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बैठने का तरीका बढ़ा सकता है घुटनों का दर्द, इन आसान उपायों को अपनाकर पाएं इस दर्द से राहत

कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान गठिया के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। सामान्य दिनों की तुलना में लॉकडाउन के दौरान महिलाओं और पुरुषों में घुटने के दर्द की समस्या अधिक देखी गई है। घुटनों और जोड़ों में होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए जरूर अपनाएं ये उपाय...

Written By Anshumala
Published : August 31, 2020 9:49 PM IST

बैठने का तरीका बढ़ा सकता है घुटनों का दर्द, इन आसान उपायों को अपनाकर पाएं इस दर्द से राहत।© Shutterstock.

Knee Pain Dos and Don'ts: कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन (Covid-19 lockdown) के दौरान गठिया के मरीजों (Arthritis patient) की संख्या में वृद्धि हुई है। सामान्य दिनों की तुलना में लॉकडाउन के दौरान महिलाओं और पुरुषों में घुटने के दर्द (Knee pain) की समस्या अधिक देखी गई है। जीवनशैली की खराब आदतों के कारण, कम चलना-फिरना, लगातार बैठे रहने की आदत से लोगों में अर्थराइटिस के कारण होने वाले घुटनों के दर्द में इजाफा (Knee Pain Dos and Don'ts) हुआ है।

घुटनों और जोड़ों के दर्द के कारण होने वाली समस्याएं

घुटनों और जोड़ों के दर्द (Joint pain ) के कारण चलने-फिरने, खासतौर पर सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो सकती है। घुटनों में दर्द का मुख्य कारण (Causes of knee pain) गठिया (Arthritis) है। इसके लिए उठने-बैठने का तौर-तरीका भी काफी हद तक जिम्मेदार होता है। नियमित जीवन में छोटी-छोटी चीजें घुटने का दर्द बढ़ा सकती हैं।

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फोर्टिस हॉस्पिटल (नोएडा) के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के हेड व निदेशक डॉ. अतुल मिश्रा कहते हैं कि भारतीय संस्कृति में घुटने मोड़कर और पालथी मारकर बैठने की अक्सर जरूरत पड़ती है। पूजा के दौरान, सामूहिक भोजन करने के समय आदि कई कामों में घुटने मोड़कर ही बैठना पड़ता है। यहां तक कि भारतीय शैली के शौचालय में भी घुटने के बल बैठना पड़ता है। बैठने की यह शैली हमारी आदतों में शुमार हो गई है। इस आदत के कारण यहां लोग कुर्सी, सोफे या बेड पर भी घुटने मोड़कर बैठना पसंद करते हैं। बैठने के इस तरीके में घुटने पर दबाव पड़ता है, जिससे कम उम्र में ही घुटने खराब होने की आशंका बढ़ती है। हालांकि, इसके असर तुरंत नहीं दिखते, लेकिन उम्र बढ़ जाने पर घुटने की समस्या (Knee Pain Dos and Don'ts) हो जाती है।”

गठिया होने का कारण (Cause of arthritis)

ज्यादातर बैठकर काम करने, कम चलने-फिरने, मोटापा, धूप के संपर्क में कम रहने, जंक फूड के सेवन और विटामिन डी की कमी से भी गठिया होती है। शुरू में मरीज के घुटे में दर्द होता है और चलने-फिरने में तकलीफ होती है, लेकिन जब दिक्कत बढ़ती है, तो मरीज का चलना-फिरना दूभर हो जाता है। देश में आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र से ही महिलाओं में घुटने की समस्या शुरू हो जाती है, जबकि पुरुषों में यह समस्या अधिक उम्र में शुरू होती है।

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90 प्रतिशत महिलाओं में है विटामिन डी कमी

1 करीब 90 प्रतिशत भारतीय महिलाओं में विटामिन डी की कमी है, जो बोन मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है। अगर घुटने में दर्द और जकड़न हो और चलने-फिरने पर घुटनों में आवाज आए, तो गठिया की शुरुआत हो चुकी है। अगर दिक्कत शुरू हो जाए, तो बैठने का तरीका बदलना चाहिए। इसके बढ़ने पर घुटनों को मोड़ने में कठिनाई होती है। घुटने में विकृतियां भी हो सकती (Knee Pain Dos and Don'ts in hindi) हैं।

2 बीमारी के प्रारंभिक चरण के रोगियों के लिए स्टेटिक क्वाड्रिसप्स व्यायाम, साइकिल चलाना और तैराकी तीन सर्वोत्तम (Home remedies for knee pain) अभ्यास हैं। इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम है। व्यायाम से जोड़ों की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं, उनका लचीलापन बना रहता है और जोड़ों को उनसे सपोर्ट भी मिलता है।

3 मोटापे को रोकने के लिए संयमित खानपान और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना चाहिए। वजन कम होने से जोड़ों पर दबाव भी कम पड़ता है। इसके अलावा, विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में शरीर को मिलना चाहिए। विटामिन डी युक्त चीजों का सेवन हर दिन करें।

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