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उच्च हार्ट रेस्टिंग रेट के कारण युवा भारतीयों में बढ़ रहा है दिल की बीमारियों का खतरा। © Shutterstock.
भारत के हेल्थ सॉल्यूशन इनोवेटर अगत्सा द्वारा हाल ही में एकत्रित किए गए आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि भारतीयों (heart disease in young Indians) में औसत हृदय गति आवश्यक 72 की बजाय 83 बीट प्रति मिनिट है। अगस्ता के संकेतलाइफ डिवाइस पर 70,000 से अधिक ईसीजी के आंकड़ों के परिणाम भी सामने आए हैं, जिनमें यह पता चला है कि 40 और 60 वर्ष से कम की युवा आबादी (heart disease in young Indians) 60 वर्ष से अधिक की आयु वालों की तुलना में उच्च स्तर पर थी, जिससे इस आयु वर्ग में तनाव के स्तर में वृद्धि हुई है। इंडियन हार्ट स्टडी द्वारा 35 भारतीय शहरों में 18,000 से अधिक प्रतिभागियों पर किए गए एक अन्य अध्ययन ने भी अगत्सा के निष्कर्षों की पुष्टि की है। ऐसे में युवाओं (heart disease in young Indians) को अपने दिल की सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए।
Healthy Heart Tips : दिल की बीमारियों से बचना है, तो अपनाएं ये हेल्दी हैबिट्स
संकेतलाइफ डिवाइस (SanketLife) से ली गई करीब 70 हजार से अधिक ईसीजी के परिणामों से प्राप्त डाटा से पता चला है कि उम्र 40 से 60 वर्ष की उम्र के व्यक्तियों की हार्ट गति 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों की तुलना में अधिक पाई गई, ऐसा इस आयु वर्ग में अधिक तनाव के कारण होता है। इंडियन हार्ट इंस्टिट्यूट द्वारा 35 भारतीय शहरों के 18 हजार प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में भी अगत्सा के निष्कर्षों की पुष्टि हुई है। अध्ययनों से पता चलता है कि दिल की धड़कन की दर में हर अतिरिक्त वृद्धि क्रमशः हृदय रोग और कोरोनरी हृदय रोग के 1 और 2 प्रतिशत अधिक जोखिम से जुड़ी है। इस प्रकार जीवनशैली में परिवर्तन के बारे में जागरूकता पैदा करने और हेल्थकेयर सेक्टर में एक मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की आवश्यकता है, जो बढ़ती समस्या को प्रभावी ढंग से संबोधित कर सके।
अगत्सा के सीओओ एवं को-फाउंडर नेहा रस्तोगी का कहना है कि कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण होने वाली मृत्यु भारत में बड़ी स्वास्थ्य सेवा बनकर उभरी है। इसने हर उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित किया है। हमारे आंकड़े बताते हैं कि युवा आबादी (heart problem in youngster) के बीच तनाव दिल की समस्याओं का एक प्रमुख कारण बन रहा है। इस तरह तत्काल जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता है। विश्व हृदय दिवस पर, इस तथ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है कि सीवीडी किसी भी आयु वर्ग और प्रौद्योगिकी के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
इस संबंध में हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया एवं मेडिकल एसोसिएशन ऑफ एशिया एवं ओसेनिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल जो इस अध्ययन का हिस्सा रहे हैं, ने कहा कि तनाव से लोअर हार्ट रेट बढ़ सकती है, जो सहानुभूति से कार्य करने वाले कमजोर हार्ट का प्रतीक है। 30 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में काम के तनाव और भागती-दौड़ती जीवनशैली के कारण हार्ट की समस्याएं होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। ये अस्वास्थ्यकर भोजन, सिगरेट, शराब भी लेते हैं और एक्सरसाइज को टाल देते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इन आदतों के प्रभाव पर जागरूकता बढ़ाई जाए और समय पर एक्शन लिया जाए।
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हृदय रोगों (सीवीडी) का पैटर्न भी भारतीय टीयर 3 शहरों में व्यापकता के साथ बदल रहा है, जबकि दिल की बीमारियों को पारंपरिक रूप से शहरी लोगों में अधिकता में माना जाता है। हालांकि, संकेत लाइफ के आंकड़े इससे अलग खुलासे करते हैं। आंकड़े बताते हैं हार्ट की समस्या 24 वर्ष के युवा तक को प्रभावित करती है और सीवीडी से घिरे 88.5 प्रतिशत रोगी पुरुष होते हैं। संकेतलाइफ के 11 प्रतिशत उपयोगकर्ता हार्ट पेशेंट्स हैं और 42.1 प्रतिशत मरीज इससे जुड़ी बीमारियों जैसे डायबिटिज से ग्रसित हैं। यह तथ्य चेतावनी देता है कि टियर दो एवं टियर तीन शहरों से मरीजों का सर्वाधिक प्रतिशत हैं, जिनमें सीवीडी बीमारियां हैं। केवल 26.15 प्रतिशत लोग ही टियर वन शहरों से हार्ट की समस्या के दायरे में आए हैं। इसका कारण अनियंत्रित तनाव और अधिक जंक फूड के साथ अखाद्यकर भोजन है।