
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : July 3, 2020 3:32 PM IST
cardic arrest
कार्डियक अरेस्ट हृदय से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें विभिन्न हिस्सों के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान सही तरह से नहीं हो पाता है, जिस वजह से धड़कनों की गति अचानक से बढ़ने लगती है। जब व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आता है तो धड़कनें सामान्य (60-100 प्रति मिनट) से बढ़कर 300-400 तक हो जाती हैं। इस स्थिति में ब्लड प्रेशर अचानक से गिरने लगता है। इस स्थिति में हृदय के कामकाज में अनियमितता आ जाती है और हृदय शरीर के अन्य हिस्सों तक खून की सप्लाई नहीं कर पाता है। 3 जुलाई को बॉलीवुड वेटरेन कोरियोग्राफर सरोज खान की मौत भी कार्डियक अरेस्ट के चलते हुई है। वैसे तो यह अटैक अचानक से आता है लेकिन कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें अगर आप समय रहते नोटिस करें तो अपनी जान बचा सकते हैं। आज हम आपको कार्डियक अरेस्ट के लक्षण, इससे बचाव और यह हार्ट अटैक से कैसे अलग है बता रहे हैं। तो आइए जानते हैं विस्तार से—
अगर लाइफस्टाइल सही न हो तो कार्डियक अरेस्ट कभी भी किसी को भी आ सकता है लेकिन कुछ लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। जिन लोगों के घर खानदान में किसी व्यक्ति की कार्डियक अरेस्ट के कारण मौत हुई हो तो उन्हें भी इसका खतरा रहता है। यानि कि आनुवांशिक रूप से यदि किसी के परिवार में 50-60 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट आया हो तो उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है, क्योंकि उन्हें भी इसका खतरा रहता है। इसके अलावा जिन लोगों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज) या हाइपरटेंशन, डायबिटीज, शराब पीना या धूम्रपान की लत हो तो उन्हें भी कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है।
अगर आप यह समझते हैं कि कार्डियक अटैक अचानक से चंद मिनटों में आ जाता है तो ऐसा नहीं है। यह अटैक आने से पहले शरीर कुछ संकेत देता है जिन्हें यदि आप नोटिस करें तो जरूरी प्रबंधन कर अपनी जान या अपने आसपास मौजूद पीड़ित की जान बचा सकते हैं। तो आइए जानते हैं कार्डियक अरेस्ट के चंद मिनट पहले शरीर क्या संकेत देता है। अधिकतर मामलों में पीड़ित बेहोशी, पसीना आना, दिल की धड़कन का अचानक से बढ़ जाना, जी मचलना, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ होना, अकेलापन महसूस होना, आंखों के सामने अंधेरा छा जा जाना और सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।
किसी व्यक्ति को जब कार्डियक अरेस्ट आता है और डॉक्टर तक पहुचंने में देरी है तो इसे नियंत्रित करने के लिए मरीज की हाथ की हथेलियों और पैर के तलवों को रगड़ना चाहिए। माथे पर गीली पट्टी कर और पानी पिलाकर भी कुछ आराम मिल सकता है। वैसे डॉक्टर इस स्थिति में पीड़ित के हृदय को इलेक्ट्रिक शॉक देकर नियंत्रित किया जाता है।