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Homeopathic medicine for piles : पाइल्स यानी बवासीर (Piles in hindi)एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रोगी को न सिर्फ तेज दर्द होता है बल्कि कुछ मामलों में शौच के वक्त खून आने की भी परेशानी होती है। पाइल्स में भी दो प्रकार होते हैं, जिसमें से एक खूनी और दूसरी बादी बवासीर है। ये दोनों ही स्थिति आपके लिए खतरनाक हो सकती है। ज्यादातर मामलों में लोग लेजर या फिर एलोपैथी का सहारा लेना पसंद करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि होम्योपैथी में ऐसी कुछ दवाएं हैं, जो पाइल्स से बचाने में (Homeopathic medicine for piles) मदद कर सकती हैं। इतना ही नहीं इसके साइड-इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं, जिसकी वजह से ये सिर्फ फायदा ही पहुंचा सकती है।SBL की सीनियर होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर और होम्योपैथी एक्सपर्ट डॉ. मंजू सिंह से जानिए पाइल्स में कौन सी दवाएं हैं फायदेमंद।
जी हां, होम्योपैथी बिना किसी सर्जरी के बवासीर की स्थिति का इलाज करने में मदद कर सकती है। लेकिन यह रोग की गंभीरता और बवासीर के चरणों पर निर्भर करता है। उचित और प्रभावी उपचार के लिए आपको होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करने की आवश्यकता है।
होम्योपैथी में पाइल्स की कई दवाएं हैं। जैसे की:
1. हमामेलिस: बवासीर के रोगी को खून बह रहा हो तो यह औषधि रक्तस्राव को रोकने में मदद करती है। यह तब भी मदद करती है जब रोगी मलाशय में दर्द बताता है।
2. रतनहिया: यह औषधि बवासीर के दर्द में आराम देती है। रोगी को दर्द का अहसास होता है जैसे उसका गुदा टूटा हुआ कांच से भर गया हो। बवासीर से ग्रसित रोगी को मल निकालने के समय और मल त्याग के घंटों बाद भी अत्यधिक दर्द और जलन महसूस होती है।
3. ग्रेफाइट्स: कब्ज और बवासीर दोनों से पीड़ित होने पर यह मददगार होती है। रोगी का मल सख्त और सूखा होता है। यह उन रोगियों को दी जाती है जो मोटे होते हैं।
4. नक्स वोमिका: यह दवा उन रोगियों को दी जाती है जिनकी जीवन शैली गतिहीन है, जो मसालेदार / तला हुआ भोजन करते हैं, और जो धूम्रपान करने वाले और शराब पीने वाले हैं। यह दवा बवासीर के साथ-साथ पाचन विकारों के इलाज में मदद करती है।
5. एस्कुलस: बवासीर से खून आने पर यह औषधि उपयोगी है। रोगी को बड़े, सख्त, सूखे मल के साथ यह महसूस होता है कि गुदा छोटी-छोटी छड़ियों से भरा हुआ है। गुदा में खुजली होती है।
होम्योपैथी दवा की खुराक एक खुराक के पैटर्न पर टिकी नहीं है। खुराक रोगी से रोगी में भिन्न होती है। इसलिए, किसी भी होम्योपैथिक दवा को शुरू करने से पहले रोगियों को एक योग्य होम्योपैथी चिकित्सक से परामर्श करने की आवश्यकता होती है। ताकि रोगी अपनी बीमारी की स्थिति के अनुसार दवा की उचित खुराक ले सके।
यह बवासीर के चरण पर निर्भर करता है। होम्योपैथी में बवासीर के उपचार की अवधि पूरी तरह से रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है। यदि रोग की स्थिति कुछ दिनों से लेकर महीनों तक तीव्र है तो परिणाम जल्दी होगा लेकिन यदि रोग एक वर्ष से अधिक की तरह पुराना है तो इसमें समय लगेगा।
नहीं, होम्योपैथी दवाओंका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कभी-कभी दवा में वृद्धि होती है लेकिन ये न्यूनतम होती हैं। यह रोगी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हमेशा एक योग्य होम्योपैथी चिकित्सक की देखरेख में होम्योपैथी दवाएं लेने की सलाह दी जाती है ताकि वह रोगी की आवश्यकता के अनुसार दवा की खुराक को बदल सके।
(Note_हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग होता है इसलिए दवाओं के रिएक्शन से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह पर ही कोई दवा लेना शुरू करें। इस आर्टिकल के माध्यम से डॉक्टर ने जो भी दवाएं बताई हैं अगर आप उन्हें लेना चाहते हैं तो एक बार अपने डॉक्टर की राय जरूर लें। दवा से हुए किसी भी तरह के साइड इफेक्ट की जिम्मेदारी thehealthsitedotcom नहीं लेता है।)