hamburger icon
A
Read in English

क्या वाकई इम्यूनिटी को बूस्ट करती है गिलोय? जानें इसके पोषक तत्वों के बारे में और इसका कितना सेवन करें

भारत के लगभग हर गांव और घर के आंगन में गिलोय की बेल जरूर मिल जाएगी। सर्दी-जुकाम से लेकर बुखार तक, हमारे बड़े-बुजुर्ग इसे 'अमृता' कहकर इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं गिलोय में ऐसे कौन-कौन से तत्व पाए जाते हैं जो हमारी इम्यूनिटी को इतना मजबूत बनाते हैं? और सबसे जरूरी बात कि इसे कितनी मात्रा में और कैसे लेना चाहिए ताकि फायदा हो नुकसान नहीं?

WrittenBy

Written By: Ashu Kumar Das | Updated : July 28, 2026 10:04 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr Anjana Kalia, Dr. Chanchal Sharma

भारत में सदियों से आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली गिलोय (Tinospora cordifolia) को अमृता, गुडूची और अमृतबेल जैसे नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे ऐसी औषधीय बेल माना गया है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुखार कम करने और कई तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। कोरोना महामारी के बाद से गिलोय की लोकप्रियता ज्यादा हो गई है। कोरोना काल में जब संक्रमण से लड़ने की बात आई तब लोगों ने गिलोय को काढ़े, जूस और टैबलेट के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी खाद्य पदार्थ या जड़ी-बूटी को हर बीमारी की दवा नहीं कहा जा सकता; इसके फायदे, सीमाएं और सही उपयोग को वैज्ञानिक संदर्भ में समझना जरूरी है।

क्या गिलोय सच में इम्यूनिटी बढ़ाती है? किन लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए? एक दिन में कितनी गिलोय लेना सुरक्षित है, और क्या ज्यादा मात्रा गिलोय का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है? इस लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब आयुर्वेदिक दृष्टिकोण, आधुनिक चिकित्सा और उपलब्ध वैज्ञानिक रिसर्च के आधार पर समझेंगे, ताकि आप गिलोय के बारे में तथ्य और मिथक के बीच का फर्क स्पष्ट रूप से जान सकें।

गिलोय क्या है?

PubMed Central की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है कि गिलोय एक लता (Climbing Shrub) है, जिसका वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। यह मुख्य रूप से भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में पाई जाती है। इसकी पहचान इसके मोटे हरे तने, दिल के आकार की पत्तियों और औषधीय गुणों के कारण होती है। आयुर्वेद में इसे 'अमृता' कहा गया है, जिसका अर्थ है- अमरत्व देने वाली। ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है और कई रोगों से बचाने में मदद करती है।

गिलोय में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं?

गिलोय में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं-

S. NOगुण / तत्व का नामये क्या करता है?शरीर को मिलने वाला फायदा
1Alkaloids
Berberine, Palmatine
एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-मलेरियलशरीर को इंफेक्शन से बचाता है, बुखार के तापमान को कम करता है।
2Glycosidesएंटी-ऑक्सीडेंट, इम्यूनिटी बूस्टरशरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
3Diterpenoidsएंटी-इंफ्लेमेटरीजोड़ों का दर्द और गठिया में राहत दिलाने में मददगार होता है।
4Polysaccharidesइम्यूनो-मॉड्यूलेटरशरीर को वायरस से लड़ने की क्षमता देता है।
5Lignansहेपेटो-प्रोटेक्टिवलिवर को डिटॉक्स करता है, पीलिया में फायदेमंद हो सकता है।
6Essential Oilsएंटी-स्ट्रेस, एंटी-फंगलमानसिक तनाव को घटा सकने में मददगार होता है।
7Vitamins & Mineralsविभिन्न प्रकार के पोषक तत्वहड्डी मजबूत करे, खून बढ़ाए, कमजोरी दूर करे
8Anti- Oxidentsएंटी-ऑक्सीडेंटखून साफ करता है, स्किन निखारता है, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी करता है।

