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Written By: Anshumala | Updated : April 17, 2020 6:00 PM IST
World Hemophilia Day 2020: हीमोफीलिया में लगातार खून बहना ठीक नहीं, जानें इस रोग के लक्षण, कारण और इलाज।
World Hemophilia Day 2020: आज है 'विश्व हीमोफीलिया दिवस'। हीमोफीलिया (Hemophilia) एक तरह का गंभीर रक्त विकार (Blood disorder) है। मुख्य रूप से यह एक अनुवांशिक बीमारी (Genetic disease) है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं की तुलना में यह रोग पुरुषों में अधिक होता है। यदि आप इस रोग से ग्रस्त हैं, तो चोट लगने पर आपके शरीर से खून बहना बंद नहीं होगा। यह हीमोफीलिया का मुख्य लक्षण (Symptoms of Hemophilia) है।
एसजीपीजीआई के हिमैटोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया नित्यानन्द के अनुसार, "हीमोफीलिया (Hemophilia) रक्तस्राव संबंधी एक अनुवांशिक बीमारी है। इससे ग्रसित व्यक्ति में लम्बे समय तक रक्त स्राव होता रहता है। यह खून में थक्का जमाने वाले आवश्यक फैक्टर के न होने या कम होने के कारण होता है। रक्तस्राव चोट लगने या अपने आप भी हो सकता है। मुख्यत: रक्तस्राव जोड़ो, मांसपेशियों और शरीर के अन्य आंतरिक अंगों में होता है और अपने आप बन्द नहीं होता है।
इस थीम पर मनाया जा रहा वर्ल्ड हीमोफीलिया डे 2020, जानें कैसे होता है इस बीमारी का इलाज
हीमोफीलिया होने पर शरीर में नीले निशान बन जाते हैं। जोड़ों में सूजन आना और रक्तस्राव होना। अचानक कमजोरी आना और चलने में तकलीफ होना। नाक से अचानक खून बहना भी इसके ही लक्षण (Hemophilia Symptoms) हैं। यदि यह रक्तस्राव रोगी की आंतों में अथवा दिमाग के किसी हिस्से में शुरू हो जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में इलाज जितनी जल्दी हो, मरीज की जान के लिए उतना ही अच्छा है।
World Hemophilia Day 2020: क्या है हीमोफीलिया रोग? ब्लीडिंग से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
डॉ. सोनिया के अनुसार, "यदि हीमोफीलिया रोगी के रक्त में थक्का जमाने वाले फैक्टर 8 की कमी हो, तो इसे हीमोफीलिया ए कहते हैं। यदि रक्त में थक्का जमाने वाले फैक्टर 9 की कमी हो, तो इसे हीमोफीलिया बी कहते हैं। इस प्रकार मरीज को जिस फैक्टर की कमी होती है, वह इंजेक्शन के जरिए उसकी नस में दिया जाता है। इससे रक्तस्राव रुक सके, यही हीमोफीलिया की एक मात्र औषधि है। ऐसे में हीमोफीलिया से ग्रस्त व्यक्तियों को अपनी दिनचर्या का खास ख्याल रखना चाहिए। सही समय पर इंजेक्शन लेना, व्यायाम करना, रक्त संचारित रोग (एचआईवी, हेपिटाइटिस बी व सी आदि) से बचाव जरूरी है।"
विरासत में मिलता है हीमोफीलिया, सतर्क रहना है बहुत ही जरूरी
हीमोफीलिया के मरीजों का इलाज बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं किया जा सकता है। इस रोग से पीड़ित लोगों का दांत का इलाज करना भी बहुत मुश्किल होता है। रक्त प्रोटीन 'क्लॉटिंग फैक्टर' की कमी होने के कारण ऐसा होता है। इसमें फैक्टर बहते हुए रक्त के थक्के को जमाकर, उसका बहना रोकता है। फैक्टर 8 ब्लड में नहीं रहता है, तो उसे हीमोफिलिक कहा जाएगा। यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी यह ट्रान्सफर होता है।
World Hemophilia Day 2020: हीमोफीलिया क्या है? जानिए इसके लक्षण और बचाव
1 हीमोफीलिया होने से आपको कई तरह की शारीरिक परेशानियां (Complications & Symptoms of Hemophilia) हो सकती हैं। इसमें आपके शरीर में काफी गंभीर रक्तस्राव हो सकते हैं। यह मांसपेशियों में होता है, जिससे हाथ-पैरों में सूजन हो सकती है और दर्द भी हो सकता है।
2 जब शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव होता है, तो इससे जोड़ों पर भी दबाव पड़ता है। इस वजह से आपको दर्द हो सकता है। इसका इलाज कराना जरूरी है, नहीं तो आपको अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।
3 चोट लगने पर शरीर से अधिक खून बह जाता है, ऐसे में कई बार पीड़ित व्यक्ति को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। खून चढ़ाने के दौरान संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अब पहले के मुकाबले खून की अच्छी तरह से जांच की जाती है, उसके बाद ही किसी व्यक्ति को चढ़ाया जाता है।
4 कई बार मरीज का इलाज करते समय इम्यून सिस्टम पर क्लॉटिंग फैक्टर्स का उल्टा असर होता है। इस स्थिति में इम्यून सिस्टम इनहिबिटर्स प्रोटीन्स तैयार कर लेती है, जिससे ब्लड को क्लॉट में बदलने वाले फैक्टर्स इनएक्टिव हो जाते हैं। ऐसे में इलाज करना मुश्किल ही नहीं कम फायदेमंद भी होता है।
इनपुट : (आईएएनएस हिंदी)