अस्थमा क्या है और होम्योपैथी इसमें कैसे काम करती है?

Homeopathy Se Asthma Ka Ilaj: अस्थमा ठीक करने के लिए अंग्रेजी दवाइयों के साथ-साथ होम्योपैथी भी फायदेमंद होती हैं। आइए डॉक्टर मुकेश बत्रा से जानते हैं अस्थमा क्या है और होम्योपैथी इसमें कैसे काम करती है?

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : May 5, 2026 1:22 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Mukesh batra

World Asthma Day 2026: विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर हम आपको बताएंगे कि क्या होम्योपैथी में अस्थमा का इलाज है? अगर हां तो कैसे? देखें अस्थमा लगातार सबसे आम पुरानी सांस की बीमारियों में से एक बना हुआ है, जो बच्चों और बड़ों दोनों को प्रभावित करता है, और भारत में इसका असर काफी ज्यादा है। मेडिकल क्षेत्र में इतनी आधुनिकता के बाद भी अप्रैल 2026 तक, भारत अस्थमा के एक बड़े बोझ से जूझ रहा है। अनुमान है कि 34-35 मिलियन से ज्यादा लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हैं, जो इसे दुनिया में सबसे ज्यादा मामलों वाले देशों में से एक बनाता है। 

हमने होम्योपैथी में अस्थमा के इलाज को लेकर होम्योपैथी डॉक्टर मुकेश बत्रा से बात की। उन्होंने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण, घर के अंदर मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने और धूम्रपान जैसे कारकों ने मामलों की बढ़ती संख्या में योगदान दिया है। जो बात खास तौर पर चिंताजनक है, वह यह है कि अस्थमा से जुड़ी वैश्विक मौतों में से लगभग 42% भारत में होती हैं। वैश्विक स्तर पर भी, अस्थमा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों और 'द लैंसेट' में प्रकाशित निष्कर्षों के अनुसार, यह दुनिया भर में 260 मिलियन से 363 मिलियन से ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है।

सांस की बीमारी के लक्षण क्या होते हैं?

अस्थमा के लक्षण Image Credit- ChatGPT

डॉक्टर बत्रा बताते हैं कि लगातार खांसी, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ और सीने में जकड़न महसूस होना जैसे लक्षण अक्सर बार-बार होते हैं और हर व्यक्ति में इनकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। कई लोगों के लिए, अस्थमा किसी एक कारण से नहीं होता, बल्कि यह आनुवंशिक प्रवृत्ति और पर्यावरणीय कारणों के मेल का नतीजा होता है। 

शहरीकरण भी बना अस्थमा का बड़ा कारण

तेजी से हो रहे शहरीकरण और बदलते पर्यावरणीय हालात ने सांस से जुड़ी समस्याओं को और भी आम बना दिया है। धूल के कण, पराग, धुआं, तेज गंध और काम की जगह पर मौजूद हानिकारक तत्व, ये सभी अस्थमा को उभारने वाले (ट्रिगर) कारक बन सकते हैं। इसके अलावा सेज जर्नल में पब्लिश रिसर्च बताती है कि अर्बन एरिया में अस्थमा प्रीवलेंस गांवों के मुकाबले अधिक देखी गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ता प्रदूषण और शहरीकरण है।

देरी से क्यों होता है अस्थमा का इलाज

डॉक्टर बताते हैं कि लोगों में तनाव और शुरुआती चेतावनी संकेतों के प्रति जागरूकता की कमी अक्सर समय पर इलाज में देरी का कारण बनती है, जिससे समय के साथ लक्षण और भी बिगड़ जाते हैं। वह कहते हैं कि कुछ लोगों को व्यायाम करने पर भी अस्थमा के दौरे पड़ते हैं- खास तौर पर ठंडे या सूखे मौसम में, ऐसे में अपने लिए खास ट्रिगर कारकों को पहचानना बेहद जरूरी हो जाता है।

अस्थमा के ट्रिगर कारकों को कैसे समझें?

इन ट्रिगर कारकों को समझना और उनसे बचना, अस्थमा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने का एक अहम हिस्सा है। हालांकि दवाएं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन जीवनशैली में किए गए बदलाव भी एक बड़ा फर्क ला सकते हैं। रहने की जगहों को साफ-सुथरा रखना, धूल जमा न होने देना, हवा के आने-जाने का उचित इंतजाम करना और तंबाकू व प्रदूषित वातावरण से दूर रहना, ये सभी अस्थमा से बचाव के सरल लेकिन असरदार तरीके हैं।

अस्थमा के प्रबंधन में होम्योपैथी कैसे मदद करती है?

