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लौंग एक विशेष खुशबूदार और अनेक गुणों वाली जड़ी-बूटी है। यह वास्तव में लौंग के पेड़ पर लगे फूलों की कली को सुखाकर बनाया जाता है। सरल भाषा में कहें तो हमारे द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला लौंग वास्तव में फूल की सूखी हुई कली होती है। यह मार्केट में सूखी कली के रूप में और इसके पाउडर के रूप में मिल जाता है। लौंग का इस्तेमाल एक मसाले के रूप में व्यंजनों को खुशबूदार बनाने के लिए और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी के रूप में अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है।
लौंग का इस्तेमाल दुनियाभर में कई स्वास्थ्य समस्याओं व उनके लक्षणों को दूर करने के लिए किया जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर पर लौंग का असर अलग हो सकता है, इसलिए किसी बीमारी के उपचार के रूप में लौंग का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
लौंग व उसके तेल में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को मारने में सक्षम होते हैं। लौंग के इस्तेमाल से दांत में दर्द, मसूड़ों में सूजन और मुंह में बदबू आदि लक्षणों से छुटकारा पाया जा सकता है। आजकल मार्केट में लौंग से बने कई प्रोडक्ट मौजूद हैं, जिनकी मदद से मुंह संबंधी समस्याओं का इलाज किया जाता है।
चूहों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार लौंग में नाइजेरिसिन (Nigericin) नामक एक खास तत्व पाया जाता है, जो मांसपेशियों की कोशिकाओं में इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है। चूहों पर अन्य अध्ययन भी किए जा चुके हैं, जिनमें लौंग या उसमें मौजूद तत्वों की मदद से रक्त शर्करा को कम करने में संभावित रूप से मदद मिलती है।
लौंग में कई प्रकार के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाने में मदद करते हैं। कोशिकाओं के नष्ट होने की दर जितनी घटती है, कैंसर होने का खतरा भी उतना ही कम होता रहता है। एक अन्य स्टडी भी की गई जिसमें लौंग के तेल में मौजूद विभिन्न प्रकार के घटकों में ब्रेस्ट कैंसर को रोकने की क्षमता पाई गई।
अध्ययनों में पाया गया कि वसा का सेवन करने से जमा होने वाली चर्बी को लौंग के इस्तेमाल से कुछ हद तक कम किया जा सकता है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन चूहों को लगातार लौंग दिया जा रहा था उनमें चर्बी अन्य की तुलना में कम हो गई थी।
लौंग पर किए गए कुछ अध्ययन बताते हैं कि लौंग का सेवन करने से लीवर स्वस्थ रखने में मदद मिलती है और परिणामस्वरूप लीवर रोग होने का खतरा कम हो जाता है। एक अध्ययन में पाया गया कि लौंग में मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) नामक तत्व लीवर सिरोसिस से होने वाले लक्षणों को कम करता है।
ऊपर बताए अधिकतर लाभों को जानवरों पर टेस्ट किया गया है और मानव शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या के रूप में लौंग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना बेहद जरूरी है।
कुछ अध्ययनों के अनुसार लौंग में पाए जाने वाले तत्व कुछ लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता हैं, जिसमें उन्हें त्वचा, आंख या सांस से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। वहीं कुछ लोगों को लौंग या उसमें मौजूद किसी भी तत्व से एलर्जी भी हो सकती है, ऐसे में यदि आपको एलर्जी के लक्षण महसूस होने लगे तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लें।
हालांकि, भोजन में लौंग के सेवन को पूरी तरह से सुरक्षित माना गया है, क्योंकि इसका इस्तेमाल बहुत ही कम मात्रा में होता है। इसका अधिक मात्रा में या लंबे समय तक सेवन करने से स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
भारत समेत कई देशों में लौंग का इस्तेमाल व्यंजनों में डाले जाने वाले एक मसाले के रूप में किया जाता है और दुनियाभर में एक हर्ब के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। लौंग न सिर्फ व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में मदद करता है बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में भी यह काफी कारगर है। इसके प्रभावी कार्यों को देखते हुए कई चिकित्सा पद्धतियों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। लौंग का सेवन करने की विधि इस प्रकार है -
हालांकि, लौंग का सेवन करने से पहले उसकी उचित मात्रा का सेवन करने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।