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Skin Diseases: इस बीमारी में स्किन का रंग हो जाता है बैंगनी, शुरू में होते हैं ऐसे लक्षण

Symptoms of Lichen Planus: लाइकेन प्लेनस एक स्वप्रतिरक्षित रोग है, जो स्किन, बाल और म्यूकस मेंबरेन समेत शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर देता है।

Written By Mukesh Sharma
Published : April 19, 2022 4:20 PM IST

एक स्वस्थ और रोग मुक्त जीवन जीने के लिए शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ त्वचा को भी स्वस्थ रखना बहुत जरूरी होता है। कई ऐसे त्वचा रोग होते हैं, जो शुरुआत में कुछ विशेष प्रकार के लक्षण देते हैं और अगर उन पर ध्यान न दिया जाए तो बाद में वे गंभीर स्थिति का रूप ले लेते हैं। लाइकेन प्लेनस (Lichen planus) भी एक ऐसा ही रोग है, जिसके कारण त्वचा में सूजन और लालिमा हो जाती है। एक सर्वे के अनुसार भारत में 2.6 प्रतिशत व्यक्ति इस रोग से ग्रसित हैं। हालांकि, लाइकेन प्लेनस सिर्फ त्वचा को ही नहीं बल्कि म्यूकस मेम्बरेन, बालों और नाखून को भी प्रभावित कर सकती है। त्वचा पर बैंगनी और लाल रंग के दाने व चकत्ते बन जाना ही इस रोग का प्रमुख लक्षण होता है। इस लेख में हम आपको लाइकेन प्लेनस के बारे में कुछ खास जानकारी देने वाले हैं और साथ ही यह भी बताने वाले हैं कि त्वचा पर इसके शुरुआती लक्षण (Lichen planus symptoms) क्या हो सकते हैं जिनकी मदद से इसका पता लगाया जा सकता है।

क्या हो सकते हैं इसके शुरुआती लक्षण

अगर लाइकेन प्लेनस के लक्षण सबसे पहले त्वचा पर ही विकसित हो रहे हैं, तो इस दौरान शुरुआत में आपको त्वचा में हल्की-हल्की लालिमा दिखाई देने लगती है। धीरे-धीरे इन हिस्सों में चकत्ते बनने लग जाते हैं और इनका रंग भी बैंगनी हो जाता है। साथ ही त्वचा पर विकसित होने वाले इन चकत्तों पर गंभीर खुजली भी होने लगती है। सरल शब्दों में कहें तो स्किन पर हल्के बैंगनी रंग के चकत्ते विकसित होना और उन पर तेज खुजली होना, पूरी तरह से लाइकेन प्लेनस का संकेत देते हैं।

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स्व प्रतिरक्षित रोग है लाइकेन प्लेनस

यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसका मतलब है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली की किसी गड़बड़ी के कारण होता है। हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ये रोग किस कारण से होता है। हालांकि, हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण होना और कुछ प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण होना इस रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा जो लोग अधिक दवाएं खाते हैं, तो उन्हें भी यह रोग होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि हाई बीपी, डायबिटीज और हार्ट डिजीज के लिए ली जा रही कुछ दवाएं लाइकेन प्लेनस रोग होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

क्या इसकी रोकथाम संभव है

अन्य स्वप्रतिरक्षित रोगों की तरह लाइकेन प्लेनस की रोकथाम या बचाव करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, जीवनशैली में अच्छी आदतें जैसे धूम्रपान न करना, संतुलित आहार लेना और व्यायाम करना आदि अपनाने से लाइकेन प्लेनस होने के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही स्वस्थ जीवनशैली की मदद से हार्ट डिजीज, हाई बीपी और डायबिटीज जैसे रोगों के लक्षणों को नियंत्रित रखने से डॉक्टर इनकी दवाओं की खुराक कम कर सकते हैं, जो लाइकेन प्लेनस से बचाव करने में मदद कर सकता है।

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संक्रामक नहीं होता लाइकेन प्लेनस

लाइकेन प्लेनस के कारण त्वचा पर बने बैंगनी व लाल चकत्तों और सूजन को देखकर कुछ लोग समझते हैं की यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। हालांकि, ऐसा नहीं है क्योंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित गड़बड़ी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं फैल सकती है।

कई बार नहीं होती इलाज की जरूरत

लाइकेन प्लेनस के कुछ मामले जो आमतौर पर गंभीर नहीं है और लोगों को उनसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है, तो इनका इलाज कराने की जरूरत नहीं होती है। लाइकेन प्लेनस आमतौर पर दो साल के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए अगर इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है, तो इलाज कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, अगर लाइकेन प्लेनस से गंभीर लक्षण हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।