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बालों का झड़ना अस्थायी या स्थायी हो सकता है। किसी के भी सिर के बाल झड़ सकते हैं, लेकिन यह पुरुषों में अधिक आम है। गंजापन आमतौर पर खोपड़ी से अत्यधिक बालों के झड़ने को संदर्भित करता है। उम्र के साथ बालों का झड़ना गंजेपन का सबसे आम कारण है। कुछ लोग अपने बालों के झड़ने की प्रक्रिया को अनदेखा कर देते हैं, जिसके कारण उनके बाल पूरी तरह से झड़ जाते हैं। बालों के झड़ने के उपचार को आगे बढ़ाने से पहले, अपने बालों के झड़ने के कारण और उपचार के विकल्पों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। यहां हम आपको कुछ आयुर्वेदिक उपायों के बारे में बता रहे हैं।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ दीक्षा भावसार कहती हैं कि, इस तीन इंग्रेडिएंट से जिन्हें बाल झड़ने की दिक्कत थी और इस वजह का कारण पौष्टिक कमियां या फिर कोविड से रिकवरी, टाइफाइड की रिकवरी, स्ट्रेस के कारण, मेटाबॉलिज्म का कमजोर होना, कैल्शियम की कमी होना और अन्य समस्याएं थी, को ठीक किया जा सकता है।
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तिल के बीज बालों को मजबूत करने में और बालों के झड़ने को रोकने में काफी सहायक होते हैं। यह हेयर टॉनिक के रूप में काम करते हैं। काले तिल के बीज में विटामिन बी, आयरन आदि होते हैं और इनमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं जो बालों को सफेद होने से बचाने में भी मदद करते हैं। इसमें मौजूद विटामिन ई और लिगनेन भी स्किन को सूद। करने में मदद करता है। यह बालों के साथ साथ स्किन को मुलायम और जवान बनाए रखने में भी मदद करता है।
आज की मॉडर्न दवाईयों ने तिल के बीजों में दो प्रकार के एंटी ऑक्सीडेंट्स बताए हैं जिनका नाम सेसेमोल और सेसेमिनोल है। यह दोनो ही तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। यह होना तब और भी जरूरी हो जाता है जब आप कोविड, टाइफाइड और वायरल फीवर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हो ।
तिल के बीज भगना प्रसादक के नाम से भी जाने जाते हैं जिसे हड्डियों के लिए अच्छा माना जाता है। इसे आयुर्वेद बालों और नाखूनों के लिए भी अच्छा मानता है। इसे कैल्शियम का एक बाय प्रोडक्ट माना जाता है। इस प्रकार तिल आपके शरीर में कैल्शियम लेवल को भी इंप्रूव करने में मदद करता है। जिससे बालों की गुणवत्ता में सुधार आता है।
अलसी के बीजों में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है साथ ही इसमें विटामिन बी, विटामिन सी और बहुत से ऐसे पौष्टिक तत्व होते हैं जो बाल झड़ने से रोकने में मदद करते हैं। इससे बालों के विकास में मदद मिलती है। यह स्कैल्प को सूद करने में मदद करता है और स्कैल्प पर आने वाली इंफ्लेमेशन को कम करने में भी सहायक है। अलसी के बीजों में विटामिन बी होता है और इसमें बायोटिन, राइबोफ्लेविन, निएसिन, पाइरोडाइजिन, फोलिक एसिड जैसे तत्व होते हैं जो बालों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। अलसी के बीजों में विटामिन ई भी होता है जो फ्री रेडिकल्स को कम करने में सहायक है और साथ ही हेयर फॉलिकल को मजबूत करने में भी सहायक होता है।
यह आपके पेट की क्षमता में सुधार लाता है ताकि आप अच्छे से खाने को डाइजेस्ट कर सकें और अलसी और तिल के बीजों को अब्जॉर्ब कर सकें। यह इस मिश्रण का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देता है। इनके लाभों को जानने के बाद आप भी इस मिश्रण को खुद ट्राई करने से रोक नहीं पाएंगे।
लंच और डिनर खाने के आधे घंटे के बाद इसके मिश्रण को एक चम्मच का सेवन कर लें। इसे शाम को भी खा सकते हैं। जिन लोगों के शरीर में पित्त ज्यादा है उन्हें यह बीज घी में भून कर ही खाने चाहिए। रोजाना इसका सेवन 10 ग्राम में ही करना चाहिए ताकि कोई साईड इफेक्ट न हो।