
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : April 25, 2024 12:31 PM IST
Burning Sensation in Hands and Feet : गर्मियों में हाथ-पैरों में जलन की शिकायत होना काफी ज्यादा कॉमन है। मुख्य रूप से इस सीजन में हाथ-पैरों में काफी ज्यादा पसीना आता है, जिसकी वजह से बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में हाथ-पैरों में काफी ज्यादा खुजली, जलन और रैशेज की शिकायत होने लगती है। अगर आपके हाथ-पैरों में काफी ज्यादा जलन हो रही है, तो इस स्थिति में आप पान के पत्तों का प्रयोग कर सकते हैं। जी हां, पान के पत्तों का प्रयोग करने से आप अपने हाथ-पैरों में होने वाली जलन को शांत कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस्तेमाल का क्या है तरीका?
पान के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो हाथ-पैरों में बैक्टीरिया के पनपने के खतरों को कम कर सकते हैं। वहीं, पान का पत्ता शीतलक गुण का होता है। अगर आप इसके पत्तों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपके हाथ-पैरों को ठंडा रखने में प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा पान का पत्ता विटामिन सी का भी काफी अच्छा सोर्स होता है। इससे हाथ-पैरों में होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
हाथ-पैरों में होने वाली जलन को शांत करने के लिए पान के पत्तों का इस्तेमाल आप खाने से लेकर लगाने के रूप में कर सकते हैं। आइए जानते हैं तरीका-
पान के पत्तों से बना शरबत आपके हाथ-पैरों की जलन को शांत कर सकता है। इसके लिए 1 से 2 पान का पत्ता लें। इसके बाद इसे बारीक काट लें। अब एक गिलास करीब पानी में चीनी डालकर चाशनी बनाएं, इसमें पानी की पत्ती डालकर 1 तार की चाशनी तैयार करें। इसके बाद सौंफ के कुछ बीज डालकर इसे उबाल लें। अब इसे ठंडा करने के लिए रख दें। इसके बाद 1 गिलास लें, इसमें 2 से 3 चम्मच तैयार चाशनी और ठंडा पानी डालकर इसे सर्व करें।
हाथ-पैरों में पाने के पत्तों का पेस्ट लगाने से भी जलन को शांत किया जा सकता है। इसके लिए 1-2 पत्ता लेकर इसे सिलबट्टे की मदद से पीस लें। अब इस पेस्ट को पैरों पर लगाकर करीब 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इससे जलन को कम करने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।