्वस्थ्य व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसे भी यह बीमारी हो जाती है। लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस 'सी' और 'बी' से संक्रमित व्यक्ति से संभलकर मिलना चाहिए।

भारत जैसे देश में इस बिमारी की मुख्य वजह एल्कोहल का अधिक सेवन है। अधिक एल्कोहल की वजह से लिवर में सूजन हो जाती है और इसकी वजह से लिवर में बीमारी आने लगती है। लेकिन जो लोग एल्कोहल का सेवन नहीं करते हैं उनको भी यह बीमारी होती है। तब इन बीमारी को नैश सिरोसिस कहा जाता है।

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क्या है इलाज 

एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका अंतिम उपचार लिवर प्रत्यारोपण ही है। लिवर प्रत्यारोपण में परिवार की ही किसी सदस्य के लिवर का कुछ हिस्सा काम में आता है। लिवर देने वाले इंसान को किसी प्रकार का खतरा नहीं होता है।

क्या है लक्षण 

  1. शुरुआती स्तर में व्यक्ति को अनावश्यक थकावट महसूस होती है, साथ ही उसका वजन भी बेवजह काम कम होने लगता। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं सामने आती हैं।
  2. इस बीमारी के दूसरे चरण में व्यक्ति को अचानक चक्कर आने लगतेहैं और उल्टियां होने लगती हैं। उसे भूख नहीं लगती है और बुखार जैसे लक्षण होते हैं।
  3. तीसरी एवं अंतिम अवस्था में मरीज को उल्टियों के साथ खून आता है और वह बेहोश हो जाता है। इस बीमारी में दवाओं का कोई असर नहीं होता। प्रत्यारोपण ही एकमात्र उपचार है।
  4. लिवर के रोगग्रस्त होने के मुख्य लक्ष्ण त्वचा की रंगत का गायब होना और आंखों के रंग का पीला होना है। ऐसा खून में बिलीरूबिन (एक पित्त वर्णक) का स्तर अधिक होने से होता है जिसकी वजह से शरीर से व्यर्थ पदार्थ बाहर नहीं निकल पाता है।