क्रोनिक किडनी डिजीज को रोकने के लिए उचित आहार ज्यादा महत्वपूर्ण

जो लोग सही डायट लेते हैं उनमें 90 प्रतिशत रोगियों को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं होती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : August 17, 2018 4:56 PM IST

जर्नल ऑफ़ द अकादमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स में प्रकाशित एक नए शोध से पता चलता है कि सही आहार किडनी की बीमारी (सीकेडी) को ठीक करने में मदद कर सकता है। जो लोग सही डायट लेते हैं उनमें 90 प्रतिशत रोगियों को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन जागरुकता की कमी की वजह से लोग कभी भी आहार विशेषज्ञ से नहीं मिलते हैं। शोध में यह कहा गया है कि आहार संशोधन द्वारा किडनी की बीमारी कि जटिलताओं को काफी कम किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि जो लोग क्रोनिक किडनी डिजीज से परेशान हैं वो खान-पान में विशेष ध्यान देकर समस्या को बहुत हद तक कम कर सकते हैं। किडनी रोगों में प्रोटीन, सोडियम और पोटैशियम की मात्रा कम लेनी चाहिए। इन तत्वों का ज्यादा सेवन किडनी रोगियों के लिये नुकसानदायक होते हैं। जबकि शरीर के लिए जरूरी भी हैं और इसी कारण से इन्हें पूरी तरह से लेना बंद भी नहीं किया जा सकता है।

किडनी इंसान के शरीर से गैरजरूरी तथा जहरीले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर को डिटॉक्सीफाई करता है। अगर बीमारी के स्तर की बात करे तों अलग-अलग स्टेज में खान-पान में अलग-अलग परहेज होता है। आइए जानते हैं कुछ एक्सपर्ट्स के सुझाव जो किडनी के मरीजों के लिए और किडनी की बीमारी से दूर रहने के लिए भी फायदेमंद हैं।

प्रोटीन

किडनी की बीमारियों में प्रोटीन के उपयोग को कम किया जाता है। ज्यादा प्रोटिन का सेवन बीमारी को बढ़ाने का काम करता है। चूंकि प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक है इसलिए इसे बंद करने के बजाय कम करने की सलाह दी जाती है।

सोडियम

सोडियम का सबसे बड़ा स्रोत नमक होता है। दिन भर में एक चम्मच से ज्यादा नमक का सेवन न करें। जंक फूड और बाहर के खाने से परहेज करें। अगर मात्रा से देगा जाय तो 2 ग्राम नमक में 400 मिग्रा सोडियम पाया जाता है।

पोटैशियम

किडनी की क्रोनिक डिजीज में पोटैशियम की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे बचने के लिए भोजन में कम से कम पोटेशियम का सेवन करें। इसके लिये किसी विशेष डायट एक्सपर्ट्स से शरीर के पोटैशियम के लेवल के अनुसार खाने का चयन कर सकते हैं।

फॉस्फोरस

फॉस्फोरस का सेवन भी कम करें। क्योंकि ज्यादा मात्रा में फॉस्फोरस किडनी फेल्योर के साथ-साथ हड्डी रोग या हृदय रोग के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों से परहेज करें जिनमें इसकी मात्रा ज्यादा हो।

पेय-पदार्थ

जरुरत से ज्यादा पानी न पीएं, पानी तभी पीएं जब ज्यादा प्यास लगी हो। 500-700 मिली पानी रोज अन्य पेय पदार्थों के अलावा दिया जाता है। नमक कम से कम खाएं क्योंकि नमक ज्यादा खाने से प्यास भी ज्यादा लगती है। गला को तर करने के लिए हल्के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए नीबू, शिमला मिर्च, लहसुन, प्याज का प्रयोग किया जा सकता है। इन सभी खाद्य पदार्थों में पोटैशियम कम और विटामिन सी, ए , बी 6, फॉलिक एसिड, फाइबर की मात्रा भरपूर होती है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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