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Written By: Anshumala | Published : May 15, 2019 9:29 AM IST
''अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस'' पर जानें ज्वाइंट फैमिली के फायदे। © Shutterstock.
''अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस'' हर साल 15 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को ''अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस'' मनाया जाने लगा है। 1995 से यह सिलसिला जारी है। इस दिन परिवार की महत्ता समझाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन के लिए जिस प्रतीक चिह्न को चुना गया है, उसमें हरे रंग के एक गोल घेरे के बीचों-बीच एक दिल और घर अंकित किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी भी समाज का केंद्र परिवार ही होता है। परिवार ही हर उम्र के लोगों को सुकून पहुंचाता है। परिवार से अलग होकर व्यक्ति के अस्तित्व को नहीं सोचा जा सकता है।
हर साल विश्व परिवार दिवस को एक खास थीम के जरिए सेलिब्रेट किया जाता है। इस बार इसका थीम है ''फैमिलीज एंड क्लाइमेट एक्शन: फोकस ऑन एसडीजी13''। इस थीम का मकसद ये है कि किस तरह परिवार मिलकर क्लाइमेट चेंजेज के प्रति जागरूकता और शिक्षा के जरिए मदद कर सकते हैं।
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हालांकि, पहले जिस तरह से लोग एक साथ मिलजुल कर संयुक्त परिवार यानी ज्वाइंट फैमिली में रहना पसंद करते थे आज अब ऐसा नहीं है। लोग अपने होम टाउन को छोड़कर शहरों की तरफ पढ़ने और नौकरी करने के लिए कूच कर जाते हैं। जब पढ़ाई पूरी हो जाती है और नौकरी करने लगते हैं, तो यहीं अपना छोटा सा परिवार बसा लेते हैं, जिसे एकल परिवार कहते हैं। पर क्या एकल परिवार में रहना संयुक्त परिवार में रहने से अधिक बेहतर है, तो जवाब है नहीं। संयुक्त परिवार के अपने कई फायदे हैं, जिसे लोग जानते-समझते हुए भी नजरअंदाज करते हैं।
आज भारत में एकल परिवार को लोग अधिक महत्व देने लगे हैं। इस कारण से आपसी प्यार, इज्जत, सहनशाक्ति भी कम होती जा रही है। न्यूकिलयर फैमिली में भले ही आपको आपका स्पेस मिल जाता है, आप अपनी मर्जी से उठते-बैठते हैं, कोई रोक-टोक नहीं होती, आजादी होती है, लेकिन अपनापन और प्यार नहीं मिलता है, जो संयुक्त परिवारों में होता है। संयुक्त परिवार में रहकर बच्चा बचपन से ही बड़ों का आदर करना, त्याग की भावना, एक -दूसरे को सम्मान देना जैसी अच्छी बातें सीखता है, जो एकल परिवार में पेरेंट्स के पास समय नहीं होने के कारण अधिकतर बच्चे ये आदतें नहीं सीख पाते हैं।
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संयुक्त परिवार में जेठानी, देवरानी, ननद सभी घर की जिम्मेदारी उठाती हैं। ऐसे में घर के काम का बोझ अकेले के कंधो पर नहीं होता। इससे उन महिलाओं के लिए फायदा होता है, जो नौकरी भी करती है। वह आराम से बिना टेंशन के ऑफिस जा सकती है, क्योंकि उनके पीछे घर और उनके छोटे बच्चों को संभालने के लिए दूसरे लोग होते हैं।
संयुक्त परिवार में रहने से पति-पत्नी का प्यार ज्यादा बढ़ता है, क्योंकि वह यहां एक-दूसरे से बात करने के लिए खास वक्त निकाल पाते हैं। झगड़ा होने पर घर के बड़े-बुजुर्ग समझाने के लिए भी होते हैं, इससे मन-मुटाव जल्दी खत्म हो जाता है। एकल परिवार में पति-पत्नी को समझाने वाला कोई नहीं होता और कई बार वह गुस्से में आकर गलत कदम उठा लेते हैं।
एकल परिवार में रहने पर अक्सर बच्चों की छुट्टी होने पर सास-ससुर के घर जाना होता है लेकिन जब आप सब साथ में रहेंगे तो छुट्टियों में कहीं नई जगह जाने का मौका मिलगा।
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एकल परिवार में बच्चों की परवरिश करना बहुत कठिन होता जा रहा है। कई महिलाएं बच्चों की देखभाल करने के लिए नौकर छोड़ देती हैं या फिर मेड रख लेती हैं, जो बच्चे की देखभाल करती है। इससे दिनभर आप ऑफिस में भी यही सोचती रहती हैं कि आपका बच्चे सुरक्षित हाथों में है या नहीं। ज्वाइंट फैमिली में ऐसा नहीं होता है। आपके अपने लोग होते हैं आपके बच्चे की केयर के लिए। यदि आप नहीं चाहतीं कि बुजुर्ग सास-ससुर पर बच्चे की देखभाल का भार अधिक बढ़ जाए तो आप चाहें तो एक मेड भी रख सकती हैं। इससे आप टेंशन फ्री होकर अपना काम भी कर सकती हैं।
संयुक्त परिवार में रहने से शादी-ब्याह, रिश्तेदारी निभाने की जिम्मेदारी भी कम हो जाती है, क्योंकि ज्यादातर रिश्तेदारों को घर के बड़े बुजुर्ग संभालते हैं या अगर आपका मन किसी शादी या पार्टी में जाने का नहीं है तो घर का कोई और सदस्य इस सामाजिक रिश्तों को निभा सकता है।
एकल परिवार में बीमार होने पर सबसे ज्यादा मुश्किलें खड़ी होती हैं, कोई देखभाल करने वाला भी नहीं होता लेकिन संयुक्त परिवार में बीमार होने पर सभी तीमारदारी करने को तैयार रहते हैं।
सबसे ज्यादा जो संयुक्त परिवार में मिलता है, वह है अपनापन और प्यार। चाहे कई बार मतभेद हो जाते हो या फिर विवाद हो जाता हो लेकिन मुश्किल घड़ी में सब एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।