हालांकि वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि अधिकांश रिसर्च अभी छोटे स्तर पर हुई हैं। इसलिए किसी गंभीर बीमारी के इलाज के रूप में गिलोय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

गिलोय खाने से सेहत को मिलने वाले फायदे

दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि गिलोय सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। यह बार-बार होने वाले बुखार को कंट्रोल करने, सूजन कम करने और बदलते मौसम में कम होने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करती है। आइए आगे जानते हैं गिलोय खाने से सेहत को मिलने वाले फायदों के बारे में-

1. इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाती है

2017 में Journal of Ayurveda में छपी स्टडी के अनुसार गिलोय में मौजूद Polysaccharides और Glycosides हमारे इम्यून सिस्टम की सफेद रक्त कोशिकाओं यानी WBC को एक्टिव करते हैं। ये मैक्रोफेज नाम की कोशिकाओं को बढ़ाते हैं जो बैक्टीरिया और वायरस को खा जाती हैं। डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि गिलोय का सेवन करने से बार-बार सर्दी-जुकाम, बुखार होना कम हो जाता है। कोविड के समय ICMR ने भी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय का काढ़ा पीने की सलाह दी थी। इसके साथ ही, गिलोय में विभिन्न प्रकार के एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो बीमारी के बाद रिकवरी में तेजी लाते हैं। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है वो अगर सीमित मात्रा में गिलोय का सेवन करें तो उनकी इम्यूनिटी धीरे- धीरे तेज होने लगती है।

गिलोय में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।

2. बुखार और इंफेक्शन को कम करें

2019 में आई एक रिसर्च बताती है कि बुखार के दौरान शरीर के तापमान को कम करने और मौसमी इंफेक्शन से लड़ने के लिए शरीर को ताकत दिलाने में भी गिलोय फायदेमंद होती है। गिलोय में एंटी- माइक्रोबॉयल होते हैं यानी कीटाणु मारने वाले गुण रखते हैं। आयुर्वेदाचार्य अंजना कालिया का कहना है कि वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू जैसी बीमारी में जब शरीर का प्लेटलेट्स कम हो जाता है, तब भी गिलोय का रस मरीज को दिया जाता है। गिलोय का रस शरीर का प्लेटलेट्स धीरे-धीरे बढ़ाने में मदद करता है। ये शरीर का तापमान नॉर्मल करती है और साथ में इंफेक्शन की जड़ पर भी काम करती है।

3. शुगर और लिवर के लिए सपोर्टिव

अंजना कालिया बताती हैं कि आयुर्वेद के अनुसार गिलोय त्रिदोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करती है। इसलिए यह डायबिटीज जैसी बीमारी में भी फायदेमंद होती है। गिलोय के एक्सट्रैक्ट से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों का फास्टिंग ब्लड शुगर 15-20% तक कम हुआ है। दरअसल, गिलोय में Beta-sitosterol होता है जो इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। इसके साथ ही, गिलोय लिवर के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। गिलोय में Lignans नाम का तत्व लिवर की कोशिकाओं को टॉक्सिन से बचाता है। गिलोय का सेवन करने से पीलिया, फैटी लिवर और एसिडिटी की परेशानी कम होती है।

4. सूजन और जोड़ों के दर्द में राहत देती है

गिलोय के अंदर Diterpenoids नाम के तत्व होते हैं। ये एकदम नेचुरल पेनकिलर की तरह काम करते हैं।2020 में अर्थराइटिस पर हुई एक रिसर्च में पता चला कि गिलोय गठिया की सूजन को कम करने में दवाओं जितनी ही असरदार है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि गठिया, घुटनों का दर्द, कमर दर्द वाले लोगों को सुबह-शाम गिलोय का चूर्ण देने से दर्द और जकड़न में आराम मिलता है। ये सूजन को अंदर से कम करती है। जब सूजन कम होती है तो धीरे- धीरे दर्द भी कम होने लगता है।

