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Written By: Anshumala | Published : September 27, 2019 7:42 PM IST
दिल के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। © Shutterstock.
हर साल दुनिया भर में दिल की बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 29 सितंबर को ''विश्व हृदय दिवस'' (World heart day 2019) का आयोजन किया जाता है। आगामी ''विश्व हृदय दिवस'' के मद्देनजर एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स ने पिछले तीन सालों के दौरान व्यापक कोरोनरी रिस्क प्रोफाइल टेस्टिंग के आंकड़ों का विश्लेषण जारी किया है। यह विश्लेषण देश भर में एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स लैब्स द्वारा सीरम ट्राइग्लीसेराइड के 2,487,202 सैम्पल्स पर आधारित है। इसमें पाया गया है कि पुरुषों में 65 प्रतिशत में असामान्य सीरम ट्राइग्लीसेराइड (Triglyceride)के मामले महिलाओं 35 प्रतिशत की तुलना में अधिक हैं। साथ ही उत्तरी क्षेत्र में अन्य क्षेत्रों की तुलना में असामान्य सीरम ट्राइग्लीसेराइड (Triglyceride) के मामले सबसे अधिक 54 प्रतिशत हैं।
यह विश्लेषण इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया है कि दिल की बीमारियां (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) भारत सहित दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। देश के ग्रामीण शहरों में भी इन बीमारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण हाइपर लिपिडेमिया, हाइपरटेंशन, डायबिटीज और पर्यावरणी तनाव है।
हाइपरट्राइग्लीसेरिडेमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में ट्राइग्लीसेराइड का स्तर बढ़ जाता है। अक्सर इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ऐसा डायबिटीज, मोटापे और गतिहीन जीवनशैली के कारण होता है। ट्राइग्लीसेराइड बढ़ने से धमनियां यानी आर्टरीज सख्त हो जाती हैं, साथ ही पैनक्रियाज में सूजन आ जाती है, जिससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक, दिल की अन्य बीमारियों और पैनक्रियाटिटिस की संभावना बढ़ जाती है।
इस विश्लेषण पर एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के एडवाइजर और मेंटर- रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. बी आर दास का कहना है कि भारत में दिल की बीमारियों का बोझ पिछले कुछ दशकों में लगातार बढ़ा है। पुरुषों में सीरम ट्राइग्लीसेराइड का स्तर अधिक होने के कारण इसकी संभावना अधिक होती है। हाइपरट्राइग्लीसेरिडेमिया स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। इससे कोरोनरी आर्टरी रोगों की संभावना बढ़ने के साथ मृत्यु की संभावना भी बढ़ जाती है। अक्सर इसका संबंध प्री-डायबिटीज से होता है। इसके अलावा कई अन्य कारक जैसे उच्च रक्तचाप, ब्लड शुगर बढ़ना, शरीर में फैट बढ़ना आमान्य कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लीसेराइड भी इसके कारण हो सकते हैं। साथ ही उच्च रक्तचाप और मोटापे से भी दिल की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
शुरुआत में हाइपरट्राइग्लीसेरिडेमिया के प्रबंधन के लिए जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी है। इसके लिए वजन पर नियन्त्रण रखना, सेहतमंद आहार, तंबाकू का सेवन ना करें। मैटाबॉलिक सिन्ड्रोम एवं अन्य कारणों के लिए मरीज की जांच की जाती है। अगर मरीज को डायबिटीज है, तो ग्लाइसेमिक नियंत्रण द्वारा ट्राइग्लीसेराइड के लेवल पर नियंत्रण रखा जा सकता है।