
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rohit Sane
जैसे ही महिलाओं की उम्र 35 से ज्यादा होने लगती हैं, तो उनके शरीर में कुछ बदलाव होने लगते हैं जो देखने में मामूली लगते हैं लेकिन होते बहुत महत्वपूर्ण हैं। चेहरे पर झुर्रियां, स्किन पर डलनेस और थकान होना आदि सबसे ज्यादा नोटिस किए जाने वाले लक्षण होते हैं। ये लक्षण अक्सर पेरिमोनोपॉजल स्टेज के दौरान हार्मोन के उतार-चढ़ाव होने के कारण होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर जो हमारे शरीर में त्वचा की लचीलता, हड्डियों का घनत्व, भावनात्मक स्थिरता और मेटाबोलिक कार्य प्रणाली को मैनेज करते हैं, इस दौरान ये सभी चीजें कम होने लगती हैं।
इस दौरान महिलाओं के शरीर में कोलेजन बनना कम हो जाता है और इस कारण से उनकी त्वचा पतली पड़ जाती है, जिससे झुर्रियां पड़ने लगती हैं। इतना ही नहीं शरीर में हार्मोन का स्तर ऊपर नीचे होने के कारण शरीर के कैल्शियम अवशोषित करने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है, इसके अलावा मूड स्विंग होने लगती हैं, चिंता होने लगती है और मानसिक तौर पर व्यक्ति स्पष्ट रूप से काम नहीं कर पाता है। हालांकि, जीवन के इस समय में कोई कुछ अधूरा महसूस करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सही आयुर्वेदिक तरीकों और सही जानकारी की मदद से महिलाएं अपने स्वास्थ्य में ये सभी कमियां होने से रोक सकती हैं और सफलतापूर्वक एक स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।
आयुर्वेद की मदद से सिर्फ आप बाहर से ही अच्छा नहीं दिखेंगी बल्कि अंदर से भी आपका शरीर स्वस्थ हो जाएगा। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि माधवबाग के संस्थापक और प्रसिद्ध हृदय चिकित्सक व आयुर्वेदिक डॉक्टर रोहित साने कह रहे हैं। उन्होंने 4 ऐसे आसान और प्रभावी घरेलू नुस्खों के बारे में बताया है, जो 35 से ज्यादा उम्र की महिलाओं की त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करेंगे और उनमें एजिंग के लक्षणों को कंट्रोल करेंगे।
सबसे पहले, शतावरी और अश्वगंधा का एक मिक्सचर अपने डेली इनटेक में शामिल करें। शतावरी महिला हार्मोन को संतुलित करने की अपनी क्षमता के लिए जानी जाती है, जबकि अश्वगंधा कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, जिससे समय से पहले उम्र बढ़ने का मुख्य कारण यानी कि तनाव कम होता है। सोने से पहले गर्म दूध या बादाम के दूध में मिलाकर दोनों का एक चम्मच लेने से समय के साथ बेहतर नींद, स्मूथ स्किन और इमोशनल स्टेबिलिटी बढ़ती है।
एलोवेरा और आंवला के रस के साथ दिन की शुरुआत करने से त्वचा और पाचन स्वास्थ्य, दोनों के लिए ही बहुत लाभदायक हो सकता है। आपको बता दें कि एक ओर जहां एलोवेरा त्वचा को अंदर से हाइड्रेट और शांत करता है, तो वहीं आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है जो कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देने में मदद करता है और स्किन को जवां बनाता है। आप खाली पेट दोनों रसों का 20-20 मिलीलीटर लें और सेवन करें। ये आपकी बॉडी और स्किन दोनों का डिटॉक्सिफिकेशन करने, त्वचा में चमक और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
डॉक्टर ने तीसरा उपाय लैवेंडर, गुलाब या चंदन जैसे सुगंधित तेलों से हल्की मालिश करने की सलाह दी है। ऐसा करने से त्वचा को पोषण मिलता है और साथ ही इंद्रियों को आराम भी मिलता है।इन एसेंशियल तेलों में प्राकृतिक एंटी-एजिंग गुण होते हैं और ये भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देते हैं। अपने पसंदीदा एसेंशियल तेल की कुछ बूंदें बादाम या जोजोबा तेल जैसे बेस ऑयल के साथ मिलाएं, इसे हल्का गर्म करें और सोने से पहले या नहाने के बाद अपनी त्वचा पर धीरे से मालिश करें। इससे रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और त्वचा की प्राकृतिक चमक वापस आती है।
आखिर में दिन में दो बार मुलेठी और सौंफ के हर्बल अर्क का सेवन करने से हार्मोन में बैलेंस हो सकते हैं और पाचन में सुधार हो सकता है। मुलेठी एक प्राकृतिक फाइटोएस्ट्रोजन के रूप में कार्य करती है, जो एस्ट्रोजन लेवल को सपोर्ट करती है और सौंफ सूजन को कम करने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करने में मदद करती है, जो स्किन रिपेयरिंग और एनर्जी लेवल को बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। बस आपको इसे रोज आधा चम्मच पानी में उबालकर पीना है।
जी हां, इसमें एंटी-एजिंग और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो स्किन को फ्री रेडिकल्स से होने वाले प्रभाव को कम करते हैं।
जी हां, क्योंकि आयुर्वेदिन में हर तरह जड़ी बूटियां शामिल हैं, जो सेहत से लेकर स्किन और हेयर तक हर समस्या नेचुरली इलाज करता है।
आप अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करके और खानपान में कोलेजन रिच फूड को शामिल करके एजिंग साइन को कम कर सकते हैं।