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Written By: Anshumala | Updated : September 16, 2019 4:54 PM IST
एचआईवी एड्स - लक्षण, उपचार और कारण। © Shutterstock.
''वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे'' या ''विश्व एड्स वैक्सीन दिवस'' प्रत्येक वर्ष 18 मई को मनाया जाता है। इस दिन को सेलिब्रेट करने का मुख्य मकसद लोगों को वैक्सीन या टीके के प्रति जागरूक करना और एचआईवी/एड्स के प्रति शिक्षित करना है। इस दिवस को ''एचआईवी वैक्सीन अवेयरनेस डे'' के रूप में भी जाना जाता है। एड्स क्या है, यह कैसे फैलता है, एचआईवी टीका क्या है, एचआईवी एड्स की ओर कैसे जाता है, इसे जानना सभी के लिए बेहद जरूरी है।
एड्स एक जानलेवा बीमारी है। ऐसे में इसके बारे में संपूर्ण जानकारी रखकर ही इस रोग से अपना बचाव करना संभव है। एचआईवी वैक्सीन अधिवक्ताओं ने एचआईवी संक्रमण और एड्स से बचाव के लिए टीके की निरंतर तत्काल आवश्यकता को बढ़ावा देकर इस दिन को चिह्नित किया है। यह दिन कई स्वयंसेवकों, सामुदायिक सदस्यों, स्वास्थ्य पेशेवरों और वैज्ञानिकों को धन्यवाद देने का मौका प्रदान करता है, जो इस रोग के रोकथाम के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी एचआईवी वैक्सीन खोजने के लिए लगातार काम और शोध कर रहे हैं।
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एक्वायर्ड- इस स्थिति का अर्थ है कि व्यक्ति वायरस से इंफेक्टेड है।
इम्यूनो - वायरस एचआईवी व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को एफेक्ट करता है।
डेफिशियेंसी- इसका मतलब है कि व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई है और ठीक से काम नहीं कर पा रही है।
सिंड्रोम - ऐसा हो सकता है कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण एड्स से पीड़ित व्यक्ति को अन्य बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
एड्स को एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम (Acquired ImmunoDeficiency Syndrome) के रूप में भी जाना जाता है। एचआईवी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस कहलाता है। यह बीमारी तब होती है जब वायरस सफेद रक्त कोशिकाओं (संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं) को बर्बाद करके आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। एड्स को एचआईवी के बाद के और अधिक गंभीर चरण के रूप में जाना जाता है।
एचआईवी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। जब एचआईवी उन्नत चरणों तक पहुंचने लगता है, तो योनि में यीस्ट इंफेक्शन और श्रोणि सूजन की बीमारी (pelvic inflammatory disease) हो सकती है। गंभीर संक्रमण, थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, वजन कम होना, लगातार दस्त, रात को पसीना आना, बुखार और सूखी खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं। अधिकांश लोग त्वचा पर अपर्याप्त बैंगनी विकास, अस्पष्ट रक्तस्राव, असामान्य रूप से त्वचा पर चकत्ते, पक्षाघात और मानसिक भ्रम का अनुभव भी कर सकते हैं।
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एक संक्रमित व्यक्ति के साथ कंडोम पहने बिना संभोग में करना।
सिरिंज और सुइयों को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करना, जिसे पहले से ही एचआईवी एड्स हो।
एक शल्य चिकित्सा उपकरण या सुई लगना, जो एचआईवी संक्रमित रक्त से दूषित हो।
संक्रमित योनि स्राव, वीर्य, एचआईवी संक्रमित रक्त में घावों और खुले घावों के संपर्क में आना।
शिशु अपनी मां से एचआईवी एड्स विकसित कर सकते हैं, जो स्तनपान या जन्म के दौरान पहले ही संक्रमित हो चुके हैं।
इसे ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन उपचार मदद करता है। चिकित्सा निदान की आवश्यकता पड़ती है। इसे डॉक्टर से ना दिखाना घातक साबित हो सकता है। ऊपर दिए गए लक्षण अन्य रोगों में भी हो सकते हैं। अतः एड्स की निश्चित रूप से पहचान केवल चिकित्सीय परीक्षण से ही की जा सकती है। एचआईवी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए मुख्यतः एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोएब्जॉर्बेंट एसेस यानी एलिसा टेस्ट किया जाता है।
एड्स के उपचार में एंटी रेट्रोवाइरल थेरपी और दवाइयों का उपयोग किया जाता है। इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एचआईवी के प्रभाव को काम करना, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और अवसरवादी रोगों को ठीक करना होता है। समय के साथ-साथ वैज्ञानिक एड्स की नई-नई दवाइयों की खोज कर रहे हैं, लेकिन सच कहा जाए तो एड्स से बचाव ही एड्स का बेहतर इलाज है।