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ल्यूकोरिया से हैं परेशान, तो श्वेतप्रदर मुद्रा दिलाएगी छुटकारा, करें नियमित अभ्यास

ल्यूकोरिया से अक्सर महिलाएं पीड़ित होती हैं। हालांकि, इसका इलाज श्वेतप्रदर मुद्रा से संभव है। जानें, ल्यूकोरिया की परेशानियों से बचने के लिए कैसे करें श्वेतप्रदर मुद्रा का अभ्यास।

Written By Anshumala
Published : August 22, 2019 2:29 PM IST

ल्यूकोरिया की समस्या से हैं परेशान तो करें, श्वेतप्रदर मुद्रा।

पीरियड्स के पहले या बाद में अक्सर महिलाओं के योनि मार्ग से सफेद और चिपचिपा स्राव होता है। इसे ल्यूकोरिया कहते हैं। यह एक आम बीमारी है, लेकिन जब यह अधिक होने लगे और तीन-चार दिनों तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज करने पर यह गंभीर रूप ले सकती है। इससे हर आयु की महिलाएं ग्रस्त हो सकती हैं। इसका इलाज दवाओं, हेल्दी खानपान, शारीरिक आराम और एक खास मुद्रा करके भी किया जा सकता है। यह मुद्रा है श्वेतप्रदर मुद्रा (swetpradar mudra in Leukorrhea)।

क्या है ल्यूकोरिया

ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर (What is Leukorrhea) होने पर महिलाओं की योनि मार्ग से सफेद, पीले और चिपचिपे गाढ़े पदार्थ का बदबूदार स्राव होने लगता है। यह स्राव अधिकतर श्वेत रंग का ही होता है इसलिए इसे श्वेत प्रदर के नाम से भी जाना जाता है। कई बार इसमें अतिरिक्त रक्तस्राव की समस्या भी हो जाती है। यह समस्या आमतौर पर महिलाओं में पीरियड्स से पहले या बाद में एक या दो दिन सामान्‍य रूप से होती है। हर महिला में इसकी मात्रा और समयावधि अलग-अलग होती है। यह मुख्य रूप से भीतरी अंगों की ठीक से सफाई न करने, अत्यधिक मेहनत करने, एक सीमा से अधिक उपवास करने, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, मसालेदार और तले खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन और संक्रमण का परिणाम है।

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क्या है ल्यूकोरिया के लक्षण

गर्भाशय के सूजन से होने वाले इस रोग में बार-बार पेशाब लगने, जी मिचलाने, खुजली, पेट में भारीपन, कमजोरी, चक्कर आने, उदासी, आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, चिड़चिड़ापन, भूख में कमी, कब्ज, असमय बुढ़ापा, पीरियड्स में गड़बड़ी, चेहरा पीला पड़ जाने आदि शिकायत (Symptoms of Leukorrhea) देखने को मिलती है।

ल्यूकोरिया से बचने के लिए करें श्वेतप्रदर मुद्रा

योगाचार्य डॉ. प्रशान्त कुमार बताते हैं कि ल्यूकोरिया से अक्सर महिलाएं पीड़ित होती हैं। हालांकि, इसका इलाज श्वेतप्रदर मुद्रा (swetpradar mudra in Leukorrhea) से संभव है। ल्यूकोरिया की परेशानियों से श्वेतप्रदर मुद्रा मुक्त करती है। इसका अभ्यास करने के लिए दोनों अंगूठे कनिष्ठा यानी छोटी उंगलियों की जड़ में लगाएं। कनिष्ठा उंगलियों के साइड को मिला लें। अब अनामिका उंगलियों को क्रॉस कर लें।फिर मध्यमा उंगलियों के अग्रभाग को मिलाएं। अंत में तर्जनी उंगलियों (Index fingers) के शीर्ष को मिलाएं। प्रतिदिन इसका अभ्यास 15-15 मिनट चार बार करें।

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