
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 3, 2024 6:26 PM IST
Arjun Bark For Diabetes: डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए सर्दियों की ही तरह गर्मियों का मौसम भी थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि तापमान बदलते ही उनके ब्लड शुगर लेवल में भी उतार-चढ़ाव होने लगते हैं। इससे उनकी स्थिति को मैनेज करने में दिक्कत सकती है। डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर (glucose level spike in blood) बढ़ जाने से शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचने का रिस्क बढ़ जाता है और इससे किडनी, लिवर, आंखों और नर्वस सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण ऑर्गन्स के डैमेज होने का खतरा (bad effects of high blood sugar level on body organs) सबसे अधिक बढ़ जाता है।
ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने (controlling blood sugar level ) और अंडर कंट्रोल रखने के लिए नेचुरल चीजों से बने कुछ नुस्खे बहुत कारगर बताए जाते हैं। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो पूरी जिंदगी ठीक नहीं होती। हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल और सही खान-पान की मदद से इसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ की छाल (Arjun ke ped ki chaal) एक हर्ब की तरह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। आइए जानें डायबिटीज में अर्जुन की छाल के सेवन का तरीका क्या है। (Arjun tree bark benefits in hindi)
अर्जुन की छाल (Arjun tree bark) में एंटीऑक्सिडेंट्स के साथ-साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। ये सभी तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं और वायरस, इंफेक्शन और मौसमी बीमारियों से आपको सुरक्षित रखते हैं। वहीं, डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों (chronic diseases) के लक्षणों से आराम पाने के लिए भी अर्जुन की छाल के सेवन को फायदेमंद माना जाता है। ब्लड शुगर लेवल कम करने के साथ-साथ यह इंसुलिन के रिस्पॉन्स (Insulin response) को भी बेहतर करता है।
एक कप पानी को उबलने रखें। फिर इसमें थोड़ी-सी अर्जुन की छाल का पाउडर(Arjun tree bark powder) मिलाएं।
इस मिश्रण को 10 मिनट पकने दें।
फिर छानकर इसे पीएं।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।
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