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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : January 12, 2019 3:50 PM IST
लीवर में टॉक्सिन होने पर ये परेशानियां होने लगती हैं। ©Shutterstock.
लीवर में परेशानी मतलब पूरे शरीर का ठीक से न काम करना होता है। अगर लीवर ठीक से काम न करे तो पूरा शरीर खराब होने लगता है। हेल्दी लीवर मतलब हेल्दी जीवन। खान-पान और लाइफस्टाइल की वजह से लीवर में परेशानी हाल के वर्षों में बहुत बढ़ गयी है। लीवर को हेल्दी रखने के बारे लोग सतर्क भी नहीं रहते हैं।
लीवर शरीर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर में खून साफ करने के साथ-साथ खराब पदार्थों को शरीर से बाहर करता है। शरीर का मेटाबॉलिक सही रखने के लिए लीवर का सही से काम करना बेहद जरूरी है।
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हम यहां 8 ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जो संकेत देते हैं कि लीवर में टॉक्सिन जमा हो रहें हैं। टॉक्सिन के जमा होने के वजह से लीवर सही से काम नहीं करता और इंसान कई तरह की बीमारी का शिकार होने लगता है।
मल और मूत्र में लगातार परेशानी
पाचन तंत्र जब ठीक से काम नहीं करता है तो मल-मूत्र में बदलाव आने लगता है। ठीक से पेट साफ न होना और मूत्र के रंग में बदलाव इस बात के संकेत देते हैं कि आपका लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा है। वैसे पाचन की समस्या अन्य कारणों से भी हो सकती है लेकिन मल-मूत्र में लगातार परेशानी रहती है तो यह लीवर में टॉक्सिन की समस्या हो सकती है।
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पेट में सूजन
पेट में सूजन आना भी लीवर की परेशानी के संकेत हैं। अगर आपके भी पेट में सूजन आ गया है तो लीवर की समस्या हो सकती है। पेट में लगातार ऐंठन, गैस का बनना और कुछ खाने का मन न करना संकेत देता है कि लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा है। लीवर में टॉक्सिन जमा हो जाने पर खाने को पचाने वाले पदार्थ का बनना कम हो जाता है।
स्किन में परेशानी
लीवर में ज़रूरत से ज़्यादा टॉक्सिन जमा होने का सबसे बुरा असर त्वचा पर पड़ता है। व्यक्ति को कई तरह की त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बेवजह खुजली, सूखापन और एक्ने (चेहरे पर चित्तियां) होना लीवर में ज़रूरत से ज़्यादा टॉक्सिन जमा होने का संकेत है।
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लीवर टॉक्सिन और स्किन की परेशानी में क्या संबंध है ? ©Shutterstock.
एसिडिटी और गैस
पेट में एसिड बनना और डकारें आना (गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स) उन व्यक्तियों में आम है जो भर पेट या ज़रूरत से ज़्यादा भोजन खाते हैं। फिर भी, कभी-कभी हमें डकारें आने के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच-पड़ताल करनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि लीवर में टॉक्सिन जमा होने पर भी ऐसा हो सकता है।
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मानसिक व शारिरिक थकान
शारीरिक और मानसिक थकान का कारण रोज़ाना ज़रूरत से ज़्यादा कामकाज करना या फिर कुछ ख़राब आदतें हो सकती हैं। लेकिन अगर बार-बार बेवजह थकान होती है तो इसका कारण लीवर की कोई समस्या भी हो सकती है। सुस्ती, मन एकाग्र करने में कठिनाई और शारीरिक कमज़ोरी का कारण ख़ून में मौजूद टॉक्सिन हो सकते हैं।
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लीवर के आस-पास हल्का दर्द
टिश्यू में अत्यधिक सूजन के कारण शरीर में तरल जमा हो जाता है। इसका कारण लीवर का ठीक तरह से काम नहीं करना है। यह लक्षण किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों में आम तौर पर पाया जाता है लेकिन ऐसा लीवर के अत्यधिक कार्य करने से भी हो सकता है। इनमें से अधिकतर मामलों में हाथ-पैरों के साथ-साथ पेट में सूजन नज़र आती है।
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त्वचा का रंग बदलना
पीली त्वचा एक बीमारी है जिसे पीलिया कहते हैं और इसका कारण ख़ून में बिलीरुबिन का जमा होना है। यह पिगमेंट पित्त (बाइल) से बनता है जो कि पाचन प्रक्रिया के लिए बहुत ज़रूरी होता है। यह ख़ून में तब जमा हो जाता है जब लीवर अपशिष्ट पदार्थों को साफ़ करने में नाकाम रहता है।
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खाने का मन न करना
कई तरह की बीमारियों या भावानात्मक परिस्थितियों के कारण हमें भूख नहीं लगती है। हालांकि समझदारी इसी में है कि इस स्थिति में सावधानी बरती जाए क्योंकि कभी-कभी इसका कारण लीवर की समस्या हो सकती है। इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि इससे कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसके कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है।
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