5. दिमाग और स्ट्रेस के लिए टॉनिक

आयुर्वेद में गिलोय को मेध्य रसायन कहा गया है। गिलोय उन जड़ी- बूटियों में शामिल हैं जो दिमाग और नर्वस सिस्टम को ताकत देती हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट अंजना कालिया कहती हैं मेधा का मतलब है बुद्धि, याददाश्त और सीखने की क्षमता। गिलोय दिमाग की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स और तनाव से बचाती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट ब्रेन को शांत करते हैं और सोचने-समझने की शक्ति बढ़ाते हैं। आज की भागदौड़ वाली लाइफ में टेंशन, नींद न आना और भूलने की समस्या आम है। ऐसे में गिलोय का सेवन सही तरीके से करने से शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन को कम करती है। इसकी वजह से मन शांत रहता है और फोकस बढ़ता है। स्टूडेंट्स, ऑफिस वाले और बुजुर्गों के लिए ये बहुत फायदेमंद है।

6. त्वचा के लिए होती है फायदेमंद

गिलोय त्वचा के लिए नेचुरल ब्लड प्यूरीफायरहै। इसके एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण खून साफ करके मुंहासे, फुंसी और एलर्जी को जड़ से खत्म करते हैं। आयुर्वेद कहता है कि पित्त बढ़ने से होने वाली खुजली, एक्जिमा और दाद में गिलोय का रस पीने से आराम मिलता है। ये लिवर को ठंडा करती है इसलिए चेहरे की झाइयां और पिगमेंटेशन भी कम होती है। गिलोय कोलेजन बढ़ाकर स्किन को टाइट और ग्लोइंग बनाती है।

क्या ज्यादा गिलोय का सेवन नुकसानदायक होता है?

हां, कोई भी चीज ज्यादा हो जाए तो फायदा की जगह नुकसान करने लगती है। गिलोय भी एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। आयुर्वेद में कहा गया है अति सर्वत्र वर्जयेत यानी किसी भी चीज की अति नुकसान करती है। ज्यादा मात्रा में गिलोय का सेवन करने से सेहत को विभिन्न प्रकार के नुकसान हो सकते हैं-

  1. शुगर बहुत ज्यादा लो हो सकती है- गिलोय ब्लड शुगर कम करती है। ये डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा है। लेकिन अगर आप पहले से शुगर की दवा ले रहे हैं और साथ में ज्यादा गिलोय भी ले लेंगे, तो शुगर हाइपो हो सकती है। इसके कारण चक्कर आना, कमजोरी, पसीना आने की परेशानी हो सकती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर ही गिलोय का सेवन करना चाहिए।
  2. कब्ज और पेट की दिक्कत- गिलोय की तासीर गर्म और रूखी होती है। गिलोय को किसी भी प्रकार से ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में जलन, गैस, एसिडिटी और कब्ज हो सकती है। कुछ लोगों को उल्टी और दस्त की शिकायत भी होती है। जिन लोगों को पहले से ही पेट की परेशानी है उन्हें गिलोय का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।
  3. लिवर पर असर- रिसर्च में कुछ केस देखे गए हैं जहां बहुत ज्यादा गिलोय सप्लीमेंट लेने से लिवर एंजाइम बढ़ गए। खासकर पाउडर और एक्सट्रैक्ट फॉर्म में। इसलिए लिवर के मरीजों को गिलोय का सेवन बिना आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह के नहीं करना चाहिए।
  4. इम्यून सिस्टम ओवरएक्टिव हो सकता है- गिलोय इम्यूनिटी बढ़ाती है। लेकिन Autoimmune बीमारी जैसे Lupus, Rheumatoid Arthritis, Thyroid वाले लोगों में ये बीमारी को और भड़का सकती है। क्योंकि ज्यादा इम्यूनिटी शरीर की अपनी कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है।
  5. प्रेगनेंसी और फर्टिलिटी में दिक्कत- प्रेगनेंट और ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं के लिए गिलोय की सेफ्टी पर पक्का रिसर्च नहीं है। ज्यादा लेने से गर्भ पर असर पड़ सकता है। पुरुषों में ज्यादा मात्रा से स्पर्म काउंट पर असर की भी एक-दो रिपोर्ट आई हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान या प्रेग्नेंसी प्लानिंग करते समय महिला और पुरुष दोनों को ही गिलोय का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

गिलोय का सेवन कैसे करें?

