
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 3, 2022 4:13 PM IST
भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है और यहां हजारों सालों पहले ही कई ऐसी चीजें विकसित हो गई थी, जिनका इस्तेमाल आज पूरी दुनिया में किया जाता है। जब भी कोई ऐसा विषय शुरू होता है, तो हमारे मन में योग और आयुर्वेद का नाम आता है। क्योंकि, आज दुनियाभर में लोग योग करते हैं और यह एक हेल्दी लाइफस्टाइल का ट्रेंड सा बन गया है। ठीक उसी प्रकार का आयुर्वेद को आज दुनियाभर में कई लाइलाज बीमारियों को खत्म करने के लिए जाना जाता है। लेकिन बहुत ही कम लोग सिद्ध चिकित्सा पद्धति के बारे में जानते हैं। इंटरनेट पर की गई कुछ रिसर्च के कुछ एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि सिद्ध चिकित्सा आयुर्वेद से भी पुरानी है और इसे ऋषि-मुनियों द्वारा तैयार किया गया है। इस लेख में हम आपको सिद्ध चिकित्सा क्या है और इसमें बीमारियों का जड़ से इलाज कैसे किया जाता है उस बारे में बताएंगे।
दरअसल सिद्ध चिकित्सा बहुत ही पुरानी चिकित्सा प्रणाली है और इसलिए इसकी जड़ का पता लगाना इतना आसान नहीं है। लेकिन कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि अगस्त्य को इस चिकित्सा प्रणाली के जनक माना जाता है। वहीं कुछ प्राचीन कथाओं में यह भी माना गया है कि इस चिकित्सा का ज्ञान स्वयं भगवान शिव ने देवी पार्वती को दिया था। सिद्ध चिकित्सा प्रणाली पर कई किताबें व ग्रंथ लिखे जा चुके हैं, जिनका इस्तेमाल से आज भी बीमारियों के इलाज में मदद मिलती है।
सिद्ध चिकित्सा को कुछ लोग आयुर्वेद ही समझ लेते हैं, क्योंकि इसमें ऐसी कई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जो आयुर्वेद में भी काफी प्रचलित हैं। लेकिन सिद्ध चिकित्सा प्रणाली की एक ऐसी चीज भी है, जो इसे खास बनाती है और वह है धातुओं का इस्तेमाल। दरअसल, सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में कई बीमारियों का इलाज करने के लिए अभ्रक, सल्फर और पारा जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है।
इस चिकित्सा पद्धति की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी रोग का इलाज करने से ज्यादा उससे बचाव करने पर ध्यान दिया जाता है। सिद्ध चिकित्सा पद्धति के कई साहित्यों में शरीर को रोगों से दूर रखने के कई नियम लिखे गए और वर्तमान में भी इन नियमों का पालन किया जा रहा है।
वर्तमान ट्रीटमेंट मेडिसिन सिस्टम की तरह इस चिकित्सा प्रणाली में रोगों और उनके लक्षणों के अनुसार इलाज नहीं किया जाता है। बल्कि इसमें रोगा इलाज करने की प्रणाली बेहद खास है। सिद्ध चिकित्सा में उपचार का उद्देश्य तीन मनोवृत्तियों और सात शारीरिक घटकों तत्वों को बनाए रखना है। इसमें रोग का इलाज उसके अंदरूनी कारणों के अनुसार किया जाता है और इस दौरान मुख्य उद्देशय रोग के कारणों को जड़ से खत्म करना होता है।
तमिलनाडु समेत भारत के कई दक्षिणी राज्यों में आज भी इस चिकित्सा प्रणाली का अभ्यास किया जाता है। 2020 में आई खबरों के अनुसार तमिलनाडु में कोरोना से संक्रमित करीब छह हजार मरीजों का इलाज किया गया था। साथ ही देश के कई राज्यों में ऐसे कई संस्थान है, जहां पर इलाज के लिए सिद्ध चिकित्सा प्रणाली की शल्य चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।