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दिल की बीमारी का खतरा हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है. हार्ट अटैक हो या हार्ट फेलियर की घटना आये दिन आप पढ़ते रहते हैं. बेहतर जीवनशैली और खान-पान से हार्ट अटैक और दिल की बीमारी से बचा जा सकता है. हृदय रोग की संभावना उन लोगों में ज्यादा होती है, जो एक्सरसाइज, योग या वर्कआउट नहीं करते हैं. कुछ लोग नियमित तौर पर एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं. कुछ लोगों में उम्र के बाद एक्सरसाइज करने की क्षमता नहीं होती है. ऐसे लोगों के लिए योग सबसे अच्छा तरीका है. हम यहां पर योग के दो ऐसे आसन (Yoga for Healthy Heart) बता रहे हैं हृदय रोग से बचाते हैं. तो आइए जानते हैं इन दो योगासन (Yoga for Healthy Heart) के बारे में...
अगर आपको दिल की बीमारी का खतरा सता रहा है तो आपको नियमित तौर पर वज्रासन करना चाहिए. वज्रासन योग बहुत सरल है इसके लिए आपको कोई तैयारी भी नहीं करनी है. इसे आप किसी भी समय कर सकते हैं. यहां तक कि खाना-खाने के बाद भी वज्रासन योग किया जा सकता है.
जमीन पर दरी या चटाई लगाकर दोनों पैर को सामने फैलाकर बैठ जाएं.
दोनों हाथों को फर्श पर कुल्हों से सटाकर रखें, शरीर का पूरा भार हाथों पर न लें.
अब हाथ पर जोर देते हुए पहले दायां पैर फिर बायां पैर मोड़कर कूल्हे या बट के नीचे रखें.
कूल्हे के नीचे रखे पैर इस तरह हों की पैर की एड़ी कूल्हे की हड्डी को टच कर रही हो.
इसके बाद दोनों हाथों को सामने घुटने या जांघ पर रखे लें. इस समय शरीर एकदम सीधा होना जरूरी है.
वज्रासन की अवस्था में 3 से 10 मिनट तक रह सकते हैं. इसके लिए अभ्यास से समय बढ़ाया जा सकता है.
वज्रासन करने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है. पैर और शरीर की नसें व मांसपेशियां मजबूत होती हैं. पीठ दर्द में भी वज्रासन फायदेमंद होता है.
घुटने में चोट या गठिया की परेशानी होने पर वज्रासन नहीं करना चाहिए.
टी-चक्रासन करने के लिए फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को कंधे की चौड़ाई जितनी दूरी पर रखें. हाथों को धीरे-धीरे सामने ले आएं, हथेलियों को एक-दूसरे के सामने रखें. अब सांस छोड़ते हुए बाईं ओर इस तरह मुड़ें कि दाएं हाथ की हथेली बाएं कंधे को छू जाए.
कुछ देर इसी मुद्रा में रुकें, इसके बाद सांस अंदर लेते हुए धीरे-धीरे सामने की ओर आ जाएं. अब सांस छोड़ते हुए दाईं ओर इस तरह मुड़ें कि बाएं हाथ की हथेली दाएं कंधे को छू जाए. कुछ देर इसी मुद्रा में रुकने के बाद सांस अंदर लेते हुए सामने की ओर आएं, हाथ नीचे ले जाएं.
टी-चक्रासन रक्त प्रवाह को सुचारु बनाता है, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी करके हार्ट अटैक से सुरक्षित रखता है. कमर और उसके आसपास के हिस्सों में जमी चर्बी घटाने में भी टी-चक्रासन असरदार है. इसके अभ्यास से डायबिटीज भी नियंत्रित रहता है.
अगर आपके पेट का ऑपरेशन हुआ है या आपको स्लिप डिस्क की शिकायत है तो इस आसन का अभ्यास न करें.