अंजना कालिया कहती हैं कि गिलोय आपको बाजार में कई रूपों में मिल जाएगी। आप अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से कोई भी रूप चुन सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि एक दिन में आपको कितनी मात्रा में गिलोय का सेवन करना है इसकी मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

1. गिलोय का रस

गिलोय का सेवन करने का सबसे आसान और सुविधाजनक तरीका है बाजार में मिलने वाला गिलोय का रस। सुबह खाली पेट 15 से 30 ml गिलोय का रस 1 गिलास पानी में मिलाकर पी लें। अगर आप पहली बार गिलोय का रस पी रहे हैं तो इसकी शुरुआत 15ml से करें। एक्सपर्ट सलाह देती हैं कि जो लोग ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किसी प्रकार की दवा ले रहे हैं तो उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

2. गिलोय की गोली/टैबलेट

जिन्हें कड़वा रस नहीं पसंद उनके लिए गोली बेस्ट है। आप सुबह और शाम के समय 1 या 2 गिलोय की गोली डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

3. गिलोय का पाउडर/चूर्ण

3 से 5 ग्राम पाउडर यानी लगभग 1 छोटी चम्मच। इसे गर्म पानी या शहद के साथ ले सकते हैं।

4. गिलोय का काढ़ा

गिलोय के तने के 4-5 इंच टुकड़े को 2 गिलास पानी में डालकर आधा रहने तक उबाल लें। इसमें अदरक, तुलसी डाल सकते हैं। गिलोय का काढ़ा सर्दी, जुकाम और गले की समस्या से तुरंत राहत दिलाने में मदद करता है। ध्यान रहे कि घर पर गिलोय का काढ़ा बनाने के बाद इसे एक बार में बहुत ज्यादा न पिएं।

गिलोय का सेवन करते समय क्या ध्यान रखें?

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट बताती हैं कि गिलोय आजकल हर जगह मिल जाती है, लेकिन अच्छी क्वालिटी वाली गिलोय ही फायदा देती है। नकली या मिलावटी गिलोय लेने से उल्टा नुकसान हो सकता है। इसलिए खरीदते समय ये 4 बातें जरूर ध्यान रखें-

  1. केवल विश्वसनीय ब्रांड का उत्पाद खरीदें- बाजार में बहुत सारे ब्रांड हैं। हमेशा GMP सर्टिफाइड, आयुष या FSSAI अप्रूव्ड कंपनी की गिलोय ही लें।
  2. एक्सपायरी डेट जरूर देखें- दवा की तरह गिलोय की भी एक्सपायरी होती है। पुराना या एक्सपायर पाउडर और रस अपना गुण खो देता है और पेट खराब भी कर सकता है। पैकेट पर Mfg. Date और Exp. Date दोनों चेक करें।
  3. यदि खुद बेल से तोड़ रहे हैं तो सही पहचान सुनिश्चित करें- कई बार लोग गिलोय समझकर दूसरी बेल तोड़ लेते हैं। असली गिलोय का तना हरा, गाठों वाला और दिल के आकार के पत्ते होते हैं। कन्फ्यूजन हो तो किसी वैद्य या जानकार से पूछकर ही तोड़ें।
  4. नकली या मिलावटी उत्पाद से बचें- सस्ते के चक्कर में खुले में बिकने वाला पाउडर न लें। उसमें लकड़ी का बुरादा या दूसरी पत्ती मिला हो सकती है। सील पैक और साफ-सुथरा प्रोडक्ट ही खरीदें।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य गिलोय के बारे में जानकारी देना है, जो पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित है और डॉक्टर द्वारा बताई गई है। हालांकि, इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।