Hepatitis : जानें, फिट रहने के लिए लिवर को सेहतमंद रखना क्यों है जरूरी ?
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है- ए, बी, सी, डी और ई। यह जानलेवा भी हो सकता है। लाखों लोग हेपेटाइटिस बी और सी के कारण गंभीर बीमारी का शिकार हैं, जो लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का रूप ले सकता है। हालांकि, समय पर निदान के द्वारा 80 फीसदी मामलों में इसका इलाज संभव है।
हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है। यह फाइब्रोसिस’ या लिवर कैंसर’ का रूप ले सकती है। ऐसा शराब के अधिक सेवन, कुछ विशेष दवाओं या ऑटोइम्यून बीमारियों की वजह से हो सकता है। हेपेटाइटिस (Hepatitis in hindi) मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है- ए, बी, सी, डी और ई। यह जानलेवा भी हो सकता है। लाखों लोग हेपेटाइटिस बी और सी (Hepatitis in hindi) के कारण गंभीर बीमारी का शिकार हैं, जो लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का रूप ले सकता है। हालांकि, समय पर निदान के द्वारा 80 फीसदी मामलों में इसका इलाज संभव है।
हेपेटाइटिस बी और सी के कारण (Hepatitis in hindi)
लिवर रोग हेपेटाइटिस बी और सी के मुख्य कारण हैं वायरल संक्रमण और सिरोसिस जो शराब का अधिक सेवन, सिरोसिस, हीमोक्रोमेटोसिस (एक आनुवंशिक बीमारी जिसमें शरीर में आयरन अधिक मात्रा में बनता है), मोटापा, संक्रमित सीरींज का इस्तेमाल, असुरक्षित यौन संबंध, बिना सतर्कता के विषैले रसायनों के साथ काम करना, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए जा चुके उपकरणों से टैटू बनवाना, शारीरिक व्यायाम की कमी, तले खाद्य पदार्थों का सेवन, संदूषित जल पीना, वायरस का संक्रमण, मैटाबॉलिक सिन्ड्रोम और कुपोषण की वजह से हो सकता है।
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हेपेटाइटिस के लक्षण और बचाव (Hepatitis in hindi)
शुरुआती अवस्था में रोग के लक्षणों को पहचानना मुश्किल है लेकिन क्रोनिक अवस्था में इसका निदान किया जा सकता है। ये लक्षण हैं- पीलिया, थकान, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, सूजन, खुजली, भूख में कमी और वजन में कमी। इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, सीनियर कन्सलटेन्ट डाॅ. अमिताभ दत्ता का कहना है कि हेपेटाइटिस से बचने के लिए बेहतर सैनिटेशन, खाद्य सुरक्षा एवं टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीके हैं। सुरक्षित पेय जल, समुदाय में सीवेज के उचित डिस्पोजल, हाइजिन जैसे खाना खाने से पहले और बाथरूम के बाद नियमित रूप से हाथ धोने की आदत अपनाकर हेपेटाइटिस को फैलने से रोका जा सकता है।
हेपेटाइटिस बी वायरस को पहचानें
हेपेटाइटिस बी एक ऐसा वायरस है जो रक्त, वीर्य एवं योनि के तरल से फैलता है। हेपेटाइटिस बी से पीड़ित गर्भवती मां अपने बच्चे को यह संक्रमण दे सकती है। हेपेटाइटिस बी से पीड़ित कुछ लोग वायरस से छुटकारा पा सकते हैं, लेकिन कुछ अन्य लोगों में यह क्रोनिक रूप लेकर आजीवन संक्रमण का कारण बन जाता है, जो जानलेवा लिवर रोगों और यहां तक मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
बच्चों को यूं रखें हेपेटाइटिस बी से सुरक्षित
अपोलो हाॅस्पिटल्स ग्रुप के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डाॅ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि बच्चों को हेपेटाइटिस बी से सुरक्षित रखने के लिए गर्भावस्था में हेपेटाइटिस बी की जांच के अलावा बच्चों को हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन देना जरूरी है। इसके अलावा अगर आप अपने बच्चों को लेकर ऐसे देश में जा रही हैं, जहां हेपेटाइटिस बी अधिक पाया जाता है, तो आपको खासतौर पर सावधानी बरतनी चाहिए। सभी बच्चों को जन्म के समय हेपेटाइटिस बी वैक्सीन देने की सलाह दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति को पैदा होने के बाद यह वैक्सीन नहीं लगाई गई है, तो 19 साल की उम्र तक उसे कभी भी वैक्सीन दी जा सकती है।
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कुपोषण का शिकार होने से बचाएं खुद को
संतुलित आहार का सेवन नहीं करने से कुपोषण नियमित रूप से व्यक्ति को बीमार कर सकता है। कई बार कुपोषण क्रोनिक लिवर फेलियर का कारण बन जाता है। समय के साथ शहरी लोगों की जीवनशैली में बड़े बदलाव आए हैं। आजकल युवाओं में जंकफूड, धूम्रपान का सेवन आम हो गया है, जिसके चलते नाॅन-एल्कोहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस की संभावना भी बढ़ रही है। यह लिवर को नुकसान पहुंचाता है। नाॅन-एल्कोहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस लिवर में सूजन का मुख्य कारण है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह मरीज में कैंसर का कारण बन सकता है।