होम्योपैथी डॉक्टर मुकेश बत्रा बताते हैं कि लोग होम्योपैथी का भी सहारा लेते हैं, जिसका मुख्य जोर पूरे व्यक्ति और उसके संपूर्ण स्वास्थ्य के इलाज पर होता है। इसमें दवा का चुनाव, मरीज में दिखने वाले खास लक्षणों के आधार पर किया जाता है। उदाहरण के लिए- 

अस्थमा से जुड़ी होम्योपैथी दवाइयां
दवाइयों के नामदवाइयों का उपयोग
एंटीमोनियम टार्टारिकम (Antimonium Tartaricum)जिन मामलों में खांसी के साथ घरघराहट होती है और बलगम निकालने में दिक्कत आती है, वहां अक्सर 'एंटीमोनियम टार्टारिकम' दवा देने पर विचार किया जाता है।
आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album)आर्सेनिकम एल्बम तब सुझाया जा सकता है जब सांस लेने में दिक्कत सुबह के शुरुआती घंटों में बढ़ जाती है और बैठने या आगे झुकने पर कम हो जाती है।
स्पोंजिया टोस्टा (Spongia Tosta)वहीं स्पोंजिया टोस्टा आमतौर पर सूखी, भौंकने जैसी खांसी से जुड़ा होता है।

इनका इस्तेमाल आमतौर पर 30C पोटेंसी में, दिन में दो बार 4 कैप्सूल के रूप में किया जाता है, जो व्यक्ति की जरूरतों और किसी विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करता है।

जीवनशैली में बदलाव

नियमित शारीरिक व्यायाम, जब नियंत्रित और सही माहौल में किया जाए, तो फेफड़ों के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। फलों, सब्जियों और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर संतुलित आहार पूरे स्वास्थ्य को सहारा देता है, जबकि पर्याप्त नींद और तनाव को संभालने के तरीके बीमारी के अचानक बढ़ने (फ्लेयर-अप) के जोखिम को कम कर सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह

अस्थमा के साथ जीने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत होती है। ऐसा दृष्टिकोण जिसमें सजगता, सही समय पर इलाज और समग्र देखभाल शामिल हो। सही रणनीतियों को अपनाकर, लोग अपने लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और इस पुरानी बीमारी से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद एक सक्रिय और संतोषजनक जीवन जी सकते हैं। अस्थमा के इलाज और प्रबंधन के लिए हमेशा किसी योग्य होम्योपैथी विशेषज्ञ से सलाह लें।

डिस्क्लेमर- हर साल 5 मई को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। लोग इसका इलाज करने के लिए भले ही अंग्रेजी दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन होम्योपैथी में भी इसका इलाज मौजूद है। फिर भी आप अपने शरीर, अस्थमा की स्टेज और बीमारी की गंभीरता के हिसाब से सही डॉक्टर और इलाज चुनें।

FAQs

अस्थमा का सबसे अच्छा इलाज क्या है?

अस्थमा का सबसे सफल इलाज इनहेलर्स और निवारक दवाओं का सही समय पर उपयोग है, जो साँस के मार्ग की सूजन को कम करते हैं।

अस्थमा ठीक करने का सबसे तेज तरीका क्या है?

अल्पकालिक बीटा एगोनिस्ट (SABA) त्वरित राहत देने वाली दवाएं हैं । ये तुरंत असर करती हैं और लक्षणों के पहले संकेत मिलते ही इन्हें ले लेना चाहिए। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद।

क्या होम्योपैथी में अस्थमा का इलाज होता है?

होम्योपैथी का उपयोग अक्सर पारंपरिक चिकित्सा (जैसे इनहेलर) के साथ एक पूरक उपचार के रूप में किया जाता है ताकि अस्थमा के दौरों की आवृत्ति और गंभीरता को कम किया जा सके।

अस्थमा होने का मुख्य कारण क्या है?

अस्थमा के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें राइनोसिनुसाइटिस, एलर्जी, जलन पैदा करने वाले पदार्थ, दवाएं (जैसे एस्पिरिन से होने वाली श्वसन संबंधी बीमारी में एस्पिरिन), और मोटापा शामिल हैं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.