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Uric Acid Kaise Kam karein : शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें रेड मीट का अधिक सेवन, समुद्री आहार का सेवन इत्यादि प्रमुख माना जाता है। दरअसल, इस तरह के आहार में प्यूरीन की अधिकता होता है। प्यूरीन टूटकर ब्लड में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ाता है। इसके अलावा यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के पीछे अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा, डिहाइड्रेशन, आनुवंशिक गड़बड़ी, मूत्रवर्धक जैसी कुछ दवाएं और गुर्दे से जुड़ी बीमारी हो सकती है। अगर आप यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो नैचुरल उपायों का सहारा ले सकते हैं। नैचुरल उपायों की मदद से ब्लड में काफी हद तक यूरिक एसिड के स्तर को कम किया जा सकता है। रात में सोने से पहले अगर आप कुछ हेल्दी ड्रिंक्स लेते हैं, तो यह सुबह आपके यूरिक एसिड के स्तर को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए रात में कौन सी चाय का सेवन करें?
ब्लड में यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए मेथी और हल्दी से बनी चाय का सेवन करना काफी हेल्दी हो सकता है। यह दोनों ही मसाले कई तरह के आयुर्वेदिक गुणों का भंडार होते हैं, जिससे आपके ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर कम हो सकता है।
हल्दी में सक्रिय रूप से करक्यूमिन नामक यौगिक होता है, जो सूजन को कम कर सकता है। इससे यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, अदरक में जिंजरोल होता है, जो सूजन-रोधी गुणों का भंडार होता है। यह एक बायोएक्टिव यौगिक है, जो गठिया के लक्षणों को कम करने और यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
मेथी शक्तिशाली औषधीय गुणों का भंडार होता है। इसमें सैपोनिन और फ्लेवोनोइड जैसे यौगिक होते हैं, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। नियमित रूप से मेथी के बीज या पत्तियों का सेवन करने से सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। यह जोड़ों के दर्द को कम करने और यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
सबसे पहले पानी में मेथी दाना डालकर इसे अच्छे से उबाल लें। इसके बाद पानी को छानकर इसमें चुटकीभर हल्दी डालकर पिएं। इससे आपका यूरिक एसिड स्तर काफी हद तक कम हो सकता है।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।