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Written By: Anshumala | Updated : January 21, 2020 7:12 PM IST
Robotic Surgery से बदल रही है रीनल ट्रांस्पलान्ट की प्रक्रिया। © Shutterstock.
गुर्दे के प्रत्यारोपण (kidney transplant) के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ अब सर्जरी मिनिमली इनवेसिव बन गई है और रोगियों के आराम को सुनिश्चित करती है। रोबोट असिस्टेड सर्जरी (robotic surgery) ने बेहतर प्रबंधन और इंट्रा-ऑपरेटिव जटिलताओं के परिणाम सुनिश्चित किए हैं। यह सर्जरी पहले से अधिक सुरक्षित हो गई है।
कठिन मामलों को बड़ी सटीकता और खून की कम हानि के साथ मैनेज किया जा रहा है। वादे के अनुसार फायरफ्लाई और इमेज इंटरपोजिशन तकनीक इसमें काफी यहायक होंगी, जहां सर्जन को रियल टाइम में मार्गदेर्शन करने के लिए सर्जिकल क्षेत्र में सीटी/एमआरआई इमेज लगाई जाएंगी।
साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट, रोबोटिक्स और यूरो-ऑन्कोलॉजी के अध्यक्ष, डॉ. अनंत कुमार ने बताया, “पिछले कुछ वर्षों में, रीनल रिप्लेसमेंट और अंग समर्थन में काफी प्रगति हुई हैं। रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन (robotic surgery) बेहद उपयोगी हो गया है, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप रिकवरी तेज गति में होती है, दर्द कम होता है और निशान भी हल्के होते हैं। किडनी प्रत्यारोपण (kidney transplant) के लिए ओपन सर्जरी में मरीज को बड़ा कट लगाना पड़ता था, जबकि रोबोट सर्जरी में केवल एक छोटे से कट से काम हो जाता है और मांसपेशियों को भी नहीं काटना पड़ता है। इस सर्जरी के दौरान खून कम बेहता है और व्यक्ति को ज्यादा समस्या भी नहीं होती है।”
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हर मरीज के दिमाग में सर्जरी को लेकर एक अलग ही डर बना रहता है। दर्द और सर्जरी से होने वाली वकृति उन्हें ज्यादा डराती हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट हमेशा अपने रोगियों की मदद करने के लिए नई तकनीकों का प्रसार करने में सबसे आगे रहे हैं।
रीनल ट्रांसप्लान्ट की प्रक्रियाएं सरल, कम दर्दनाक, सुरक्षित और बेहतर हो गई हैं, इससे बेहतर और तेज रिकवरी सुनिश्चित हुई है। वर्तमान में दुनिया भर में जिस तरह से सर्जरी की जाती है, उसमें रोबोट-असिस्टेड सर्जरी क्रांति ला रही है। इस तरह की सर्जरी में कम से कम खून का बहाव, जल्दी ठीक होना, अस्पताल में कम वक्त के लिए भर्ती रहना शामिल है। इस सर्जरी के बाद व्यक्ति अपने जीवन को सामन्य तरीके से जी सकता है।
डॉ. कुमार ने आगे बताया, “किडनी फेल्योर (Kidney failure) के लगभग 2 लाख मरीजों को किडनीप्रत्यारोपण की जरूरत है, जबकि किडनी की उप्लब्धता में कमी के कारण हर साल केवल 5000 प्रत्यारोपण ही संभव हो पाते हैं। लोगों में रीनल ट्रांसप्लान्ट में प्रगति और किडनी डोनेट करने के बाद के बाद की समस्याओं को लेकर उनके डर को खत्म करने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। एडवांस लैप्रोस्कोपिक तरीकों से उत्कृष्ट कॉस्मेटिक परिणामों के साथ डोनर में समस्याओं को न के बराबर कर दिया है। एक प्रत्यारोपण सर्जरी को रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन के साथ संचालित करना काफी आसान है, इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि एक किडनी दान करने से व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, जीवन की गुणवत्ता या जीवन आयु प्रभावित नहीं होगी।“