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अक्सर शरीर पर छोटे-छोटे फोड़े या दाने निकल आते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य फोड़े-फुंसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मगर हो सकता है यह बालतोड़ हो। दरअसल, बालतोड़ त्वचा के बाल के अचानक टूटने से होता है। जब शरीर के किसी भी हिस्से का एक भी बाल जड़ से टूट जाता है तो वहां घाव के साथ फोड़ा बन जाता है। फिर इसमें पस बन जाता है। इसे बालतोड़ के नाम से जाना जाता है। इसमें बालों की जड़ में बैक्टीरिया का इन्फेक्शन हो जाता है। यह छोटी लाल रंग की फुंसी की तरह शुरू होता है और धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। फोड़ा काफी दर्दनाक होता है और कभी-कभी इनके कारण बुखार भी हो जाता है।
बालतोड़ का शुरुआत में ही इलाज करके इसको बढ़ने से रोका जा सकता है। ऐसे कई प्राकृतिक पदार्थ उपलब्ध हैं, जिनके इस्तेमाल से फोड़े के दर्द को कम किया जा सकता है और इसके ठीक होने की प्रक्रिया को बढ़ाया जा सकता है। यह बालतोड़ के आसपास बैक्टीरिया के इन्फेक्शन को कम करके हीलिंग प्रॉसेस को बढ़ा देते हैं।
हल्दी प्राकृतिक रक्त शोधक (Natural Blood Purifier) होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। एक चम्मच हल्दी के पाउडर को एक गिलास दूध में घोलकर उबाल लें। इस हल्दी के दूध को दिन में तीन-चार बाद सेवन करें। हल्दी और अदरक को सामान मात्रा में मिलाकर पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने फोड़े पर लगा लें और ऊपर से कपड़ा बांध लें।
प्याज में एंटिसेप्टिक केमिकल्स होते हैं जो बालतोड़ पर एक प्रभावी रोगाणुरोधी के रूप में कार्य करते हैं। प्याज के एक मोटे टुकड़े को काटकर फोड़े पर रखकर कपड़े से बांध लें। प्याज को अपने भोजन में भी नियमित इस्तेमाल करते रहें।
लहसुन में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज बालतोड़ को ठीक करने में काफी फायदेमंद हैं। लहसुन की तीन-चार कलियों को पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को फोड़े पर लगाएं। लहसुन की कली को गर्म करके घाव पर लगाने से भी फायदा होता है।
नीम में एंटीसेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज मौजूद होती हैं जो फोड़ा को ठीक करने के साथ-साथ कई अन्य त्वचा संबंधित समस्याओं से बचाती हैं। नीम की पत्तियोंको पीसकर पेस्ट बना लें। इसे बालतोड़ पर लगाएं। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से घाव को धो सकते हैं।
टी ट्री ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से हीलिंग प्रोसेस तेज हो जाती है और दर्द कम होता है। साफ रुई को टी ट्री ऑयल में भिगोकर बालतोड़ पर रख दें। ऊपर से कपड़ा बांध लें। हर पांच घंटे में इस रुई को बदलते रहें। लाभ होगा।
कलौंजी किसी भी प्रकार के स्किन इंफेक्शन के लिए काफी प्रचलित औषधि है। इसमें मौजूद मेडिकल प्रॉपर्टीज दर्द को भी कम करती हैं। कलौंजी के कुछ बीजों को पीसकर पेस्ट बना लें। इसे प्रभावित एरिया में लगा लें। आप कलौंजी के तेल को भी बालतोड़ पर लगा सकते हैं। एक चम्मच कलौंजी के तेल को एक कप गर्म या ठंडे ड्रिंक में मिलाएं। कुछ दिनों तक इसे रोज दिन में दो बार पिएं।