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Which Indian spice is good for gas : इंडियन किचन में जितने भी मसाले होते हैं, वे किसी न किसी रूप में सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इनमें अदरक भी शामिल है, जिसने पिछले कुछ सालों में मॉडर्न मेडिसिन में एक असरदार एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के तौर पर पहचान बनाई है, जो पाचन में भी मदद करता है। अदरक के अलावा भी कई ऐसे मसाले हैं जो पाचन में मदद करते हैं और खाने के बाद पेट फूलने की समस्या को कम करते हैं। इस आर्टिकल में हम ऐसे ही हर्ब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देखने में भले ही सिंपल से लगें, लेकिन काफी फायदेमंद होते हैं। यहां 5 ऐसे मसाले हैं, जिन्हें आप रोजाना की डाइट में शामिल कर सकते हैं। क्योंकि ये मसाले अपने औषधीय गुणों की वजह से भी जाने जाते हैं।
जीरा अपने मज़बूत पाचन गुणों के लिए जाना जाता है। डॉक्टर्स की मानें, तो यह डाइजेस्टिव एंजाइम के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे पाचन तेज़ हो सकता है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है। इसके अलावा, जीरा एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है और इसमें थाइमोल नामक एक कंपाउंड होता है, जो उन ग्रंथियों को एक्टिवेट करने में मदद करता है जो पाचन के लिए जरूरी एसिड, पित्त और एंजाइम स्रावित करती हैं। इसमें कार्मिनेटिव गुण भी होते हैं, जो गैस बनने और पेट फूलने को कम करने में मदद करते हैं। अगर आप खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ जीरे का पाउडर खाते हैं, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
सौंफ को अमूमन माउथ फ्रेशनर के तौर पर खाया जाता है, लेकिन यह गैस बनने, पेट फूलने और अपच से राहत दिलाने में भी कारगरहोती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें एनेथोल होता है, एक ऐसा कंपाउंड जो पेट की परत में सूजन को कम करने और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। खाना खाने के बाद आप एक चम्मच सौंफ का सेवन कर सकते हैं।
हल्दी मसालों की रानी होती है। यह एंटी-बायोटिक होने के साथ-साथ एंटी-इन्फ्लेमेटरी भी होती है। वहीं, जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं होती है, उनके लिए भी यह काफी फायदेमंद होती है। दरअसल, हल्दी पित्त उत्पादन को बढ़ाकर और पेट की सूजन को कम करके पाचन में मदद करती है। इसमें करक्यूमिन नामक एक एक्टिव कंपाउंड होता है, जो पित्ताशय को पित्त बनाने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे फैट को पचाने में मदद मिलती है।
दालचीनी अपने बेहतर स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती है। लोग इसका इस्तेमाल चाय बनाने और सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं, लेकिन यह मसाला पेट फूलने और गैस को कम करके पाचन को भी आसान बनाता है। वहीं, इसका तासीर गर्म होता है, जिसकी वजह से यह डाइजेस्टिव एंजाइम को एक्टिवेट करने, बेहतर डाइजेशन को बढ़ावा देने और बदहजमी को रोकने में मदद करती है। दालचीनी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी बहुत अच्छी है। यह खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में मदद करती है।
डाइजेशन में मदद करने और ब्लोटिंग की समस्या को दूर करने के लिए अजवाइन भी काफी फायदेमंद होती है। दरअसल, अजवाइन सदियों से भारतीय खाने में इस्तेमाल होती रही है। इसका तासीर गर्म होता है, जो इसे सर्दियों के लिए बेहतर बनाता है। इसके अलावा, इसमें थाइमोल होता है, यह एक ऐसा कंपाउंड जो पेट को ज़्यादा एसिड बनाने के लिए उत्तेजित करता है, जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है।