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किडनी डिस्फंक्शन पूर्वी भारत में सबसे आम- एसआरएल के विश्लेषण में आया यह तथ्य सामने

पुरुषों (19 फीसदी) में किडनी डिस्फंक्शन के मामले महिलाओं (9 फीसदी) की तुलना में अधिक पाए गए। © Shutterstock

किडनी डिस्फंक्शन पूर्वी भारत में सबसे आम- एसआरएल के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया। इस विश्लेषण के परिणाम किडनी फंक्शन टेस्ट हेतू लिए गए 10,45,612 सैम्पल्स पर आधारित हैं। पुरुषों (19 फीसदी) में किडनी डिस्फंक्शन के मामले महिलाओं (9 फीसदी) की तुलना में अधिक पाए गए।

Written by Anshumala |Published : March 14, 2019 1:15 PM IST

देश के अन्य राज्यों की तुलना में भारत के पूर्वी राज्यों में रहने वाले लोगों में गुर्दों संबंधी जांचों के परिणाम अधिक असामान्य पाए गए हैं, एसआरएल डायग्नाॅस्टिक्स द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया। ये परिणाम 2016 से 2018 के बीच देश भर में ज्यादातर डाॅक्टरों की पसंदीदा डायग्नाॅस्टिक चेन के द्वारा किए गए किडनी फंक्शन टेस्ट के परिणामों पर आधारित हैं।

ये परिणाम देश भर में किए गए ब्लड यूरिया नाइट्रोजन क्रिएटिनाईन और यूरिक एसिड स्तर की जांच के विश्लेषण से सामने आए हैं। ब्लड यूरिया नाइट्रोजन लीवर के द्वारा प्रोटीन की प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाला एक व्यर्थ उत्पाद है, जिसे किडनी के द्वारा शरीर से बाहर निकाला जाता है। इसी तरह क्रिएटिनाईन शरीर में पेशियों के सामान्य ब्रेकडाउन से बनने वाला एक उत्पाद है। अगर किडनी अपना काम ठीक से न करे तो खून में इन संकेतों का स्तर बढ़ने लगता है। इसी तरह हाल ही में हुए एक अनुसंधान से पता चला है कि सीरम यूरिक एसिड का बढ़ना भी रीनल फंक्शन की कमी को बताता है, इन संकेतों के बढ़ने का अर्थ है कि व्यक्ति डायबिटीज और हाइपरटेंशन का शिकार हो सकता है और उसमें क्रोनिक किडनी रोग की संभावना बढ़ जाती है।

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एसआरएल के सर्वेक्षण

एसआरएल के सर्वेक्षण से पता चला है कि किडनी फंक्शन में असामान्यता (क्रिएटिनाईन और यूए दोनों) पूर्वी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा पाई गई (16 फीसदी), जबकि उत्तरी क्षेत्रों में यह 15 फीसदी पाई गई। लिंग वार असामान्यता की बात करें तो किडनी फंक्शन में असामान्यता महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक आम है, जहां 19 फीसदी पुरुष किडनी डिस्फंक्शन का शिकार हैं, वहीं किडनी डिस्फंक्शन से पीड़ित महिलाओं की संख्या 9 फीसदी है। 33 फीसदी पुरुषों तथा 16 फीसदी महिलाओं में क्रिएटिनाईन या यूए (दोनों में से एक) की मात्रा असामान्य पाई गई। सर्वेक्षण के परिणाम ''विश्व गुर्दा दिवस'' के मौके पर जारी किए गए।

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इन परिणामों पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए डाॅ बी.आर. दास, अडवाइजर एवं मेंटर- आर एंड डी एंड माॅलीक्यूलर पैथोलॉजी, एसआरएल डायग्नाॅस्टिक्स ने कहा, ‘‘आमतौर पर क्रोनिक रोगों की रोकथाम के लिए चलाए जाने वाले स्वास्थ्य प्रोग्रामों में हाइपरटेंशन, डायबिटीज मैलिटस और कार्डियोवैस्कुलर रोगों पर ध्यान दिया जाता है। हालांकि, वर्तमान में क्रोनिक किडनी रोगों के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो अधिकतर मामलों में अंतिम अवस्था के गुर्दा रोग बनकर परिवार एवं राष्ट्र पर आर्थिक बोझ पैदा करते हैं। ऐसे मरीजों और उनके परिवारों को डायलिसिस और गुर्दा प्रत्यारोपण का भारी खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में हमें इन परिणामों को गंभीरता से लेना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि इनकी रोकथाम के लिए जल्द से जल्द उचित कदम उठाए जाएं, इससे पहले कि इसे प्रबंधन करना असंभव होजाए।’’

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किडनी डिजीज मौत का सबसे बड़ा कारण

‘‘गुर्दा रोग वर्तमान में दुनिया भर में मौतों का 11वां सबसे बड़ा कारण हैं। क्रोनिक गुर्दा रोगों के मरीज अधिकतर गरीब वर्ग या ऐसे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं जो गरीबी की रेखा से नीचे हैं। ऐसे में गंभीर महामारी का रूप लेते इस गैर-संचारी रोग पर ध्यान देने की जरूरत है। लोगों को इसके विषय में जागरूक बनाना रोकथाम के लिए बेहर कारगर साबित हो सकता है। ऐसा सरकार, गैर-सरकारी संगठनों, अकादमिकज्ञों एवं सामाजिक कल्याण संगठनों की साझेदारी से संभव है।’’

डब्लूएचओ के आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक, भारत में 1990 में इस रोग के कारण 3.78 मिलियन (40.4 फीसदी) मौतें हुईं। यह संख्या 2020 में बढ़कर 7.63 मिलियन (66.7 फीसदी) हो सकती है। सीकेडी एक गैर संचारी रोग है जो दुनिया भर में हर 10 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करता है। एक अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में 850 मिलियन लोग किडनी रोगों से पीड़ित हैं। सीकेडी के कारण हर साल 2.4 मिलियन मौतें होते हैं और आज ये मौतों का छठा सबसे तेजी से बढ़ता कारण है। एक्यूट किडनी इंजरी (एकेआई) के कारण दुनिया भर के 13 मिलियन लोग प्रभावित हैं, इनमें से 85 फीसदी मामले निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में पाए जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार हर साल लगभग 1.7 मिलियन लोगों की मृत्यु एकेआई के कारण होती है।

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