
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 12, 2026 7:17 PM IST
Medically Verified By: Dr. Smriti Jhunjhunwala
हीट फटीग
Heat Fatigue Ka Homeopathy Mai Kya Ilaj Hai: गर्मियां बढ़ती रही हैं और लोग इस दौरान होने वाली शारीरिक थकान, सिर भारी रहने, कमजोरी, चक्कर आने और शरीर में एनर्जी की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। आपने लोगों को कहते हुए भी सुना होगा कि 'गर्मी लग गई-गर्मी लग गई', लेकिन असल में इसे हीट फटीग कहा जाता है। यानी कि गर्मी से जुड़ी थकान के संकेत। अक्सर इन गर्मी से जुड़ी इन समस्याओं के लिए लोग या तो घरेलू उपाय आजमाते हैं या फिर अंग्रेजी दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं।
लेकिन कोई होम्योपैथिक इलाज के बारे में नहीं सोचता है, क्योंकि किसी को पता ही नहीं है कि होम्योपैथी गर्मी से जुड़ी थकान को दूर करने में फायदेमंद साबित हो सकता है। इसलिए हमने होम्योपैथी डॉक्टर स्मृति झुनझुनवाला से बात की और उन्हें पूछा क्या गर्मियों में होने वाली शारीरिक कमजोरी और थकान के लिए होम्योपैथी में इलाज है? अगर हां तो वह क्या है? आइए जानते हैं उन्होंने क्या जानकारी शेयर की।
डॉक्टर बताती हैं कि हीट फटीग तब होता है जब शरीर लंबे समय तक गर्म वातावरण, डिहाइड्रेशन, पसीने और इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस के कारण थकान महसूस करने लगता है। इसमें व्यक्ति को सुस्ती, कमजोरी, किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत, बहुत ज्यादा प्यास और शरीर में दर्द व अकड़न महसूस होती है।
होम्योपैथी में पेशेंट के लक्षण, शरीर की प्रकृति और गर्मी के को लेकर उसकी सेंसिटिविटी को देखकर किया जाता है। होम्योपैथिक डॉक्टर के अनुसार कुछ रेमेडीज शरीर की एनर्जी को रिस्टोर करने, बेचैनी कम करने और गर्मी से जुड़ी थकावट में राहत देने में मददगार हो सकती हैं। लेकिन इसका असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है।
डॉक्टर के अनुसार 'अगर किसी व्यक्ति को गर्मी के साथ बहुत ही ज्यादा कमजोरी, बेचैनी या डिहाइड्रेशन महसूस हो रहा है, तो सिर्फ दवा पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त पानी, आराम और मेडिकल मॉनिटरिंग भी जरूरी है।' इसके अलावा डॉक्टर ने जरूरी बातों के बारे में बताया है, जिनका सभी के द्वारा ध्यान दी जाना चाहिए।
होम्योपैथी में अंग्रेजी दवाइयों की तरह नहीं होता है कि एक दवाई सभी अपना बुखार कम करने के लिए खा रहे हैं। बल्कि इसमें ऐसा नहीं होता है। होम्योपैथी में व्यक्ति के शरीर व समस्या के हिसाब से उसे दवा दी जाती है। इसलिए किसी व्यक्ति को अत्यधिक प्यास लगती है, तो किसी को गर्मी में चिड़चिड़ापन या बेचैनी अधिक होती है। इसलिए दवा हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही लेनी चाहिए।
डॉक्टर बताती हैं कि अगर आप होम्योपैथिक उपचार ले रहे हैं तो इसके साथ-साथ शरीर में पानी और नमक का संतुलन भी बनाए रखना बेहद जरूरी है। सिर्फ दवा लेकर पानी कम पीना समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें।
अक्सर देखा जाता है कि कोई भी बीमारी या शारीरिक समस्या बच्चों व बूढ़ों को अधिक होती है। ऐसा इसिए क्योंकि उनकी इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर होती है। ऐसे में अगर उनमें लंबे समय तक थकान, सुस्ती या कमजोरी दिखे तो घरेलू उपायों के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि कभी-कभी घरेलू उपाय असर नहीं दिखाते हैं और जब तक मरीज डॉक्टर के पास जाता है, तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती है।
फिलहाल होम्योपैथी के असर को लेकर बड़े स्तर पर बहुत ही कम वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। इसलिए एक्सपर्ट खुद सलाह देती हैं कि इसे सपोर्टिव केयर की तरह देखा जाए, न कि किसी इमरजेंसी ट्रीटमेंट के रूप में।
डिस्क्लेमर- होम्योपैथी कुछ लोगों में गर्मी से जुड़ी थकान के लक्षणों को कम करने में सहायक महसूस हो सकती है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध इमरजेंसी इलाज नहीं माना जाता। सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना, धूप से बचाव करना और गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना। गर्मी में लगातार थकान को हल्के में लेना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।