आखिर क्यों लिवर कैंसर का कारण बनता है हेपेटाइटिस सी? जानें विस्तार से

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : July 26, 2020 9:01 AM IST

हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) एक वायरस है जो खून के माध्यम से शरीर में घुसता है और सीधा लिवर पर अटैक करता है। एचसीवी (HCV) नाम का यह वायरस लिवर से संबंधित कई बीमारियों को जन्म देता है। इस वायरस के चलते लिवर फेल या लिवर कैंसर (Liver Cancer) होने का भी खतरा रहता है। हेपेटाइटिस सी एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। भारत में कई जगह ऐसी हैं जहां की लगभग 80 प्रतिशत जनता हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त है। हेपेटाइटिस डे के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है। वैसे तो हेपेटाइटिस मुख्यत: 5 प्रकार (हेपे​टाइटिस ए, हेपे​टाइटिस बी, हेपे​टाइटिस सी, हेपे​टाइटिस डी और हेपे​टाइटिस ई) का होता है। जिसमें हेपेटाइटिस सी को सबसे खतरनाक माना जाता है। आज इस लेख में हम आपको हेपेटाइटिस सी के बारे में कुछ जरूरी जानकारी देंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि हेपे​टाइटिस सी किस तरह से लिवर को प्रभावित करता है।

liver

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हेपेटाइटिस सी के लगभग 80% मामले एसिम्प्टमैटिक होते हैं, जिससे समय पर उनकी जांच और इलाज हो पाना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। क्या आपको यह लगता है कि हेपेटाइटिस सी की वक्त पर पहचान कर इसे रोका जा सकता है? लिवर एक बहुत बड़ा अंग है और हेपेटाइटिस बी और सी दोनों वायरस सीधे लिवर को ही प्रभावित करते हैं और ये वायरस तब तक लिवर में ही रहता है जब तक आधे से ज्यादा लिवर खराब न हो जाए या जब तक लिवर की बीमारी सामने नहीं आती। एक बार जब यह प्रकट होता है तो आमतौर पर बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए, डॉक्टर्स कहते हैं कि हेपेटाइटिस सी के लगभग 80 प्रतिशत मामले लंबे समय तक एसिम्प्टमैटिक रहते हैं। ऐसे में रोगियों को पहचान पाना और उनका इलाज कर पाना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। अब ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए? हेपेटाइटिस सी के मरीजों की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग कार्यक्रम किए जाने की आवश्यकता है और ये स्क्रीनिंग कार्यक्रम विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए किए जाने चाहिए जो उच्च जोखिम में हैं। साथ ही हर व्यक्ति को साल में कम से कम 1 बार अपना ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

Gallbladder stones

हेपेटाइटिस सी और लिवर संबंधी रोग

हेपेटाइटिस सी और लिवर में बहुत गहरा संबंध है क्योंकि यह वायरस सीधा लिवर को ही प्रभावित करता है। कई रिपोर्ट में यह गया है कि हेपेटाइटिस सी से जूझ रहे 100 लोगों में से 5 लोग ऐसे हैं जो लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर या लिवर से संबंधित अन्य रोगों से ग्रस्त रहते हैं या मर जाते हैं। कैंसर स्पेशलिस्ट तो यहां तक कहते हैं कि हेपेटाइटिस सी सीधे तौर पर लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। ​यह वायरस लिवर में जाने के बाद आसानी से नहीं मरता है। बल्कि धीरे धीरे बढ़ता ही रहता है।

हेपेटाइटिस सी के लक्षण

1. पीलिया होना

2. मांसपेशियों में लगातार दर्द रहना

3. थकान और चक्कर आना

4. बोलने में दिक्कत होना

5. पेरों में खुजली और सूजन होना

6. स्किन और आंखों का पीला होना

7. पेशाब का रंग डार्क होना

8. भूख की कमी या कुछ भी अच्छा न लगना

9. चोट या खरोंच लगने पर आसानी से खेन निकलना

हेपेटाइटिस होने का कारण

इस वायरस की चपेट में आने के कई कारण हैं। जिसमें असुरक्षित संबंध बनाना, ड्रग्स का सेवन, नीडल्स, मां से बच्चे में आना, किसी संक्रमित व्यक्ति का सामान यूज़ करना जैसे कपड़े, ब्रश, रेजर या नेलकटर आदि का इस्तेमाल करना शामिल है। हेपेटाइटिस सी वायरस के 7 प्रकार होते हैं जिनके 67 सबटाइप्स हैं। जांच के बाद डॉक्टर उनके वायरस के टाइप के अनुसार दवा देते हैं और इलाज करते हैं।

liver

हेपेटाइटिस से बचाव के तरीके

1. संबंध बनाते वक्त प्रिकॉशन का इस्तेमाल करें।

2. अगर आपको शरीर में टैटू बनाने का शौक है तो किसी ऐसी शॉप को चुनें जो अच्छी हो, 3. यदि संभव हो तो उसके बारे में थोड़ा पढ़ लें।

4. किसी अनजान व्यक्ति की चीजो को इस्तेमाल करने से बचें।

5. किसी अन्य के द्वारा इस्तेमाल की गई नीडल का इस्तेमाल न करें।