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Barsati Fode Funsi Ka Ilaj: बरसाती फोड़े-फुंसियों का काल है नीम की छाल, जानिए इसके औषधीय गुण और प्रयोग का तरीका

नीम की छाल में भी औषधीय गुण पाए जाते हैं, यह बरसाती फोड़े-फुंसी के साथ-साथ मुंहासे और मलेरिया बुखार जैसी समस्याओं में फायदेमंद होते हैं, आइए जानते हैं नीम की छाल के औषधीय गुण और फायदे क्या-क्या हैं.

नीम अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. इसकी पत्तियां, निंबोली और छाल सभी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं. सनातन परंपरा में नीम को देवी के तौर पर पूजा जाता है. इसका कारण यह है कि नीम इंसानों को निरोगी बनाती है. आयुर्वेदिक औषधियां बनाने में नीम का प्रयोग किया जाता है. नीम की छाल (Neem Chhal) छोटे-मोटे बरसाती फोड़े फुंसियों (Rainy Boils) का इलाज करने में भी मददगार है. यह चेहरे के मुहांसों (Pimples) का उपचार करने में सहायक होते हैं.

नीम के छाल का औषधीय प्रयोग और फायदे

  • नीम के छाल को लेकर उसे कूट लें या किसी पत्थर पर पानी के कुछ बूंद डालकर उसे घिस लें, जिसके बाद जो गाढ़ा लेप निकलेगा उसे फोड़े-फुंसियां और मुहांसों पर कुछ हफ्तों तक नियमित रूप से लगाएं, इससे बरसाती फोड़े-फुंसी और चेहरे के मुंहासे ठीक हो जाएंगे।
  • सबसे पहले नीम के हरे पत्ते 50 ग्राम पानी में पीसकर टिकिया बना लें. अब तांबे के बर्तन में पत्तों की टिकिया को लेकर सरसों के तेल में पका लें. सरसों के तेल में पकने के बाद इसमें 5 ग्राम कपूर का चूर्ण अच्छी तरह से मिक्स करें। मलहम बन जाने पर इसे फोड़े-फुंसी या घाव पर लगाने से परेशानी दूर हो जाती है.
  • 20 ग्राम नीम की छाल को कूटकर 200 ग्राम पानी में उबालें एक चौथाई रह जाने पर इसे पिएं। यह मलेरिया बुखार ठीक करने में मदद करता है ऐसा दिन में 3 बार कर सकते हैं.

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