
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 13, 2025 8:56 PM IST
Burning sensation in feet in night: गर्मी और उमस के दिनों में लोगों को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। शरीर का तापमान बढ़ने से (Symptoms of rise in body temperature in hindi) आपको कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं जैसे, बहुत अधिक या बार-बार पसीना आना (Extreme sweating), सिर में दर्द (Headache), सुस्ती (Fatigue) और बहुत अधिक प्यास लगने (Increased thirst) जैसी समस्याएं दिन के समय महसूस होती हैं। वहीं, रात के समय भी तलवों में जलन की समस्या (Talvo mein jalan kyun hoti hai) हो सकती है। तलवों में जलन के साथ दर्द (Talve mein jalan aur dard) भी होता है जिससे लोगों को रात में सो पाने में दिक्कतें आती हैं।
पैरों के तलवों में जलन की सबसे बड़ी वजह है शरीर में पानी की कमी। डिहाइड्रेशन के कारण पैरों के तलवों में जलन (Pairon ke talvo mein jalan) बढ़ सकती है। वहीं, कुछ बीमारियों में भी तलवों में जलन हो सकती है। तलवों की जलन की समस्या कम करने और आराम पाने के लिए आप इन घरेलू उपायों की मदद ले सकते हैं।
एलो वेरा का जेल ठंडक देने का काम करता है। इसीलिए, स्किन में जलन, दर्द और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने में एलोवेरा का जेल लगाया जाता है। तलवों में जलन से आराम पाने के लिए आप एलो वेरा जेल की मालिश कर सकते हैं। रात में सोने से पहले पैरों पर एलो वेरा का जेल लगाएं और रातभर इसे यूं ही लगा रहने दें।
अगर पैरों की जलन बहुत अधिक बढ़ जाए तो आप बर्फ वाले पानी में अपने पैरों को डुबोकर रखें। इसके लिए एक बाल्टी में कुछ बर्फ के टुकड़ें लें और उसमें कुछ देर के लिए अपने पैरों को भिगोकर रखें। अधिक आराम के लिए आप पानी में गुलाब जल या नमक जैसी चीजें मिला कर फुट सोक तैयार कर सकते हैं। इसमें 20-30 मिनट तक पैरों को डुबोकर रखें।
जलन, दर्द और सूजन जैसी समस्याओं को कम करने के लिए आप पैरों और तलवों में मुल्तानी मिट्टी का लेप कर सकते हैं। जैसा कि मुल्तानी मिट्टी शरीर को ठंडक देती है और स्किन से जुड़ी अन्य कई तरह की समस्याओं को भी कम करती है।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशन उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।